पटना में आयोजित पंचायत आजतक के मंच पर "एनडीए सरकार, समृद्ध बिहार" सत्र में बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने अपनी सरकार के डेढ़ सौ दिन का हिसाब रखा. इस दौरान उन्होंने बताया कि बिहार आज देश में सबसे ज्यादा सब्सिडी देने वाला राज्य है. अकेले बिजली क्षेत्र में सरकार 23 हजार करोड़ रुपये की सब्सिडी देती है. राज्य में एक करोड़ 92 लाख घरेलू उपभोक्ताओं को 125 यूनिट बिजली मुफ्त दी जा रही है, जबकि किसानों को कृषि फीडर पर सिर्फ 55 पैसे की दर से बिजली मिलती है, जिस पर करीब छह हजार करोड़ रुपये खर्च होते हैं.
बिजली सब्सिडी का पूरा गणित
मुख्यमंत्री ने बताया कि बिहार में कुल दो करोड़ 22 लाख लोगों ने बिजली कनेक्शन लिया है, जिनमें से करीब एक करोड़ 92 लाख घरेलू उपभोक्ता हैं. इन सभी परिवारों को 125 यूनिट तक बिजली मुफ्त मिलती है. उन्होंने कहा कि यह सब्सिडी बिहार के गरीबों के लिए है और सरकार ने कभी यह नहीं देखा कि यह किसी बड़े उद्योगपति को दी जा रही है. किसानों के लिए अलग से करीब छह हजार करोड़ रुपये कृषि फीडर पर खर्च किए जाते हैं.
लैंडलॉक राज्य से बदले हुए बिहार तक
सम्राट चौधरी ने कहा कि बिहार लैंडलॉक राज्य है और 14 करोड़ की आबादी के साथ बेहद घनी आबादी वाला राज्य है. उन्होंने कहा कि जब वे पहली बार विधायक बने थे, तब बिहार का 87 प्रतिशत राजस्व झारखंड से आता था और सिर्फ 13 प्रतिशत यहां से आता था. उपमुख्यमंत्री और वित्त मंत्री के तौर पर बजट पेश करना उनके लिए सबसे गर्व का दिन था, क्योंकि उसी झारखंड का बजट एक लाख 39 हजार करोड़ का था और बिहार का बजट तीन लाख 17 हजार करोड़ का. उन्होंने इसे बदला हुआ बिहार बताया.
उद्योगों के लिए जमीन
उन्होंने कहा कि बिहार को अब महाराष्ट्र, दिल्ली और कर्नाटक की रफ्तार पकड़नी है, जिसके लिए उद्योग और शिक्षा दोनों क्षेत्रों में काम जरूरी है. पहले राज्य सरकार का लक्ष्य ही नहीं था कि उद्योगों को जमीन उपलब्ध कराई जाए. पिछले डेढ़ सौ दिन में करीब साढ़े नौ सौ से एक हजार एकड़ जमीन उद्योगों को दी गई है. उपमुख्यमंत्री रहते उन्होंने उद्योगों के लिए करीब 13 हजार एकड़ जमीन अधिग्रहण की शुरुआत की थी.
शिकायतों के लिए सहयोग कार्यक्रम
जनता की समस्याओं पर उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री बनने के पांच दिन के भीतर उनके पास करीब 20 हजार आवेदन आ गए थे. इसी से प्रेरणा लेकर उन्होंने सहयोग कार्यक्रम शुरू किया, जो पूरे राज्य में चल रहा है. अब तक करीब साढ़े आठ लाख आवेदन आ चुके हैं और इनमें से 96 प्रतिशत का निपटारा हो चुका है. अगर बिजली कनेक्शन, पानी या जमीन विवाद जैसे किसी आवेदन पर दस दिन तक अधिकारी कार्रवाई नहीं करता, तो ग्यारहवें दिन मुख्यमंत्री कार्यालय से नोटिस जाता है. बीस दिन पर दूसरा और 25 दिन के बाद तीसरा नोटिस जारी होता है. अब तक करीब 12 हजार लोगों को नोटिस भेजा जा चुका है, लेकिन कोई ऐसा अधिकारी नहीं मिला जिसने 30 दिन पार किए हों, क्योंकि उसके बाद निलंबन अपने आप हो जाता है.
शिक्षा, बांकीपुर और छात्रों के सवाल
शिक्षा पर उन्होंने बताया कि डेढ़ सौ दिन में 700 मॉडल स्कूल बने, जिनमें साढ़े तीन लाख बच्चे पढ़ रहे हैं और विद्यार्थी साथी ऐप से रात एक बजे भी डेढ़ लाख बच्चे पढ़ाई करते हैं. 15 जुलाई को एक ही दिन में 211 डिग्री कॉलेज खोले गए. बांकीपुर सीट हारने पर उन्होंने कहा कि 243 सीटों में से एनडीए 202 सीटें जीता है और जनता एक सीट से चुनाव तय नहीं करती. उन्होंने माना कि कुछ फैसले जनता को पसंद नहीं आए होंगे. छात्रों के आंदोलन और बीपीएससी परीक्षा पर उन्होंने कहा कि उन्होंने हाईकोर्ट के सिटिंग जज की अध्यक्षता में कमेटी बनाई है और सरकार नौजवानों के साथ पूरी तरह खड़ी है.
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