टाटा ग्रुप की पैरेंट कंपनी टाटा संस को लेकर बड़ी खबर आई है. दरअसल, भारतीय रिजर्व बैंक के एक फैसले के बाद अब टाटा संस के आईपीओ का रास्ता साफ (Tata Sons IPO) हो गया है और उसे अब अनिवार्य रूप से शेयर बाजार में लिस्ट होना होगा. सूत्रों के मुताबिक, आरबीआई ने टाटा संस की कोर इन्वेस्टमेंट कंपनी के तौर पर अपना रजिस्ट्रेशन सरेंडर करने की अर्जी को ठुकरा दिया है. इससे Tata Group की होल्डिंग कंपनी की स्टॉक मार्केट में लिस्टिंग से बचने की कोशिश नाकाम हो गई है और अब उसके पब्लिकली ट्रेडेड कंपनी बनना होगा.
2024 में अर्जी, RBI ने कर दी खारिज
पीटीआई की रिपोर्ट में सूत्रों के हवाले से बताया गया कि टाटा संस एनबीएफसी के दायरे से बाहर निकालकर शेयर बाजार में लिस्ट होने से बचना चाहती थी और इसके लिए अपना रजिस्ट्रेशन सरेंडर करने की अर्जी डाली थी, जिसे केंद्रीय बैंक की ओर से खारिज कर दिया गया है. टाटा संस ने मार्च 2024 में गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनी के रूप में पंजीकरण रद्द करने के लिए आवेदन किया था. इसके बाद उसे स्टॉक-मार्केट में लिस्ट होना ही होगा.
RBI के अर्जी ठुकराने के मायने क्या?
सूत्रों के अनुसार, टाटा संस के कंपनी सचिव और मुख्य वित्तीय अधिकारी को शनिवार को एक पत्र मिला, जिसमें इस फैसले की जानकारी दी गई. RBI द्वारा टाटा संस की अर्जी ठुकराए जाने का सीधा मतलब ये है कि Tata Sons को अपर लेयर एनबीएफसी के रूप में ही क्लासिफाइड किया जाएगा, जिसके लिए स्टॉक एक्सचेंजों पर अनिवार्य लिस्टिंग जरूरी है. रिपोर्ट के मुताबिक, RBI ने टाटा संस को पहली बार सितंबर 2022 में इस कैटेगरी में शामिल किया था, जिसके बाद लिस्टिंग के लिए 3 साल की डेडलाइन शुरू हो गई थी.
डेडलाइन से पहले दाखिल की अर्जी
Share Market में लिस्ट होने की तीन साल डेडलाइन खत्म होने से पहले ही NBFC ढांचे से बाहर निकलने के प्रयास में, टाटा संस ने 2024 में 21,000 करोड़ रुपये से अधिक का कर्ज चुकाया और अपना रजिस्ट्रेशन सरेंडर करने के लिए आवेदन कर दिया था. इस कदम से कंपनी को एक अनियमित होल्डिंग कंपनी के रूप में काम करने और निजी स्वामित्व वाली कंपनी बने रहने की अनुमति मिल जाती. RBI ने आवेदन को 2025 तक लंबित रखा और टाटा संस को लगातार उच्च स्तरीय एनबीएफसी की सूचियों में शामिल करता रहा. अब इस अर्जी को खारिज कर दिया है.
RBI के बदले नियम से कोशिश नाकाम
गौरतलह है कि इस साल संशोधित RBI Rules के लागू होने के बाद नियामक स्थिति से बचना और भी कठिन हो गया. दरअसल, जून 2026 से प्रभावी इन नियमों ने पूर्व के स्कोर-आधारित सिस्टम के लिए एक नई लिमिट सेट कर दी. नए नियमों के तहत 1 लाख करोड़ रुपये या उससे अधिक की संपत्ति वाली किसी भी NBFC को स्वचालित रूप से उच्च स्तरीय एनबीएफसी के रूप में वर्गीकृत किया जाता है.
मार्च 2026 तक टाटा संस की इंडिपेंडेंट संपत्ति 2 लाख करोड़ रुपये से अधिक थी, जो इस निर्धारित लिमिट से काफी ज्यादा है. इस तरह से RBI ने अगस्त में नए ढांचे के तहत टाटा संस को हाई लेयर में बरकरार रखा. बता दें कि Tata Sons इस कैटेगरी की नई लिस्ट में में शामिल 17 कंपनियों में से एकमात्र नॉन-लिस्टेड निजी कंपनी है. इसमें REC, Power Finance Corp और IRFC जैसी बड़ी सरकारी स्वामित्व वाली एनबीएफसी भी शामिल हैं.
आजतक बिजनेस डेस्क