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एक दशक पहले इन कंपनियों का था बोलबाला, अब सब कुछ बर्बाद!

हिमांशु द्विवेदी
  • नई दिल्‍ली,
  • 07 अगस्त 2026,
  • अपडेटेड 4:52 PM IST
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एक दशक पहले भारतीय बाजार में कुछ कंपनियों का नाम हर किसी के जुबान पर चढ़ा हुआ रहता था, क्‍योंकि इन कंपनियों ने अपने प्रोडक्‍ट्स या सर्विस से एक पहचान बनाई थी. लेकिन इनके मालिक और कंपनी के कुछ खराब फैसलों की वजह से ये कंपनिया अर्श से फर्श पर लुढ़क गईं.

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आज हम ऐसे ही पांच कंपनियों के बारे में बाताएंगे, जो एक समय पर बड़ा नाम हुआ करती थीं और अपने सेक्‍टर की बादशाह हुआ करती थीं. इसमें Go First, बिग बाजार, सिंटेक्‍स इंडस्‍ट्री और जेट एयरबेस जैसी कंपनियां शामिल हैं. आइए जानते हैं ये कंपनियां क्‍यों बंद हो गईं. 
 

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गो फर्स्‍ट एयरलाइंस 
वाडिया ग्रुप की एयलाइंस भारत में किफायती रेट्स पर हवाई फ्लाइट्स की सर्विस प्रोवाइड कराती थी, लेकिन वित्तीय संकट और ऑपरेशन में गड़बड़ी के कारण यह कंपनी बंद हो गई. 2004 में इसकी शुरुआत हुई थी और 4 नवंबर 2005 को पहली फ्लाइट उड़ी थी. 2017 से 2021 के दौरान कंपनी अपने पीक पर थी और भारत में इसका मार्केट शेयर 8.7 फीसदी थी और यह इस सेक्‍टर की एक बड़ी कंपनी थी.  कंपनी रोजाना 200 से अधिक उड़ानें संचालित करती थ. यह भारत और विदेशों (जैसे फुकेत, मालदीव) के 35 से अधिक डेस्टिनेशन तक सर्विस देती थी. 2022 के दौरान यह अपना 3600 करोड़ रुपये का आईपीओ लाने वाली थी. 

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गो फर्स्ट ने 3 मई 2023 को अचानक अपनी सभी उड़ानें सस्पेंड कर दीं और नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (NCLT) में खुद को दिवालिया घोषित करने के लिए अर्जी दे दी. कारण था अमेरिकी कंपनी 'प्रैट एंड व्हिटनी' द्वारा सप्लाई किए गए इंजनों में खराबी आना और नए इंजन की सप्‍लाई नहीं होने से 50 फीसदी विमानों का संचालन ठप हो गया और कंपनी को 2700 करोड़ का नुकसान हुआ और कंपनी पर 6500 करोड़ रुपये का भारी कर्ज था. 

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बिग बाजार 
2001 में किशोर बियानी ने बिग बाजार की शुरुआत की थी. इसे भारत का पहला बड़े पैमाने का मॉडर्न रिटेल चेन माना गया. देशभर में 250 से ज्यादा स्टोर थे. करोड़ों ग्राहक हर महीने खरीदारी करते थे. एक समय ऐसा था तो यह बड़े शहरों से अब छोटे शहरों में इसका कारोबार फैल रहा था. वहीं सेक्‍टर वाइज भी इसका कारोबार फैल रहा था.ऋ Future Group का कारोबार फैशन, ग्रॉसरी और लाइफस्टाइल तक फैल चुका था.

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फिर कंपनी ने एक ऐसा फैसला लिया, जिससे इसका कारोबार बुरी तरह प्रभावित हो गया. कंपनी ने तेजी से विस्तार किया और भारी कर्ज ले लिया. ई-कॉमर्स कंपनियां तेजी से बढ़ी और कोविड-19 के दौरान स्‍टोर बंद रहे और बिक्री गिर गई. तब कर्ज चुकाना मुश्किल हो गया. बाद में इसे रिलायंस ने खरीद लिया. 

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जेट एयरवेज
1993 में शुरू हुई ये कंपनी भारत की सबसे बड़ी प्राइवेट एयरलाइन बन गई थी. 2003 से 2004 के आसपास कंपनी का मार्केट शेयर 40 फीसदी से ज्‍यादा था. बिजनेस और प्रीमियम क्‍लास सर्विस के लिए इसकी अलग ही पहचान थी. सभी की ये पहली च्वाइस बन चुकी थी, लेकिन फिर इसने एयर सहारा का महंगा अधिग्रहण किया और ईंधन की कीमतों में अचानक से बढ़ोतरी हुई. IndiGo और SpiceJet जैसी लो-कॉस्ट एयरलाइंस ने इसे कड़ी चुनौती दी. आलम ये रहा कि भारी कर्ज हो गया और ये कंपनी 2019 में अपना ऑपरेशन बंद कर दी.

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वीडियोकॉन इंडस्ट्रीज
1990 और 2000 के दशक में लगभग हर भारतीय घर में Videocon का टीवी, फ्रिज या वॉशिंग मशीन देखने को मिलती थी. कंपनी भारत की सबसे बड़ी कंज्यूमर इलेक्ट्रॉनिक्स कंपनियों में गिनी जाती थी. तेल और गैस कारोबार में भी इसकी पकड़ मजबूत थी. लेकिन फिर Samsung, LG, सोनी जैसी वैश्विक कंपनियों से मुकाबला बढ़ गया और लगातार कर्ज बढ़ता गया. प्रोडक्‍ट इनोवेशन की रफ्तार भी धी‍मी हो गई और बैंक लोन चुकाने में दिक्‍कत बढ़ गई. आलम हुआ कि कंपनी दिवालिया हो गई. 

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सिंटेक्स इंडस्ट्रीज 
इस कंपनी का भी एक समय पर बोलबाला था. पानी की टंकियों का नाम आते ही लोगों के दिमाग में Sintex आता था. टेक्सटाइल और प्लास्टिक बिजनेस में भी कंपनी मजबूत थी. यूरोप तक इसका कारोबार फैल गया था. शेयर बाजार में कंपनी का मार्केट कैप हजारों करोड़ रुपये तक फैल चुका था. 

लेकिन फिर विदेशी कंपनियों का अधिग्रहण करने के लिए भारी कर्ज लिया. ब्याज का बोझ लगातार बढ़ता गया. इसके बाद कैश संकट शुरू हुआ और बैंक लोन डिफाल्‍ट होने लगे. आलम ये रहा कि कंपनी दिवालिया हो गई. बाद में Welspun Group ने इसे खरीद लिया. 

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