कच्चे तेल के दाम में तेजी के बीच यह चर्चा तेज हो गई है कि पेट्रोल और डीजल के दाम बढ़ सकते हैं. हालांकि, इस बीच सकरार ने इन चर्चाओं पर ब्रेक लगा दी है और कहा है कि अभी पेट्रोल और डीजल के दाम बढ़ाने का कोई भी प्रस्ताव नहीं है.
सूत्रों के अनुसार, कच्चे तेल की कीमतों में भारी बढ़ोतरी के बावजूद, सरकार के पास फिलहाल पेट्रोल और डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी करने का कोई प्रस्ताव नहीं है, क्योंकि अधिकारी ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करने और स्थिर ईंधन आपूर्ति बनाए रखने पर फोकस कर रहे हैं.
22 सितंबर तक भारतीय कच्चे तेल की कीमत बढ़कर 115.27 डॉलर प्रति बैरल हो गई है, जबकि सितंबर के लिए अब तक का एवरेज करीब 114.83 डॉलर प्रति बैरल है. नवंबर में होने वाले अमेरिकी मिड टर्म चुनावों से पहले कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव जारी रहने की उम्मीद है, जिससे भारत के तेल आयात बिल और घरेलू ईंधन की कीमतों को लेकर अनिश्चितता बढ़ रही है.
तेल कंपनियों को भारी नुकसान
रेटिंग एजेंसी ICRA के अनुसार, घरेलू खुदरा कीमतों में कोई बदलाव न होने के कारण, तेल विपणन कंपनियों (OMCs) का डेली नुकसान 530 करोड़ रुपये होने का अनुमान है. ओएमसी का मार्केटिंग मार्जिन पेट्रोल पर वर्तमान में 8 रुपये प्रति लीटर और डीजल पर 9 रुपये प्रति लीटर नकारात्मक होने का अनुमान है, और सितंबर 2026 में एलपीजी सिलेंडर पर अंडर-रिकवरी लगभग 300 रुपये प्रति सिलेंडर रहने का अनुमान है. यह कच्चे तेल की कीमतों में हालिया वृद्धि और डाउनस्ट्रीम ईंधन की घरेलू खुदरा कीमतों में कोई बदलाव न होने के बाद का अनुमान है.
होर्मुज के कारण फंसा है पेच
कच्चे तेल में बढ़ोतरी का एक बड़ा कारण ग्लोबल तेल सप्लाई का प्रभावित होना है. स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में माध्यम से कच्चे तेल और फ्यूल जहाजों की आवाजाही प्रभावित हुई है, जिस कारण तेल की पर्याप्त सप्लाई नहीं पहुंच पा रही है और तेल के दाम बढ़ रहे हैं. हालांकि, इन जहाजों की आवाजाही सुनिश्चित करने के लिए सरकार लगातार बातचीत कर रही है.
इसके अलावा, सरकार ऊर्जा सुरक्षा और रूस से कच्चे तेल की स्थिर खरीद को प्राथमिकता दे रही है. साथ ही भारत के कच्चे तेल के सोर्स में विविधता लाने के तरीकों पर भी विचार कर रही है. भारत द्वारा अपने कच्चे तेल के भंडार को बढ़ाने के प्रयासों में इराक और सऊदी अरब जैसे देश महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं, जिनसे बातचीत को लेकर भी सरकार विचार कर रही है.
तेल कंपनियों पर पड़ रहा असर
कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों का असर सरकारी तेल डिस्ट्रीब्यूशन कंपनियों (OMCs) पर भी पड़ रहा है, जिन्होंने खुदरा पेट्रोल और डीजल की कीमतों में कोई बदलाव नहीं किया है. मौजूदा अनुमानों के मुताबिक, OMC को पेट्रोल पर करीब रुपये प्रति लीटर और डीजल पर 23 रुपये प्रति लीटर का घाटा हो रहा है.
अगर कच्चे तेल की ऊंची कीमतें बनी रहती हैं और खुदरा ईंधन की कीमतें अनचेंज रहती हैं, तो सरकार को बाद के चरण में तेल और गैस कंपनियों को आर्थिक मदद करने पर विचार करना पड़ सकता है. इसलिए सरकार तीन प्राथमिकताओं के बीच संतुलन बनाने की कोशिश कर रही है- घरेलू ईंधन की कीमतों को स्थिर रखना, तेल और गैस कंपनियों (ओएमसी) के वित्त की रक्षा करना और बढ़ते भू-राजनीतिक और सप्लाई चेन रिस्क के बीच निर्बाध ऊर्जा आपूर्ति सुनिश्चित करना.
आजतक बिजनेस डेस्क