बांकीपुर की हार से सम्राट चौधरी के समृद्धि काल तक… पंचायत आजतक पर बिहार BJP अध्यक्ष ने हर मुद्दे पर की बेबाक बात

बिहार भाजपा अध्यक्ष संजय सरावगी ने आजतक से बातचीत में कहा कि नीतीश कुमार के बाद अब सम्राट चौधरी के नेतृत्व में एनडीए के पांच दल मिलकर सुशासन से समृद्धि की दिशा में काम कर रहे हैं. उन्होंने बिहार की जीएसडीपी ग्रोथ 14.9 प्रतिशत, प्रति व्यक्ति आय में बढ़ोतरी और गरीबी में कमी के आंकड़े गिनाए. सहयोग शिविर, विद्यार्थी पोर्टल, डिग्री कॉलेज और ग्रीन फील्ड सिटी जैसी योजनाओं का जिक्र किया.

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बिहार भाजपा अध्यक्ष संजय सरावगी बोले सुशासन से बढ़ेंगे समृद्धि की ओर (Photo: ITG) बिहार भाजपा अध्यक्ष संजय सरावगी बोले सुशासन से बढ़ेंगे समृद्धि की ओर (Photo: ITG)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 18 सितंबर 2026,
  • अपडेटेड 11:38 AM IST

बिहार भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष संजय सरावगी ने आजतक से बातचीत में बिहार सरकार में हुए नेतृत्व परिवर्तन, राज्य की आर्थिक प्रगति, नई सरकार की योजनाओं और बांकीपुर विधानसभा सीट पर हुई हार को लेकर खुलकर बात की. उन्होंने कहा कि नीतीश कुमार के मुख्यमंत्री पद छोड़ने के बाद अब सम्राट चौधरी के नेतृत्व में सरकार चल रही है और एनडीए के पांच दल मिलकर बिहार को सुशासन से समृद्धि की तरफ ले जा रहे हैं. 

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उन्होंने राज्य की जीएसडीपी ग्रोथ, प्रति व्यक्ति आय में बढ़ोतरी, गरीबी में कमी जैसे आंकड़े गिनाए और साथ ही यह भी स्वीकार किया कि बांकीपुर सीट पार्टी हारी है. इसके अलावा उन्होंने यूनिफॉर्म सिविल कोड यानी यूसीसी को लेकर भी अपनी पार्टी का रुख साफ किया.

आजतक ने जब सवाल पूछा कि जब नीतीश कुमार मुख्यमंत्री थे और अब जब भाजपा का मुख्यमंत्री बना है तो बिहार की जनता के लिए असल में क्या बदला है. इस सवाल पर संजय सरावगी ने कहा कि पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के नेतृत्व में जंगलराज से सुशासन की स्थापना हुई थी और अब सम्राट चौधरी के नेतृत्व में सुशासन से समृद्धि की तरफ बढ़ा जाएगा. उन्होंने कहा कि बिहार में एनडीए के पांच दल मिलकर सरकार चला रहे हैं, जिन्हें उन्होंने पांच पांडव की उपमा दी. उनका कहना था कि यह सरकार पहले से ज्यादा असरदार और जनता के प्रति जवाबदेह है.

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नेतृत्व परिवर्तन को लेकर जब नीतीश कुमार ने राज्यसभा जाने की इच्छा जताई थी तो तुरंत भाजपा की तरफ से नया मुख्यमंत्री बनाने की बात कही गई थी, इसलिए कुछ तो बदलाव जरूर हुआ होगा. इस पर संजय सरावगी ने सीधे जवाब देने के बजाय यह दोहराया कि एनडीए के पांचों दल मिलकर काम कर रहे हैं और किसी तरह की फूट डालने की कोशिश बेकार है.

आर्थिक आंकड़ों की बात करते हुए संजय सरावगी ने कहा कि साल 2025-26 और 2026-27 के आंकड़ों के अनुसार बिहार की जीडीपी 13 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा हो चुकी है और इसकी ग्रोथ रेट 14.9 प्रतिशत रही है, जो देश की औसत ग्रोथ से भी बेहतर है. उन्होंने बताया कि 2026-27 की पहली तिमाही में देश की जीडीपी ग्रोथ 7.1 प्रतिशत रही है, जो दुनिया के किसी भी बड़े देश से बेहतर मानी जा रही है. उन्होंने यह भी कहा कि सिर्फ जीडीपी से आकलन नहीं किया जा सकता, इसलिए निवेश और प्रति व्यक्ति आय के आंकड़े भी देखने चाहिए. उनके अनुसार बिहार की प्रति व्यक्ति आय अभी करीब 74 हजार रुपये है, जो साल 2005 में लगभग 7 हजार रुपये थी. उन्होंने माना कि यह आंकड़ा अभी भी देश के औसत से कम है, लेकिन इसमें लगातार बढ़ोतरी हो रही है.

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गरीबी को लेकर संजय सरावगी ने कहा कि पूरे देश में अत्यधिक गरीबी में करीब 25 करोड़ लोगों की कमी आई है, वहीं बिहार में भी करीब 4 करोड़ लोग अत्यधिक गरीबी से बाहर निकले हैं. उन्होंने कहा कि खरीदने की क्षमता यानी परचेजिंग कैपेसिटी के मामले में भी बिहार लगातार आगे बढ़ रहा है. रोजगार को लेकर उन्होंने बताया कि आने वाले समय में एक करोड़ रोजगार के अवसर पैदा करने का लक्ष्य रखा गया है.

नई सरकार की योजनाओं का जिक्र करते हुए संजय सरावगी ने कहा कि नए मुख्यमंत्री ने आम जनता को जल्दी न्याय दिलाने के लिए हर महीने के पहले और तीसरे मंगलवार को प्रखंड स्तर पर सहयोग शिविर शुरू किए हैं. उनके अनुसार अब लोग अपनी पंचायतों में ही ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं और तीस दिन के भीतर उस आवेदन का निपटारा करना जरूरी है. अगर कोई अधिकारी 21 दिन के भीतर आवेदन का निपटारा नहीं करता तो उसे निलंबित करने का प्रावधान रखा गया है. उन्होंने बताया कि जब कुछ शिकायतें मिलनी शुरू हुईं तो मुख्यमंत्री ने महीने के दूसरे मंगलवार को असंतुष्ट आवेदकों की सीधी सुनवाई शुरू कर दी, जिसके बाद शिकायतें कम होने लगीं.

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शिक्षा के क्षेत्र में हुए बदलावों के बारे में संजय सरावगी ने बताया कि हर प्रखंड में सौर सचिव विद्या निकेतन नाम की व्यवस्था शुरू की गई है, जिसके तहत अगर कोई छात्र रात के ग्यारह बारह बजे भी पढ़ाई करते हुए किसी समस्या में फंसता है तो वह मोबाइल के जरिए सीधे लाइव शिक्षक से जुड़ सकता है. उन्होंने यह साफ किया कि यह सुविधा कृत्रिम बुद्धिमत्ता यानी एआई वाले शिक्षकों के जरिए नहीं बल्कि असली, लाइव शिक्षकों के जरिए दी जा रही है. इसके अलावा उन्होंने बताया कि राज्य के तीन सौ इक्कीस प्रखंडों में से दो सौ इक्कीस ऐसे प्रखंड थे जहां डिग्री कॉलेज नहीं था, वहां अब डिग्री कॉलेज खोल दिए गए हैं और वहां पढ़ाई भी शुरू हो चुकी है. साथ ही तेजी से शिक्षकों की भर्ती भी की गई है.

कॉलेज के विद्यार्थियों की समस्याओं के समाधान के लिए एक अलग विद्यार्थी पोर्टल शुरू किया गया है, जिसके जरिए छात्रावास से जुड़ी दिक्कतों समेत कैंपस की तमाम समस्याओं के लिए छात्र ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं. इसी तरह शिक्षकों के लिए भी एक अलग पोर्टल बनाया गया है. शहरीकरण को बढ़ावा देने के लिए राज्य में तेरह ग्रीन फील्ड सिटी बनाने का फैसला किया गया है, जिनमें दरभंगा में मिथिला हरियाणा और पाटलिपुत्र अंग जैसे नामों का जिक्र संजय सरावगी ने किया. उनके मुताबिक इनमें से एक शहर की शुरुआत हो भी चुकी है.

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कानून व्यवस्था को लेकर संजय सरावगी ने बताया कि हाल ही में मुख्य सचिव और डीजीपी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर उन अधिकारियों की जानकारी दी थी जिन्हें छुट्टी पर भेजा गया है. इस दौरान उन्होंने प्रधानमंत्री का उदाहरण देते हुए कहा कि प्रधानमंत्री पच्चीस साल में एक दिन भी छुट्टी पर नहीं गए, यहां तक कि जिस दिन उनकी मां का निधन हुआ था उस दिन भी वे काम पर मौजूद रहे.

बातचीत के दौरान जब यूनिफॉर्म सिविल कोड यानी यूसीसी को लेकर सवाल पूछा गया, तो संजय सरावगी ने इसे महाभारत के पांडवों की उपमा देकर समझाया. उन्होंने कहा कि भाजपा हमेशा से यूसीसी लागू करने की पक्षधर रही है, लेकिन गठबंधन के कुछ दल अभी इसके लिए जनता को तैयार मानने से हिचक रहे हैं. उन्होंने कहा कि जिस तरह संसद में तीन तलाक कानून, अनुच्छेद तीन सौ सत्तर हटाने का फैसला और राम मंदिर जैसे मुद्दों पर पहले यह कहा जाता था कि एनडीए एकजुट नहीं रह पाएगी, लेकिन बातचीत और आपसी सहमति से यह सब हो गया, उसी तरह यूसीसी पर भी बातचीत के जरिए रास्ता निकाला जाएगा. उन्होंने खुद अनुच्छेद तीन सौ सत्तर हटाए जाने का जिक्र करते हुए बताया कि वे खुद विद्यार्थी परिषद के कार्यकर्ता के तौर पर श्रीनगर में झंडा फहराने की वजह से पिटाई और जेल तक झेल चुके हैं, इसलिए उस अनुच्छेद के हटने की उन्होंने कभी कल्पना तक नहीं की थी. उन्होंने भरोसा जताया कि जिन राज्यों में एनडीए या भाजपा की सरकार है, वहां 2029 तक यूसीसी को लेकर सहमति बनाकर आगे बढ़ा जाएगा.

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इस दौरान आजतक ने सवाल किया कि क्या बातचीत के जरिए समाधान निकालने वाला यह नरम रुख हाल में हुई बांकीपुर सीट की हार का असर है. इस पर संजय सरावगी ने साफ कहा कि यह बांकीपुर का असर नहीं है, बल्कि एनडीए को मिले तीन चौथाई बहुमत की वजह से पार्टियां मिलकर नीतिगत फैसले लेती हैं. हालांकि जब पत्रकार ने सीधे बांकीपुर सीट की हार पर सवाल पूछा तो संजय सरावगी ने ईमानदारी से स्वीकार किया कि 328 सीटों के भारी बहुमत के बावजूद पार्टी बांकीपुर सीट हार गई. उन्होंने कहा कि हार के बाद पार्टी ने तीन चार दिनों में जमीनी स्तर से लेकर राज्य स्तर तक गहन समीक्षा की, जिसमें उन आम मतदाताओं से भी बात की गई जिनका किसी दल से सीधा जुड़ाव नहीं था. समीक्षा में सामने आया कि विपक्ष ने गलत नैरेटिव सेट कर जनता को गुमराह किया, जिसकी वजह से पार्टी वह सीट हार गई. उनके अनुसार अब कुछ ही हफ्तों में जनता को भी समझ आ रहा है कि उसे गलत जानकारी देकर भरमाया गया था.

इसी संदर्भ में आजतक ने साल 1989 के इलाहाबाद उपचुनाव का जिक्र किया, जब जनमोर्चा के टिकट पर जीपी सिंह की जीत के बाद देश का माहौल बदल गया था और राजीव गांधी की दो तिहाई से भी ज्यादा बहुमत वाली सरकार गिर गई थी. आजतक ने बताया कि प्रशांत किशोर भी बांकीपुर की हार को कुछ इसी तरह के संकेत के तौर पर देख रहे हैं. इस पर संजय सरावगी ने इंडिया टुडे के मूड ऑफ द नेशन सर्वे का हवाला देते हुए कहा कि अगर उस सर्वे को सही माना जाए तो उसमें राज्य के व्यापक आंकड़े भी देखने चाहिए, न कि केवल एक सीट के नतीजे को आधार बनाना चाहिए.

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इस दौरान युवाओं के आंदोलन का भी जिक्र हुआ. संजय सरावगी ने माना कि मूड ऑफ द नेशन सर्वे में यह भी सामने आया कि हाल में हुए युवाओं के आंदोलन का असर मतदाताओं पर पड़ा है. उन्होंने बताया कि इसी वजह से पार्टी अब एक नया युवा संपर्क अभियान शुरू करने जा रही है, जिसके तहत पार्टी कार्यकर्ता युवाओं से जुड़ने के लिए यूथ क्लब, हॉस्टल और कोचिंग सेंटरों तक जाएंगे. पेपर लीक के मुद्दे पर उन्होंने कहा कि 2024 में प्रधानमंत्री ने पेपर लीक रोकने के लिए विशेष कानून बनाया, जबकि इससे पहले की सरकारों ने इस दिशा में कोई ठोस कानून नहीं बनाया था. उनके अनुसार यह कदम युवाओं की चिंताओं को दूर करने और उन्हें पार्टी से जोड़ने की दिशा में अहम है.

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