भारत 2029 तक बन जाएगा 5.1 ट्रिलियन डॉलर इकोनॉमी! वित्त मंत्री ने बताया रोडमैप

भारत की अर्थव्यवस्था अगले कुछ वर्षों में 5 ट्रिलियन डॉलर के आंकड़े को पार कर सकती है. वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने संसद में बताया कि आईएमएफ के अनुमान के मुताबिक FY2028-29 तक देश की जीडीपी 5.1 ट्रिलियन डॉलर पहुंच सकती है. सरकार इस लक्ष्य के लिए इंफ्रास्ट्रक्चर, मैन्युफैक्चरिंग, एमएसएमई, कृषि, डिजिटल इकोनॉमी और स्किल डेवलपमेंट पर लगातार निवेश और सुधारों के जरिए तेज आर्थिक विकास की रणनीति पर काम कर रही है.

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Nirmala Sitharaman Nirmala Sitharaman

आजतक बिजनेस डेस्क

  • नई दिल्ली,
  • 04 अगस्त 2026,
  • अपडेटेड 6:53 PM IST

भारत की इकोनॉमी 2028-29 तक 5.1 ट्रिलियन अमेरिकी डॉलर तक पहुंच सकती है. यह अनुमान आईएमएफ के 'वर्ल्ड इकोनॉमिक आउटलुक डाटाबेस, अप्रैल 2026' में दिया गया है. सरकार का कहना है कि इस लक्ष्य के लिए कई मोर्चों पर ग्रोथ स्ट्रैटजी अपनाई गई है. राज्यसभा में लिखित जवाब में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने यह जानकारी दी. उनके मुताबिक, फोकस एग्रीकल्चर, मैन्युफैक्चरिंग, एमएसएमई, इंफ्रा और लॉजिस्टिक्स पर है. इनकम टैक्स और GST सुधारों के जरिए टैक्स सिस्टम को बेहतर बनाने की बात भी कही गई है.

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सरकार ने पब्लिक कैपिटल एक्सपेंडिचर पर लगातार जोर बनाए रखा है. देश में सड़क, पुल, रेलवे, अस्पताल और स्कूल जैसी दीर्घकालिक संपत्तियों के निर्माण और विकास पर किया जाने वाला धन पब्लिक कैपिटल एक्सपेंडिचर कहलाता है. इसके साथ एफडीआई सिस्टम को और आसान बनाने, एक्सपोर्ट बढ़ाने और कीमतों में स्थिरता पर भी सरकार का फोकस है. बेहतर वित्तीय प्रबंधन और कारोबारी माहौल सुधारना भी इसी रणनीति का हिस्सा है.

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बताया कि सरकार फ्री ट्रेड एग्रीमेंट और कम्प्रिहेंसिव इकनॉमिक पार्टनरशिप या कोऑपरेशन एग्रीमेंट का दायरा बढ़ा रही है. मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ाने के लिए प्रोडक्शन लिंक्ड इंसेंटिव स्कीम और मेक इन इंडिया पर जोर दिया गया है. नेशनल लॉजिस्टिक्स पॉलिसी, नेशनल सिंगल विंडो सिस्टम और पीएम गतिशक्ति भी इसी रोडमैप का हिस्सा हैं.

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MSME सेक्टर पर बढ़ा फोकस

उन्होंने एमएसएमई सेक्टर को बूस्ट देने के लिए गारंटी बढ़ाने और इमरजेंसी क्रेडिट गारंटी स्कीम जैसे कदम गिनाए. एमएसएमई वर्गीकरण मानकों में बदलाव, TReDS इकोसिस्टम को मजबूत करना और उद्यम रजिस्ट्रेशन आसान करना भी इसमें शामिल है. गवर्नमेंट मार्केट प्लेस तक पहुंच बढ़ाने और पीएम विश्वकर्मा स्कीम के तहत सपोर्ट की भी बात कही गई है.

वित्त मंत्री ने कहा कि सर्विस सेक्टर और बजट सर्विस सेक्टर को डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर और जीसीसी के जरिए मजबूत किया जा रहा है. मेडिकल वैल्यू ट्रैवल, ऑरेंज इकोनॉमी, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, डिजिटल इकोसिस्टम और स्किल डेवलपमेंट पर भी फोकस है. बजट 2026-27 में नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ हॉस्पिटैलिटी, रीजनल मेडिकल हब और एलाइड हेल्थ प्रोफेशनल संस्थानों के विस्तार जैसे कदम बताए गए. इसी बजट में AVGC कंटेंट क्रिएटर लैब और यूनिवर्सिटी टाउनशिप सपोर्ट भी शामिल हैं.

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खेती, नए सेक्टर और स्किलिंग

निर्मला सीतारमण ने कहा कि खेती में सिंचाई, टेक्नोलॉजी अपनाने, डिजिटल एग्रीकल्चर और फसल विविधीकरण पर फोकस है. कटाई के बाद के इंफ्रा और बेहतर बाजार पहुंच को भी अहम माना गया है. हाल के बजट में सेमीकंडक्टर्स, इलेक्ट्रॉनिक्स, बायोफार्मास्यूटिकल्स और रेयर अर्थ्स पर जोर है. केमिकल्स, कैपिटल गुड्स, क्लीन एनर्जी और एडवांस्ड मैन्युफैक्चरिंग को भी ग्रोथ ड्राइवर बताया गया है. पीएम-सेतु स्कीम का मकसद उद्योग के मुताबिक स्किलिंग और भविष्य के लिए तैयार वर्कफोर्स बनाना है.

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सीतारमण ने कहा कि FY25 में बैंकों ने SARFAESI कानून के तहत 2,15,709 मामले दर्ज किए. इन मामलों में ₹1,03,180 करोड़ की रकम शामिल थी. इनमें से बैंक ₹32,466 करोड़ की वसूली कर सके.

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