बिहार की पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी का राजधानी पटना स्थित सरकारी बंगला खाली करने का मामला अभी भी उलझा हुआ है. 10 सर्कुलर रोड वाले इस आवास को पूरी तरह खाली किया गया है या नहीं, इस पर अभी भी संशय बना हुआ है. असल वजह है सामान की लिस्ट का गायब होना.
जब साल 2006 में राबड़ी देवी को यह बंगला दिया गया था, तब उन्हें कुछ सरकारी सामान भी मुहैया कराया गया था. अब जब बंगला खाली कराने की बारी आई तो उस पुरानी लिस्ट का कोई रिकॉर्ड ही नहीं मिल पा रहा है. इसी वजह से पूरा मामला फंस गया है.
बात की शुरुआत 22 जून से होती है. भवन निर्माण विभाग ने इस दिन राबड़ी देवी को आवास खाली करने का आखिरी नोटिस भेजा था. इसके बाद 24 जून को विभाग की एक टीम बंगले पर पहुंची. लेकिन टीम के पास सामान की कोई आधिकारिक लिस्ट नहीं थी, जो 2006 में आवंटन के वक्त दी गई थी. यानी सरकार के पास खुद यह रिकॉर्ड मौजूद नहीं है कि उस समय कौन कौन सा सामान दिया गया था.
इसके बाद राबड़ी देवी के आप्त सचिव ने भवन निर्माण विभाग के सचिव को एक चिट्ठी लिखी. इस चिट्ठी में उन्होंने साफ कहा कि पहले विभाग उस पुरानी लिस्ट को सामने लाए, जिसमें बताया गया हो कि आवंटन के समय कौन सा सामान दिया गया था.
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उनका कहना है कि जब तक यह लिस्ट सामने नहीं आती, तब तक सामान का मिलान नहीं हो सकता. और जब मिलान ही नहीं होगा, तो आवास खाली करने की प्रक्रिया पूरी कैसे मानी जाए. उनकी मांग है कि बाद में किसी तरह का कन्फ्यूजन न हो, इसलिए पहले आधिकारिक लिस्ट दी जाए.
इस बीच सोमवार को भी बंगले से सामान निकालने का काम जारी रहा. परिवार से जुड़े सूत्रों के मुताबिक तेजस्वी यादव अब अपने अलग सरकारी आवास, वन पोलो रोड में शिफ्ट हो सकते हैं. इस पूरी खींचतान के बीच आरजेडी के सीनियर नेता अब्दुल बारी सिद्दीकी भी 10 सर्कुलर रोड पहुंचे. बाहर निकलने के बाद उन्होंने भवन निर्माण विभाग के फैसले पर अपनी प्रतिक्रिया भी दी.
सबसे अहम बात यह है कि राबड़ी देवी की तरफ से अब विभाग से 5 जुलाई तक का समय मांगा गया है. यह समय इसलिए मांगा गया है ताकि आवंटित सामान की लिस्ट का सही तरीके से मिलान किया जा सके. यानी अभी यह मामला अगले कुछ दिनों तक टला हुआ है, और देखना होगा कि भवन निर्माण विभाग इस मांग पर क्या रुख अपनाता है.
शशि भूषण कुमार