भारत के सर्विस सेक्टर ने दिखाया दम! जॉब के मोर्चे पर आई अच्छी खबर, मैन्युफैक्चरिंग की सुस्ती ने बढ़ाई चिंता

भारत के सर्विस सेक्टर में अगस्त के दौरान कारोबार की रफ्तार थोड़ी बढ़ी है. HSBC इंडिया सर्विसेज PMI जुलाई के 53.3 से बढ़कर 54.1 पर पहुंच गया. नए ग्राहक और ऑर्डर मिलने से कंपनियों को सहारा मिला. रोजगार के मोर्चे पर भी अच्छी खबर रही और नई नौकरियां देने की रफ्तार 15 महीने के उच्च स्तर पर पहुंच गई.

Advertisement
अगस्त 2026 में भारत के सर्विस सेक्टर में तेजी आई और नौकरी के नए मौके 15 महीने के सबसे ऊंचे स्तर पर पहुंचे. (AI Image) अगस्त 2026 में भारत के सर्विस सेक्टर में तेजी आई और नौकरी के नए मौके 15 महीने के सबसे ऊंचे स्तर पर पहुंचे. (AI Image)

आजतक बिजनेस डेस्क

  • नई दिल्ली,
  • 04 सितंबर 2026,
  • अपडेटेड 6:55 AM IST

भारत के सर्विस सेक्टर यानी होटल, रेस्टोरेंट, बैंक, IT, ट्रांसपोर्ट, टेलीकॉम और दूसरी सेवाओं से जुड़े कारोबार में अगस्त के दौरान थोड़ी तेजी देखने को मिली. HSBC इंडिया सर्विसेज PMI बिजनेस एक्टिविटी इंडेक्स जुलाई के 53.3 से बढ़कर अगस्त में 54.1 हो गया. यानी कंपनियों का कारोबार पिछले महीने के मुकाबले बढ़ा है. हालांकि, ग्रोथ की रफ्तार अब भी कमजोर है. मार्च 2022 के बाद यह दूसरी सबसे धीमी रफ्तार रही.

Advertisement

PMI को आसान भाषा में ऐसे समझ सकते हैं कि यह कंपनियों से पूछा जाता है कि पिछले महीने के मुकाबले उनका कारोबार बढ़ा है, घटा है या उतना ही रहा है. इसमें 50 से ऊपर का आंकड़ा कारोबार बढ़ने और 50 से नीचे का आंकड़ा कारोबार घटने का संकेत देता है. अगस्त में सर्विस कंपनियों को नए ग्राहक और नए काम मिले. लोगों और कंपनियों की तरफ से मांग भी बनी रही. इससे कारोबार बढ़ा.

15 महीने में सबसे ज्यादा नौकरियां

लेकिन कुछ कंपनियों ने कमजोर बुकिंग, बाजार में बढ़ती प्रतिस्पर्धा और ट्रांसपोर्ट से जुड़ी गतिविधियों में कमी की शिकायत की. यही वजह है कि कारोबार बढ़ने के बावजूद उसकी रफ्तार बहुत तेज नहीं हो सकी. इस रिपोर्ट की सबसे अच्छी खबर रोजगार को लेकर आई है. अगस्त में सर्विस कंपनियों ने भर्ती जारी रखी और नई नौकरियां देने की रफ्तार 15 महीने के सबसे ऊंचे स्तर पर पहुंच गई. यानी होटल, बैंक, IT, ट्रांसपोर्ट और दूसरी सर्विस कंपनियों में काम की जरूरत बढ़ी है और उसके लिए कर्मचारियों की भर्ती भी हुई है.

Advertisement

यह भी पढ़ें: RBI की स्ट्रेटजी हुई सुपरहिट! NRI ने भर दिया भारत का 'डॉलर खजाना', समय से पहले बंद करनी पड़ी विंडो

कंपनियों का खर्च बढ़ा

दूसरी तरफ कंपनियों के खर्च में भी बढ़ोतरी हुई. बिजली, कर्मचारियों की लागत, डिजिटल प्लेटफॉर्म, मार्केटिंग और दूसरी कारोबारी जरूरतों पर ज्यादा पैसा खर्च हुआ. खर्च बढ़ने का असर कंपनियों की कीमतों पर भी पड़ा. कंपनियों ने ग्राहकों से ली जाने वाली कीमतों में मार्च के बाद सबसे तेज बढ़ोतरी की. हालांकि, महंगाई का दबाव अभी बहुत ज्यादा नहीं बढ़ा है. सीधे शब्दों में कहें तो कंपनियों का कारोबार बढ़ रहा है, लेकिन साथ ही उन्हें अपना कारोबार चलाने में पहले से ज्यादा खर्च भी करना पड़ रहा है.

विदेशों से भी मिल रहा काम

भारत की सर्विस कंपनियों को विदेशों से मिलने वाले काम का भी फायदा मिला. अगस्त में नए विदेशी ऑर्डर मजबूत रहे और इनकी रफ्तार जुलाई जैसी ही रही. कंपनियों को ऑस्ट्रेलिया, ब्राजील, कनाडा, जापान, मलेशिया, सिंगापुर, श्रीलंका और यूएई जैसे देशों से भी कारोबार मिला. इससे भारतीय सर्विस कंपनियों को घरेलू मांग के साथ विदेशी ग्राहकों से भी सहारा मिल रहा है.

अगले एक साल को लेकर कंपनियों का भरोसा जुलाई के मुकाबले लगभग उतना ही रहा. यानी कंपनियों को उम्मीद तो है कि आने वाले समय में कारोबार और मांग बेहतर होगी, लेकिन उनका भरोसा बहुत मजबूत नहीं है. नई इंक्वायरी और टेक्नोलॉजी के बढ़ते इस्तेमाल से कंपनियों को उम्मीद जरूर मिली है. लेकिन उनका भरोसा अभी लंबे समय के औसत से नीचे है.

Advertisement

यह भी पढ़ें: 7.8% vs 2.6% में कौन सा सही? GDP पर सुभाष गर्ग और गौरव वल्लभ का हुआ आमना-सामना

मैन्युफैक्चरिंग की धीमी रफ्तार

अगस्त में भारत के निजी क्षेत्र की कुल कारोबारी गतिविधियों का इंडेक्स यानी कम्पोजित PMI 54.3 रहा. यह फरवरी 2022 के बाद दूसरा सबसे कमजोर स्तर है. इसका मतलब है कि सामान बनाने वाली कंपनियों यानी मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में कारोबार की रफ्तार कुछ धीमी रही. लेकिन सर्विस सेक्टर में गतिविधियां बढ़ीं. इस वजह से सर्विस कंपनियों ने मैन्युफैक्चरिंग की सुस्ती की कुछ भरपाई कर दी.

---- समाप्त ----

Read more!
Advertisement

RECOMMENDED

Advertisement
Latest News in Hindi »