घाटों पर नो-एंट्री, SDRF और गोताखोर तैनात... बिहार में बाढ़ का खतरा, SDO कशिश बख्शी ने बताया निपटने का प्लान

गंगा का पानी बढ़ रहा है और पटना में खतरे की घंटी बज चुकी है. गांधी घाट पर जलस्तर डेंजर लेवल से 1.77 मीटर ऊपर पहुंच गया है. उधर दीघा घाट से लेकर भद्र घाट और महावीर घाट तक पानी का असर दिखने लगा है. ऐसे में पटना सिटी की एसडीओ कशिश बख्शी ने मोर्चा संभाल लिया है. घाटों पर बैरिकेडिंग कर नो-एंट्री की तैयारी है, 10 SDRF बोट, 20 कर्मी और 6 गोताखोर एक्टिव कर दिए गए हैं. यानी गंगा के बढ़ते पानी से निपटने के लिए प्रशासन ने कमर कस ली है.

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घाट वाले इलाकों में लग सकती है धारा 163. (Photo: Screengrab) घाट वाले इलाकों में लग सकती है धारा 163. (Photo: Screengrab)

शशि भूषण कुमार / रोहित कुमार सिंह

  • पटना,
  • 04 सितंबर 2026,
  • अपडेटेड 12:03 PM IST

बिहार के पटना में गंगा उफान पर है. पानी लगातार ऊपर चढ़ रहा है. घाटों की सीढ़ियां पानी में समा रही हैं और नदी का फैलाव देखकर अंदाजा लगाया जा सकता है कि खतरा कितना बड़ा है. गंगा के उस पार नकटा दियारा पूरी तरह पानी में डूब चुका है. यहां रहने वाले लोग अपना सामान समेटकर नावों के सहारे सुरक्षित जगहों की तरफ निकलने को मजबूर हैं. और अब इस बढ़ते पानी की आहट पटना शहर तक भी पहुंच गई है.

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गांधी घाट पर गंगा का जलस्तर सुबह 50.37 मीटर दर्ज किया गया. खतरे का निशान 48.60 मीटर है. यानी पानी डेंजर लेवल से 1.77 मीटर ऊपर पहुंच चुका है. ऊपर से जलस्तर करीब 10 मिलीमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से बढ़ रहा है. यही वजह है कि प्रशासन अब सिर्फ पानी को नाप नहीं रहा, बल्कि लोगों को उससे दूर रखने की तैयारी भी कर रहा है.

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पटना सिटी की एसडीओ कशिश बख्शी ने घाटों और आसपास के इलाकों में सुरक्षा व्यवस्था को लेकर जरूरी दिशा-निर्देश दिए हैं. जिन जगहों पर पानी पहुंच चुका है, वहां बैरिकेडिंग कराई जा रही है. भद्र घाट और महावीर घाट पर पानी पहुंचने के बाद लोगों की आवाजाही रोकने की तैयारी है. प्रशासन का साफ कहना है कि पानी बढ़ रहा है, इसलिए अब घाट तक वाहन ले जाना सुरक्षित नहीं है.

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इसके लिए सिर्फ बैरिकेड ही नहीं लगाए जा रहे, बल्कि साइन बोर्ड भी लगाए जाएंगे. लोगों को बताया जाएगा कि जिस जगह पर वे रोज पहुंचते थे, वहां अब पानी का बढ़ता स्तर खतरा बन चुका है. कशिश बख्शी ने साफ कहा है कि लोग इसे सामान्य स्थिति समझकर पानी के करीब न जाएं.

प्रशासन के मुताबिक, फिलहाल पानी किसी रिहायशी बस्ती के अंदर नहीं घुसा है. लेकिन नदी का जलस्तर जिस तरह लगातार बढ़ रहा है, उससे निचले इलाकों को लेकर चिंता बनी हुई है. घाट और नदी किनारे कई लोग अपनी गाय-भैंस भी बांधकर रखते हैं. प्रशासन अब उन्हें भी सुरक्षित जगह पर हटाने की कोशिश कर रहा है. इसके लिए मजिस्ट्रेट तैनात कर दिए गए हैं. यानी नजर सिर्फ इंसानों पर नहीं, मवेशियों की सुरक्षा पर भी है.

10 नावें, 20 जवान और 6 गोताखोर तैयार

बाढ़ की स्थिति बिगड़ती है तो सबसे बड़ी जरूरत होती है रेस्क्यू की. प्रशासन ने इसकी तैयारी पहले से शुरू कर दी है. कशिश बख्शी के मुताबिक, SDRF की 10 बोट तैयार हैं. इनके साथ 20 कर्मी और 6 गोताखोर भी एक्टिव कर दिए गए हैं. जरूरत पड़ी तो SSB की मदद भी ली जाएगी.

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एसएसबी के पास 4 बोट और 30 लाइफ जैकेट हैं. फिलहाल SSB की टीम को भद्र घाट में तैनात किया गया है. मतलब पानी बढ़ने की स्थिति में प्रशासन के पास लोगों को निकालने के लिए नाव से लेकर गोताखोर तक तैयार हैं. और अगर हालात ज्यादा बिगड़े, तो घाट वाले इलाकों में धारा 163 लागू करने पर भी विचार किया जा सकता है.

दीघा घाट से नदी के दूसरी तरफ नजर डालें तो नकटा दियारा का इलाका पानी से घिरा दिखाई दे रहा है. कई हिस्से पूरी तरह जलमग्न हो चुके हैं. लोगों के सामने सबसे बड़ी चुनौती सुरक्षित जगह तक पहुंचने की है. ऐसे में नाव ही सहारा बनी हुई है. लोग जरूरी सामान लेकर पानी के बीच से निकल रहे हैं. पटना में भी करीब तीन फीट से ज्यादा पानी सड़क तक पहुंच चुका है. निचले इलाकों में रहने वाले लोगों की चिंता इसलिए बढ़ रही है क्योंकि गंगा का जलस्तर अभी थमता नजर नहीं आ रहा.

सिर्फ पटना नहीं, हाजीपुर में भी पानी-पानी

गंगा के साथ गंडक नदी का जलस्तर बढ़ने से हाजीपुर में भी हालात बिगड़ने लगे हैं. निचले इलाके जलमग्न हो चुके हैं. दर्जनों गांवों में पानी पहुंच गया है. आने-जाने वाले रास्तों पर भी पानी तेज धार के साथ बह रहा है. यानी एक तरफ पटना में गंगा का बढ़ता पानी प्रशासन की परीक्षा ले रहा है, तो दूसरी तरफ हाजीपुर और आसपास के इलाकों में भी बाढ़ का असर दिखने लगा है.

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सबसे बड़ी चिंता आने वाली रात को लेकर है. जल संसाधन विभाग के अनुमान के मुताबिक, गांधी घाट पर गंगा का जलस्तर रात तक और बढ़ सकता है. आशंका है कि पानी Highest Flood Level को भी पार कर सकता है. इसी खतरे को देखते हुए बिहार सरकार ने पटना समेत आठ जिलों को हाई अलर्ट पर रखा है.

भोजपुर, पटना, सारण, वैशाली, नालंदा, बेगूसराय, लखीसराय और जहानाबाद के अधिकारियों को सतर्क रहने के निर्देश दिए गए हैं. नदी किनारे और निचले इलाकों पर नजर रखने को कहा गया है. तटबंधों की निगरानी की जा रही है. SDRF और NDRF की टीमें भी अलर्ट हैं. फिलहाल पटना में घाटों पर नो-एंट्री की तैयारी है, नावें पानी में उतरने के लिए तैयार हैं और गोताखोर भी मोर्चे पर हैं.

दियारा इलाकों में कई गांवों में पहुंचा पानी

गंगा और सोन नदी के बढ़ते जलस्तर ने मनेर के दियारा इलाकों में रहने वाले ग्रामीणों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं. दर्जनों गांवों में बाढ़ का पानी घुस चुका है और सड़कें डूबने से गांवों का प्रखंड मुख्यालय से संपर्क लगभग टूट गया है. हल्दी छपरा, महावीर टोला, इस्लामगंज, रतन टोला, सूअरमरवा और हुलासी टोला के लोग रोजमर्रा का सामान लेने तक के लिए पानी में उतरकर आने-जाने को मजबूर हैं. खेत और पशुओं का चारा भी पानी में डूब चुका है, जिससे मवेशियों के लिए चारे का संकट खड़ा हो गया है. ग्रामीणों का आरोप है कि हालात इतने खराब होने के बावजूद अब तक सरकारी मदद नहीं पहुंची है. उन्हें डर है कि अगर पानी इसी तरह बढ़ता रहा तो इंसानों के साथ-साथ पशुओं के सामने भी बड़ा संकट खड़ा हो सकता है.

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बेगूसराय में भी मुश्किल होते जा रहे हालात

बेगूसराय में गंगा के बढ़ते जलस्तर ने प्रशासन की चिंता बढ़ा दी है. बलिया के एसडीओ अजय कुमार यादव ने लोगों को अलर्ट करते हुए कहा है कि गंगा का पानी 2016 के रिकॉर्ड जलस्तर को भी पार कर सकता है. खासकर निचले इलाकों में रहने वाले लोगों से ऊंचे स्थानों या प्रशासन की ओर से चिह्नित आश्रय स्थलों पर जाने की अपील की गई है. मीर अलीपुर, शिवनगर और ताजपुर जैसे इलाकों में पानी घुटने तक पहुंच गया है, जबकि पशुओं को भी सुरक्षित जगहों पर ले जाने के निर्देश दिए गए हैं. प्रशासन की ओर से चारे और खाने-पीने की व्यवस्था की जा रही है, वहीं चेचियाही पुल के पास नावें तैनात की गई हैं. घाटों पर मजिस्ट्रेट नियुक्त किए जा रहे हैं और कई इलाकों में माइकिंग कर लोगों को तेज बहाव से दूर रहने और जलस्तर बढ़ने पर तुरंत बांध या ऊंचे स्थानों पर पहुंचने की चेतावनी दी जा रही है.

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