जियो प्लेटफॉर्म्स का 30,213 करोड़ रुपये का आईपीओ 21 अक्टूबर को सब्सक्रिप्शन के लिए खुल गया. इसे देश का अब तक का सबसे बड़ा आईपीओ बताया जा रहा है. पहले ही दिन संस्थागत निवेशकों की ओर से अच्छी दिलचस्पी देखने को मिली. सुबह 10 बजे तक योग्य संस्थागत खरीदारों (QIB) के लिए आरक्षित हिस्सा 2.86 गुना सब्सक्राइब हो चुका था. वहीं, ग्रे मार्केट में आईपीओ का प्रीमियम प्राइस बैंड के ऊपरी स्तर से करीब 24 फीसदी ऊपर चल रहा था. इससे शेयर बाजार में इस आईपीओ को लेकर निवेशकों की शुरुआती उत्सुकता का संकेत मिला.
क्वालिफाइड इंस्टीट्यूशनल बिडर्स (QIB) के लिए आरक्षित हिस्सा इश्यू खुलने के पहले 30 मिनट में ही पूरी तरह सब्सक्राइब हो गया. सुबह 10 बजे, यानी एक घंटे की बोली के बाद, QIB कोटा अपने लिए रखे शेयरों के मुकाबले 2.86 गुना भर चुका था. उसी समय तक पूरा इश्यू 83 फीसदी सब्सक्राइब हो चुका था.
बाकी कैटेगरी का हाल
पहले घंटे में दूसरी कैटेगरी में रुझान अपेक्षाकृत धीमा रहा, नॉन-इंस्टीट्यूशनल निवेशकों (NII) का हिस्सा 14 फीसदी और रिटेल हिस्सा 13 फीसदी भरा. जियो प्लेटफॉर्म्स के कर्मचारियों का कोटा 35 फीसदी भरा, जबकि रिलायंस इंडस्ट्रीज के मौजूदा शेयरधारकों के लिए रखा गया हिस्सा 26 फीसदी सब्सक्राइब हुआ.
ये शुरुआती आंकड़े हैं, भारतीय IPO में नॉन-इंस्टीट्यूशनल और रिटेल निवेशकों की बोलियां अक्सर इश्यू बंद होने की तारीख के करीब आने पर बढ़ती हैं. इसलिए इश्यू खुले रहने के तीन दिनों में तस्वीर बदल सकती है.
पैसा कहां जाएगा
यह IPO पूरी तरह फ्रेश इश्यू है और इसमें ऑफर फॉर सेल (OFS) का हिस्सा नहीं है. यानी जुटाई गई रकम कंपनी के पास जाएगी, मौजूदा शेयरधारकों के पास नहीं. रिपोर्ट के मुताबिक इस रकम का बड़ा हिस्सा मौजूदा कर्ज घटाने में इस्तेमाल होगा.
प्राइसिंग का संदर्भ
प्राइस बैंड 1,065 से 1,119 रुपये प्रति शेयर है, प्राइसिंग पर कोटक महिंद्रा बैंक के फाउंडर उदय कोटक ने कहा है कि जियो अपनी तरह की अकेली कंपनी है और दूसरी कंपनियों की तुलना में निवेशकों के लिए आकर्षक है. प्राइस बैंड का ऊपरी स्तर FY26 के 34 गुना के बराबर बैठता है, जबकि पीयर कंपनियां 41 गुना पर हैं.
ग्रे मार्केट क्या कह रहा है?
अनौपचारिक ग्रे मार्केट में जियो प्लेटफॉर्म्स के शेयर 268 रुपये के प्रीमियम पर चल रहे हैं, जो प्राइस बैंड के ऊपरी स्तर से करीब 24 फीसदी ज्यादा है. ग्रे मार्केट प्रीमियम (GMP) अटकलों पर आधारित होता है और इसे न कंपनी मानती है, न एक्सचेंज, असली लिस्टिंग कीमत इससे अलग हो सकती है.
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