ब्रिटिश बैंक बार्कलेज ने छंटनी का बड़ा प्लान बनाया है और रिपोर्ट्स के मुताबिक अपने ग्लोबल वर्कफोर्स का एक बड़ा हिस्सा साफ करने के लिए तैयार है. एआई, ऑटोमेशन और कॉस्ट कटिंग का हवाला देते हुए Barclays ने इस साल के अंत तक 5000 कर्मचारियों को बाहर का रास्ता दिखाने के लिए लिस्ट बनाने पर काम शुरू कर दिया है.
छंटनी का कहां सबसे ज्यादा असर?
ब्रिटिश बैंक Barclays मल्टीनेशनल बैंक और फाइनेंशियल सर्विस कंपनी है, जो दुनिया के कई देशों में कारोबार करती है. अब इसने अपने ग्लोबल वर्कफोर्स के लगभग 5% को हटाने का प्लान बनाया है. इसमें लगभग 1,000 नौकरियों पर पहले ही तलवार लटकी है, जबकि इस साल 2026 के आखिर तक 4,000 कर्मचारियों की लिस्ट बनाई जा रही है. बैंक की ओर से प्लान की गई लगभग 60% कटौती से डेवलपर्स समेत सपोर्ट फंक्शन पर सबसे अधिक असर पड़ेगा.
क्या है इस बड़े Lay Off की वजह?
बार्कलेज ने साल के आखिर तक इस बड़ी छंटनी की तैयारी के पीछे की वजह बताते हुए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), ऑटोमेशन और कॉस्ट-कटिंग का हवाला दिया है, जो बैंकिंग वर्कफोर्स को बदलते हुए नजर आ रहे हैं. बैंक को इस कदम से बड़े पैमाने पर लागत बचाने और टेक्नोलॉजी को मॉडर्न बनाने और AI से प्रोडक्टिविटी बढ़ाने में मदद मिलने की उम्मीद है.
छंटनी की दौड़ में अकेला नहीं बर्कलेज
Barclays अकेला लेंडर नहीं है, जो बड़े पैमाने पर छंटनी की घोषणा कर रहा है. इससे पहले मई में स्टैंडर्ड चार्टर्ड ने कहा था कि उसने 2030 तक दुनिया भर में 7,000 से ज्यादा नौकरियां खत्म करने की योजना बनाई है. मार्च में खबर आई थी कि HSBC करीब 20,000 कर्मचारियों को नौकरी से निकालने पर विचार कर रहा है. जुलाई में VISA ने लगभग 2,600 नौकरियों या अपनी ग्लोबल वर्कफोर्स का 7% हिस्सा कम करने का ऐलान किया था.
बैंकिंग जॉब्स बदल रही है
ग्लोबल बैंकिंग सिस्टम में आया ये बदलाव बताता है कि फाइनेंशियल-सर्विस सेक्टर टेक्नोलॉजी में इन्वेस्ट करते हुए प्रोडक्टिविटी को बेहतर बनाने की कोशिश कर रहा है. ऑटोमेशन की वजह से रूटीन प्रोसेसिंग और एडमिनिस्ट्रेटिव काम पर ज्यादा दबाव पड़ सकता है, जबकि डिमांड टेक्नोलॉजी, साइबर सिक्योरिटी, डेटा एनालिसिस और कस्टमर-फेसिंग रोल की तरफ शिफ्ट हो सकती है. हालांकि, अब तक का मौजूद डेटा यह कतई साबित नहीं करता है कि AI की वजह से हर नौकरी गई है.
भारतीय बैंकों में क्या चल रहा?
भारतीय बैंकों में भी एक अलग तस्वीर नजर आई है. इंडिया टुडे की रिपोर्ट के मुताबिक, HDFC Bank, ICICI Bank और Axis Bank ने FY2025-26 को मिलाकर 13,000 से ज्यादा कर्मचारियों की कमी की गई है. ICICI बैंक के कर्मचारियों की संख्या में 6,633, HDFC बैंक के कर्मचारियों में 3,343 और एक्सिस बैंक के कर्मचारियों में लगभग 3,400 की कमी आई है.
हालांकि, अधिकारियों ने इसके पीछे बड़े पैमाने पर छंटनी के बजाय कर्मचारियों के नौकरी छोड़ने, चुनिंदा हायरिंग, रीडिप्लॉयमेंट और टेक प्रोडक्टिविटी जैसे कारणों को जिम्मेदार ठहराया है.
आजतक बिजनेस डेस्क