कच्चे तेल की कीमत में सोमवार को करीब $4 प्रति बैरल की तेज गिरावट आई. ब्रेंट क्रूड का दाम $4.08 टूटकर $83.85 प्रति बैरल पर आ गया. वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (अमेरिका के कच्चे तेल का एक प्रमुख मानक) $4.01 गिरकर $80.66 प्रति बैरल पर रहा. ब्रेंट क्रूड में 4.64% और वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट में 4.74% की गिरावट रही. यह नरमी तब आई, जब डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान पर नया हमला टाल दिया. पिछले महीने ब्रेंट और वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट क्रूड के वायदा भाव 20% से ज्यादा चढ़ गए थे.
अमेरिका और ईरान के बीच लड़ाई फिर शुरू होने से पश्चिम एशिया में तनाव बढ़ा है. ओमान के पास कई टैंकरों पर हमलों ने शिपिंग कंपनियों को खाड़ी में जाकर तेल भरने से रोक दिया है. डोनाल्ड ट्रंप जल्द समझौता चाहते हैं, ताकि ईरान का महत्वाकांक्षी परमाणु कार्यक्रम रोका जा सके और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज फिर से पूरी तरह खोला जा सके. ट्रंप ने ट्रुथ सोशल पर एक पोस्ट में कहा, 'ईरान और दूसरे मिडिल ईस्ट देशों ने डील पूरी करने के लिए समय मांगा है. इससे होर्मुज तुरंत, पूरी तरह और संपूर्ण रूप से फिर खुलेगा. और ईरान के परमाणु खतरे का अंत होगा'.
तेल आपूर्ति के रास्ते अभी पूरी तरह सामान्य नहीं
होर्मुज और आसपास के समुद्री व्यापार मार्गों में सोमवार को जहाजों की आवाजाही के आंकड़ों में मिला-जुला संकेत दिखा. सऊदी तेल लेकर जा रहे 2 टैंकर लाल सागर से बाब अल-मंदेब पार कर गए. वहीं, जहाजों पर हमलों की खबरों के बाद होर्मुज में आवाजाही धीमी पड़ी. यह दिखाता है कि तेल आपूर्ति के रास्ते अभी पूरी तरह सामान्य नहीं हुए हैं. एक तरफ कुछ टैंकर आगे बढ़े. दूसरी तरफ, हमलों की खबरों ने होर्मुज जैसे अहम समुद्री रास्ते पर जहाजों की रफ्तार धीमी कर दी. समुद्री सुरक्षा पर नजर रखने वाली एजेंसी 'यूनाइटेड किंगडम मैरिटाइम ट्रेड ऑपरेशंस' ने शनिवार के बाद 3 और टैंकर हमलों की रिपोर्ट दी.
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उधर, ओपेक+ (पेट्रोलियम निर्यातक देशों का संगठन) ने रविवार को इस साल सितंबर से करीब पेट्रोलियम उत्पादों के प्रोडक्शन को 188,000 बैरल प्रतिदिन तक बढ़ाने से संबंधित प्रस्ताव को मंजूरी दी. यह कदम अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार के लिए एक और अहम संकेत बनकर आया. प्रोडक्शन बढ़ाने का फैसला ऐसे समय आया, जब ऊर्जा बाजार पहले से तनाव और आपूर्ति में रुकावटों का सामना कर रहा है. इसी वजह से इस साल की पहले की बढ़ोतरी का असर सीमित रहा और बाजार पर उसका असर बहुत कम दिखा. इन बढ़ोतरी को कागज पर ज्यादा माना गया. ईरान और यूक्रेन युद्धों के कारण खाड़ी, रूस और कजाखस्तान से पेट्रोलियम उत्पादों के निर्यात में रुकावट बनी रही.
अमेरिका को ईरान के साथ समझौते की उम्मीद
फिलहाल सबसे बड़ा संकेत कच्चे तेल की कीमतों में नरमी का है. लेकिन हालात पूरी तरह शांत नहीं दिख रहे हैं. अमेरिका और ईरान के बीच किसी समझौते पर पहुंचने की कोशिश, तेल टैंकर पर हमले और होर्मुज के रास्ते जहाजों की आवाजाही इस हफ्ते अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार की दिशा तय करेंगे. अब नजर इस पर होगी कि अमेरिका और ईरान के बीच समझौते की कोशिश आगे बढ़ती है या फिर अटकती है. साथ ही, होर्मुज और आसपास के जलमार्गों से जहाजों की आवाजाही में क्या बदलाव आता है, यह भी अहम रहेगा. सितंबर से ओपेक+ की पेट्रोलियम प्रोडक्शन बढ़ाने का असर कितना दिखता है, आने वाले हफ्तों में तस्वीर साफ होगी.
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