US Vs Iran: 'पहले नाकाबंदी हटेगी, फिर बात...', ईरानी राष्ट्रपति ने रख दी ये शर्त, क्या करेंगे ट्रंप?

US-Iran के बीच होर्मुज को लेकर बात नहीं बन पा रही है, दूसरी ओर क्रूड ऑयल की कीमतों में बीते सप्ताह तेज उछाल देखने को मिला था. डोनाल्ड ट्रंप द्वारा पाकिस्तान यात्रा रद्द किए जाने के बयान के बाद अब ईरानी राष्ट्रपति ने भी अपना रुख साफ कर दिया है.

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ईरान ने अमेरिका के सामने रखी बड़ी शर्त. (Photo: Reuters) ईरान ने अमेरिका के सामने रखी बड़ी शर्त. (Photo: Reuters)

आजतक बिजनेस डेस्क

  • नई दिल्ली,
  • 26 अप्रैल 2026,
  • अपडेटेड 6:34 PM IST

अमेरिका और ईरान में दूसरे दौर की शांति वार्ता शुरू होने से पहले ही विफल नजर आई है.  एक ओर जहां अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 18 घंटे की लंबी उड़ान न भरने की बात कहते हुए US डेलिगेशन का पाकिस्तान दौरा रद्द कर दिया, तो वहीं ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने सीनियर पाकिस्तानी सैन्य और सरकारी अधिकारियों से मुलाकात के बाद इस्लामाबाद यात्रा खत्म कर दी. इस बीच ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान की ओर शर्त रखते हुए कहा गया है कि जब तक ईरानी बंदरगाहों पर नाकाबंदी जारी रहेगी, कोई बात नहीं होगी. 

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होर्मुज को लेकर अमेरिका और ईरान के रुख से बात बनती नजर नहीं आ रही है. इस टेंशन के बीच क्रूड ऑयल की कीमतों में उछाल जारी है और ये 105 डॉलर प्रति बैरल के पार ट्रेड कर रहा है. वहीं शांति वार्ता भी दनादन विफल हो रही हैं.  

ईरान झुकने को तैयार नहीं
ईरान ने आर्थिक और लॉजिस्टिक संबंधी प्रतिबंधों के लागू रहने तक अमेरिका के साथ नई बातचीत से इनकार कर दिया है. बिजनेस टुडे पर छपी रिपोर्ट में बताया गया है कि राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान ने दो-टूक कहा है कि जब तक ईरानी पोर्ट्स पर अमेरिकी नाकाबंदी नहीं हटेगी, तब तक तेहरान बातचीत की मेज पर वापस नहीं लौटेगा.

ईरानी मीडिया रिपोर्टों की मानें, तो पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ से फोन पर हुई बातचीत के दौरान पेजेश्कियान ने इस बात पर जोर दिया, उन्होंने कहा कि अमेरिका से बातचीत का कोई भी नया दौर शुरू होने से पहले उसे नाकाबंदी समेत परिचालन संबंधी प्रतिबंधों को दूर करना चाहिए. 

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ईरान में चल क्या रहा है? 
रिपोर्ट के मुताबिक, ईरानी नेतृत्व के बीच आंतरिक कलह के बारे में ट्रंप के हालिया दावे और एक गोपनीय पत्र ने तेहरान में तनाव को बढ़ाने का काम किया है. ट्रंप ने कहा है कि ईरान की लीडरशिप में जबरदस्त अंदरूनी कलह और भ्रम की स्थिति है. इसके लिए कौन जिम्मेदार है, ये उन्हें खुद नहीं पता.

मोजतबा खामेनेई को संबोधित एक पत्र में ईरान की आर्थिक स्थिति को गंभीर और असहनीय बताया गया है. इसमें अधिकारियों से परमाणु मुद्दे पर अमेरिका के साथ बातचीत पर गंभीरता से विचार करने का आग्रह किया गया है. 

इससे यह संकेत मिलता है कि वरिष्ठ अधिकारी फरवरी के अंत में शुरू हुए अमेरिका और इज़राइल के साथ संघर्ष के बाद बढ़ते आर्थिक दबाव के बीच देश की दिशा को लेकर चिंतित हैं. ऐसा भी बताया जाता है कि इस पत्र पर मोहम्मद बगेर गालिबफ, पेजेश्कियान, अरघची और मुस्तफा पोरमोहम्मदी समेत कई टॉप हस्तियों ने हस्ताक्षर किए हैं. इस पत्र को पूरी तरह गोपनीय रखने का प्रयास था, लेकिन कथित तौर पर यह बाहर प्रसारित हो गया.

'हम ईरान और क्रांतिकारी'
मोहम्मद बगेर गालिबफ ने ईरान में आंतरिक मतभेदों की अटकलों को खारिज करते हुए कहा है कि ईरान में कोई कट्टरपंथी या उदारवादी नहीं है, बल्कि हम सब ईरानी और क्रांतिकारी हैं.  दूसरी ओर राष्ट्रपति पेजेश्कियन ने भी इसी तरह की भावना व्यक्त की और जबकि न्यायपालिका प्रमुख गुलाम-हुसैन मोहसेनी एजेई ने गुटबाजी की बातों को बेतुका और निराधार करार दिया है. 

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होर्मुज पर टेंशन, क्रूड में उछाल 
बता दें कि अमेरिका-ईरान में बात नहीं पाने के बीच बीते सप्ताह क्रूड की कीमतों में एक बार फिर से उछाल देखने को मिला था. अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड ऑयल की कीमत (Brent Crude Oil Price) 105 डॉलर प्रति बैरल के पार ट्रेड कर रहा है. अगर अगले सप्ताह दोनों देशों के बीच Hormuz Strait को लेकर टेंशन और बढ़ती है, तो फिर कच्चे तेल की कीमतों में भी तेजी देखने को मिल सकती है और इसका असर शेयर बाजारों पर भी देखने को मिल सकता है.

एक्सपर्ट्स का भी कहना है कि अगले सप्ताह शेयर बाजार की चाल पर अमेरिका-ईरान के बीच बात को लेकर आने वाले अपडेट और कच्चे तेल की कीमतों का असर देखने को मिलेगा. 

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