सुपौल जिले के नेपाल सीमावर्ती इलाके में उस समय ग्रामीणों के बीच अफरा-तफरी मच गई, जब गांव के बीचोंबीच सड़क पर एक विशालकाय मगरमच्छ आ गया. घरों के पास अचानक इतने बड़े मगरमच्छ को देखकर लोग दहशत में आ गए. कुछ ही देर में इसकी खबर पूरे गांव में फैल गई और बड़ी संख्या में ग्रामीण मौके पर पहुंच गए. यह मामला सुपौल जिले के नेपाल सीमावर्ती बसंतपुर पंचायत के वार्ड नंबर-01 स्थित खोंटाहा गांव का है. यहां वार्ड सदस्य अहिल्या देवी के घर के समीप बीच सड़क पर ग्रामीणों ने एक विशाल मगरमच्छ को देखा. मगरमच्छ को सड़क पर देखकर ग्रामीणों में कुछ देर के लिए अफरा-तफरी का माहौल बन गया.
हालांकि, डर के बावजूद ग्रामीणों ने समझदारी दिखाई. लोगों ने तुरंत डायल-112 और वन विभाग को इसकी सूचना दी. सूचना मिलते ही वन विभाग की टीम और भीमनगर पुलिस मौके पर पहुंची. इसके बाद गांव के बीच पहुंचे इस विशाल मगरमच्छ को सुरक्षित पकड़ने के लिए रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू किया गया. गांव के बीच सड़क पर मगरमच्छ पहुंचने की खबर मिलते ही बड़ी संख्या में लोग मौके पर पहुंचने लगे. ग्रामीणों के लिए यह नजारा हैरान करने वाला था. घरों के आसपास मगरमच्छ पहुंचने से लोगों में डर भी था.
वन विभाग की टीम ने मौके पर पहुंचकर स्थिति को संभाला. मगरमच्छ काफी बड़ा था, इसलिए उसे काबू में करना आसान नहीं था. टीम ने काफी मशक्कत के बाद जाल बिछाया और ग्रामीणों की मदद से मगरमच्छ को सुरक्षित पकड़ लिया. मगरमच्छ के रेस्क्यू होने के बाद ग्रामीणों ने राहत की सांस ली. इसके बाद उसे सुरक्षित स्थान पर रखा गया.
2008 की कोसी बाढ़ से जोड़ रहे ग्रामीण
ग्रामीणों का कहना है कि इलाके में मगरमच्छों की मौजूदगी कोई नई बात नहीं है. ग्रामीणों के मुताबिक साल 2008 में आई कोसी की भीषण बाढ़ के दौरान नेपाल की तरफ से कई मगरमच्छ बहकर इस इलाके में आ गए थे. इसके बाद से इलाके में लगातार मगरमच्छों की मौजूदगी देखने को मिलती रही है. ग्रामीणों का कहना है कि समय-समय पर मगरमच्छ आसपास के इलाकों में दिखाई देते रहे हैं. इस बार विशाल मगरमच्छ का गांव के रिहायशी इलाके के बीच और सड़क पर पहुंच जाना ग्रामीणों के लिए चिंता का कारण बन गया.
खोंटाहा और आसपास के इलाके के ज्यादातर लोग खेती पर निर्भर हैं. ग्रामीण रोजाना खेतों में काम करने के लिए जाते हैं. ऐसे में अगर खेतों या गांव के आसपास मगरमच्छ मौजूद हों तो लोगों की सुरक्षा को लेकर चिंता बनी रहती है. ग्रामीणों ने बताया कि इससे पहले भी कई बार लोग मगरमच्छ की चपेट में आने से बाल-बाल बच चुके हैं. ऐसे में गांव के रिहायशी इलाके में विशाल मगरमच्छ मिलने के बाद लोगों ने वन विभाग से इस समस्या का स्थायी समाधान निकालने की मांग की है.
ग्रामीणों की मांग है कि संवेदनशील इलाकों में वन विभाग की निगरानी बढ़ाई जाए. इसके साथ ही मगरमच्छों के रेस्क्यू के लिए पर्याप्त संसाधन भी उपलब्ध कराए जाएं, ताकि किसी भी आपात स्थिति में समय रहते कार्रवाई की जा सके. ग्रामीणों का कहना है कि खेती पर निर्भर लोगों को रोजाना खेतों में जाना पड़ता है. ऐसे में मगरमच्छों की मौजूदगी को लेकर लगातार डर बना रहता है. इसलिए सिर्फ रेस्क्यू करने के बजाय इस समस्या का स्थायी समाधान जरूरी है.
वन विभाग ने सुरक्षित पकड़ा मगरमच्छ
वन विभाग के अधिकारी ने बताया कि ग्रामीणों की ओर से गांव में मगरमच्छ आने की सूचना मिली थी. सूचना मिलते ही टीम मौके पर पहुंची और काफी मशक्कत के बाद मगरमच्छ को सुरक्षित पकड़ लिया गया. अधिकारी के मुताबिक रेस्क्यू किए गए मगरमच्छ को फिलहाल सुरक्षित स्थान पर रखा गया है. अब उसे कोसी नदी में छोड़ा जाएगा.
इस तरह गांव के बीच सड़क पर अचानक पहुंचे विशाल मगरमच्छ को लेकर शुरू हुई दहशत फिलहाल खत्म हो गई है. ग्रामीणों की मदद और वन विभाग की टीम की कार्रवाई के बाद मगरमच्छ को सुरक्षित पकड़ लिया गया. हालांकि, इलाके में लगातार मगरमच्छ दिखाई देने की शिकायतों के बीच ग्रामीण अब वन विभाग से निगरानी और रेस्क्यू व्यवस्था मजबूत करने की मांग कर रहे हैं.
राम चन्द्र मेहता