क्रूड ऑयल की कीमत अब क्रैश होते हुए 70 डॉलर प्रति बैरल के करीब आ पहुंची है. अमेरिका-ईरान के बीच युद्ध के चलते गहराई ग्लोबल टेंशन के दौरान तेल दुनिया को डरा रहा था और 120 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया था. इसके चलते पाकिस्तान, बांग्लादेश, ब्रिटेन से लेकर भारत तक में तेल संकट और पेट्रोल-डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी देखने को मिली थी.
अब स्थिति बदल चुकी है और खास बात ये कि US-Iran War जरूरी थम गई है, लेकिन दुनिया की तेल जरूरत के 20 फीसदी की आपूर्ति के लिए अहम समुद्री रूट होर्मुज स्ट्रेट अभी पूरी तरह खुला नहीं है, फिर भी तेल की कीमतें बिखरी हुई नजर आ रही हैं. ऐसे में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की क्रूड प्राइस क्रैश वाली भविष्यवाणी सच होती दिखी है, जबकि कच्चे तेल में कई ग्लोबल ब्रोकरेज के अनुमानों के मुताबिक गिरावट देखने को मिल रही है.
कच्चा तेल दनादन क्रैश, राहत में दुनिया
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट का सिलसिला लगातार जारी है. गुरुवार को अपडेटेड क्रूड प्राइस पर नजर डालें, तो इंटरनेशनल मार्केट में ब्रेंट क्रूड ऑयल का दाम (Brent Crude Price) 70.60 डॉलर प्रति बैरल पर ट्रेड कर रहा था. इसके अलावा WTI Crude Price फिसलकर 67 डॉलर प्रति बैरल के आसपास आ गया था. मर्बन क्रूड ऑयल प्राइस 65 डॉलर पर ट्रेड करता नजर आया.
Trump के सिग्नल, ब्रोकरेज की भविष्यवाणी
मिडिल ईस्ट में जंग जब चरम पर थी और कच्चा तेल 110 डॉलर प्रति बैरल के पार चल रहा था, तो मई महीने में डोनाल्ड ट्रंप ने युद्ध खत्म होने से जुड़े सिग्नल दिए थे. उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर एक पोस्ट में कहा था कि कच्चे तेल की कीमतें तेजी से गिरेंगी और ईरान युद्ध जल्द समाप्त होगा. ट्रंप ने भविष्यवाणी करते हुए कहा था कि, 'ईरान हमसे समझौते को बेताब है, वहां तेल का बड़ा भंडार है, ऐसा होने पर Crude Oil की ग्लोबल कीमतों में भारी गिरावट आएगी.
ट्रंप के संकेतों के बाद ब्रोकरेज फर्मों ने भी तेल की कीमतें क्रैश होने से जुड़े अनुमान जाहिर किए थे. एमके ग्लोबल (Emkay Global) ने कहा था कि 2027 की पहली छमाही के बाद कीमतों में गिरावट स्थायी आनी चाहिए और वित्त वर्ष के अंत तक तेल की कीमतें गिरकर 70 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच सकती हैं. ब्रोकरेज का ये अनुमान टाइमलाइन से बहुत पहले ही सच हो गया है.
ट्रंप के ऐलान के बाद कच्चा तेल धड़ाम
मई में ट्रंप ने तेल की कीमतें क्रैश होने की भविष्यवाणी की थी और जून में US-Iran के बीच 14 सूत्रीय शांति प्रस्ताव पर बात बनी. ट्रंप ने समझौते पर सहमति से जुड़ा बयान जारी किया कि अमेरिकी नाकाबंदी हटाई जा रही है और होर्मुज फिर से खुलने वाला है. उनके ऐलान के बाद अचानक कच्चा तेल क्रैश (Crude Oil Price Crash) होता चला गईं और अगले ही दिन 80 डॉलर के आसपास आ गया था.
Hormuz पूरी तरह ओपन नहीं, फिर क्यों तेल सस्ता?
दोनों देशों के ऐलान के बाद अचानक बीते दिनों फिर से मिडिल ईस्ट में जंग की खबर आई, जब ईरान ने कुवैत और बहरीन में मौजूद अमेरिकी सैन्य अड्डों पर मिसाइल और ड्रोन अटैक किए. इससे होर्मुज को लेकर टेंशन फिर से बढ़ी. हालांकि, ताजा अपडेट देखें, तो कतर की राजधानी दोहा में अमेरिका और ईरान के बीच अहम वार्ता में दोनों पक्ष अगली बैठक पर सहमत हुए हैं. कतर विदेश मंत्रालय ने कहा है कि कई मुद्दों पर सकारात्मक प्रगति हुई है, इनमें होर्मुज भी शामिल है.
भले अमेरिका-ईरान के बीच युद्ध थमा है, लेकिन Strait of Hormuz अभी भी पूरी तरह ओपन नहीं हुआ है. हालांकि, कुछ जहाजों की आवाजाही रिकॉर्ड की गई है. इसके बावजूद भी कच्चे तेल की कीमतों में तेज गिरावट की वजह देखें, तो तेल बाजार मौजूदा स्थिति के बजाय आने वाले समय की संभावनाओं के आधार पर कीमतें तय करता है. दोनों देशों की बातचीत में प्रगति के चलते सप्लाई में रुकावट का खतरा भी कम हुआ है, जिसके बाद बाजार ने रिस्क प्रीमियम कम किया है. इसके अलावा OPEC+ प्रोडक्शन में बढ़ोतरी कर रहा है, ज्यादा उत्पादन से अधिक सप्लाई होती है और कीमतों पर दबाव पड़ता है.
तमाम देशों ने जहां अपने स्ट्रेटेजिक ऑयल रिजर्व में बढ़ोतरी की है, तो वहीं UAE, सऊदी अरब जैसे तेल उत्पादक देशों के उत्पादन में बढ़ोतरी की उम्मीद से बाजार में सप्लाई सुचारू रहने की उम्मीद जागी है.
आजतक बिजनेस डेस्क