बांकीपुर की हार कितनी चुभी? सुनिए, क्या बोले बिहार BJP के अध्यक्ष संजय सरावगी

बिहार भाजपा अध्यक्ष संजय सरावगी ने बांकीपुर सीट की हार को खुलकर स्वीकार किया. 328 सीटों के बहुमत के बावजूद यह एक सीट हारने पर उन्होंने बताया कि पार्टी ने तुरंत गहन समीक्षा की, जिसमें आम मतदाताओं से भी बात की गई. समीक्षा में सामने आया कि विपक्ष के गलत नैरेटिव ने जनता को गुमराह किया.

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बिहार भाजपा अध्यक्ष संजय सरावगी ने बांकीपुर सीट की हार को खुलकर स्वीकार किया (Photo: ITG) बिहार भाजपा अध्यक्ष संजय सरावगी ने बांकीपुर सीट की हार को खुलकर स्वीकार किया (Photo: ITG)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 18 सितंबर 2026,
  • अपडेटेड 11:48 AM IST

बिहार भाजपा अध्यक्ष संजय सरावगी ने आजतक से बातचीत में बांकीपुर सीट पर हुई हार को लेकर बड़ी बेबाकी से बात की. 328 सीटों के भारी बहुमत वाली एनडीए सरकार में सिर्फ एक सीट बांकीपुर हारने पर जब सवाल पूछा गया तो उन्होंने कोई बहाना नहीं बनाया. संजय सरावगी ने साफ कहा कि हम ईमानदारी से हार स्वीकार करते हैं. कौन इसे नहीं मानेगा.

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उन्होंने बताया कि हार के तुरंत बाद पार्टी ने तीन चार दिनों के भीतर गहन समीक्षा की. यह समीक्षा सिर्फ ऊपर से नहीं बल्कि जमीनी स्तर से लेकर राज्य स्तर तक के नेताओं के साथ की गई. इतना ही नहीं, उन आम लोगों से भी बात की गई जिनका किसी राजनीतिक दल से कोई सीधा नाता नहीं था, यानी सामान्य मतदाता और भाजपा के अपने वोटरों से भी फीडबैक लिया गया.

समीक्षा में सामने आया कि बांकीपुर में विपक्ष ने एक गलत नैरेटिव सेट किया, जिससे आम जनता को गुमराह किया गया. संजय सरावगी के मुताबिक यही वजह रही कि तीन चौथाई बहुमत वाली सरकार होने के बावजूद पार्टी यह सीट गंवा बैठी. उन्होंने यह भी दावा किया कि कुछ ही हफ्तों में जनता को भी यह समझ आने लगा है कि उसे गलत जानकारी देकर भरमाया गया था.

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यह भी पढ़ें: बांकीपुर की हार से सम्राट चौधरी के समृद्धि काल तक… पंचायत आजतक पर बिहार BJP अध्यक्ष ने हर मुद्दे पर की बेबाक बात

जब आजतक ने पंचायत बिहार आजतक के मंच से पूछा कि क्या यूसीसी जैसे मुद्दों पर एनडीए के नरम रुख के पीछे बांकीपुर की हार का असर है, तो संजय सरावगी ने इससे साफ इनकार किया. उनका कहना था कि यह असर बांकीपुर का नहीं बल्कि राज्य में मिले तीन चौथाई बहुमत का है, जिसकी वजह से गठबंधन के दल आपस में बातचीत करके फैसले लेते हैं. साथ ही उन्होंने बताया कि पहले भी हुए उपचुनावों की हार पर पार्टी ऐसी ही समीक्षा करती रही है.

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