मिडिल-ईस्ट में तनाव ने भारत की रसोई गैस सप्लाई का पूरा समीकरण बदल दिया है. जो अमेरिका कुछ महीने पहले तक भारत के LPG आयात में छोटी हिस्सेदारी रखता था, वही अब सबसे बड़ा सप्लायर बनकर उभरा है. खाड़ी देशों से सप्लाई प्रभावित होने के बाद भारत ने अमेरिका से LPG आयात तेजी से बढ़ाया है. कमोडिटी मार्केट एनालिटिक्स फर्म केप्लर (Kpler) के टैंकर डेटा के मुताबिक, मार्च से अगस्त 2026 के दौरान भारत के LPG आयात में अमेरिका की हिस्सेदारी बढ़कर 53 फीसदी पहुंच गई. इससे पहले सितंबर 2025 से फरवरी 2026 के बीच ये हिस्सेदारी केवल 7.9 फीसदी थी.
अमेरिका से LPG आयात में उछाल
डेटा के मुताबिक सितंबर 2025 से फरवरी 2026 के बीच भारत ने अमेरिका से करीब 9.93 लाख टन LPG आयात की थी. मार्च-अगस्त 2026 के दौरान ये आंकड़ा करीब 281 फीसदी बढ़कर 37.8 लाख टन पहुंच गया. इसी दौरान भारत का कुल LPG आयात 43.1 फीसदी घटकर 71.4 लाख टन रह गया.
खाड़ी देशों की हिस्सेदारी घटी
युद्ध और सप्लाई में अड़चन आने से सबसे ज्यादा असर उन देशों पर पड़ा जो लंबे समय से भारत को LPG सप्लाई करते रहे हैं. इन बीते 6 महीनों में UAE की हिस्सेदारी 37.8 फीसदी से घटकर 13.4 फीसदी रह गई. वहीं कतर की हिस्सेदारी 21.1 फीसदी से घटकर 5.7 फीसदी पर आ गई. जबकि कुवैत का हिस्सा 15.1 फीसदी से घटकर 4.9 फीसदी और सऊदी अरब का हिस्सा 14.1 फीसदी से घटकर 5.9 फीसदी रह गया.
भारत के अहम है होर्मुज रूट
होर्मुज की खाड़ी को ओमान की खाड़ी और अरब सागर से जोड़ने वाला अहम समुद्री मार्ग है. दुनिया के तेल और LNG कारोबार का बड़ा हिस्सा इसी रास्ते से गुजरता है. भारत के लिए इसका महत्व काफी ज्यादा है. दरअसल, सामान्य परिस्थितियों में देश के करीब 90 फीसदी LPG आयात, 60 फीसदी LNG आयात और लगभग 40 फीसदी कच्चे तेल का आयात इसी मार्ग के जरिए होता है. यही वजह है कि इस क्षेत्र में किसी भी तरह का तनाव भारत की ऊर्जा सुरक्षा पर सीधा असर डालता है.
अमेरिका बना वैकल्पिक सप्लायर
Kpler के मुताबिक पश्चिम एशिया से सप्लाई प्रभावित होने के बाद भारत के लिए अमेरिका सबसे आसानी से उपलब्ध वैकल्पिक स्रोत बनकर उभरा है. हालांकि अमेरिका पहले से ही दुनिया के सबसे बड़े LPG निर्यातकों में शामिल है, इसलिए भारत ने वहां से खरीद बढ़ाई है. जानकारों का कहना है कि अमेरिकी LPG पहले भी एशियाई बाजारों के लिए प्रतिस्पर्धी विकल्प थी. सप्लाई संकट बढ़ने के बाद भारत ने गैस की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए दूरस्थ बाजारों से भी खरीद बढ़ाई.
आगे क्या होगा?
जानकारों का मानना है कि जब तक खाड़ी देशों से सप्लाई पूरी तरह सामान्य नहीं होती, तब तक भारत के LPG आयात में अमेरिका की मजबूत हिस्सेदारी बनी रह सकती है. हालांकि आने वाले महीनों में पश्चिम एशिया की स्थिति और होर्मुज की सुरक्षा हालात इस ट्रेंड की दिशा तय करेंगे. भारत की सालाना LPG खपत 3.3 करोड़ टन से भी ज्यादा है और इसकी करीब 60 फीसदी जरूरत आयात से पूरी होती है. ऐसे में सप्लाई के कई सोर्स तैयार करके ही देश की ऊर्जा सुरक्षा को सुरक्षित बनाया जा सकता है.