बिहार में हर साल आने वाली बाढ़ की स्थायी समस्या को लेकर पूर्व केंद्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद ने अपनी राय रखी है. उन्होंने बताया कि बाढ़ का सबसे बड़ा कारण नेपाल से आने वाला पानी और बिहार की भौगोलिक स्थिति है. उनके मुताबिक इसका स्थायी हल नेपाल में बांध बनाने से जुड़ा है, जिस पर सर्वे का काम शुरू हो चुका है. साथ ही उन्होंने इस बार की बाढ़ के दौरान सरकार द्वारा किए गए राहत कार्यों की भी जानकारी दी.
रविशंकर प्रसाद ने कहा कि गंगा नदी में जब पानी बढ़ता है तो यमुना, घाघरा, सरयू, सोन, गंडक, बूढ़ी गंडक, कोसी और पुनपुन जैसी नदियों का पानी भी उसी में मिलता है, जिससे स्थिति और गंभीर हो जाती है. उनके अनुसार नेपाल में कोई गड़बड़ी होने पर कोसी बैराज खोलना पड़ता है, जिससे बिहार में पानी का दबाव बढ़ जाता है. उन्होंने बताया कि इस साल की बाढ़ इसलिए भी ज्यादा चुनौती वाली रही क्योंकि नेपाल में उसी समय एक घटना हुई थी, जिससे दबाव और बढ़ गया.
स्थायी समाधान के सवाल पर उन्होंने कहा कि नेपाल में बांध बनाने को लेकर एक समझौता हुआ है और वे खुद भी इस मामले में काठमांडू गए थे, जहां सर्वे का काम शुरू हो गया है. हालांकि उन्होंने यह भी माना कि इस मुद्दे पर नेपाल में राजनीतिक विरोध रहा है, जिससे प्रक्रिया धीमी है. उनके मुताबिक अगर नेपाल में बांध बन जाएं तो न सिर्फ बाढ़ पर नियंत्रण होगा, बल्कि उससे बिजली उत्पादन भी हो सकेगा.
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इसके अलावा उन्होंने बताया कि इस बार बाढ़ के दौरान नाव, बिजली और भोजन जैसी बुनियादी सुविधाओं की व्यवस्था की गई थी और वे खुद पानी में उतरकर स्थिति का जायजा लेते रहे. उन्होंने यह भी बताया कि एक जमींदारी बांध के पुल में लीकेज की समस्या सामने आई थी, जिसे ठीक कराने का काम मॉनिटर किया जा रहा है. उनके मुताबिक बाढ़ को पूरी तरह रोकना संभव नहीं है, लेकिन इसे संभालने के लिए ईमानदारी से काम करना जरूरी है.
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