चंपारण में महात्मा गांधी के परपोते और स्थानीय मुखिया के बीच तीखी बहस, महागठबंधन को वोट देने की अपील पर बवाल!

चंपारण में एक कार्यक्रम के दौरान तुषार गांधी के साथ आए एक वक्ता महागठबंधन को वोट देने की अपील कर रहे थे. इससे स्थानीय मुखिया भड़क गए. उनकी गांधी जी के परपोते तुषार गांधी के साथ बहस होने लगी. स्थानीय मुखिया ने कहा कि ये गांधीवाद नहीं है. उन्हें शर्म आनी चाहिए.

Advertisement
महात्मा गांधी के परपोते के साथ बदसलूकी (Photo-Screengrab) महात्मा गांधी के परपोते के साथ बदसलूकी (Photo-Screengrab)

सचिन पांडेय

  • मोतिहारी,
  • 14 जुलाई 2025,
  • अपडेटेड 10:07 AM IST

महात्मा गांधी के परपोते तुषार गांधी रविवार को मोतिहारी में थे. यहां तुषार गांधी उसी ऐतिहासिक नीम के पेड़ के नीचे बैठे थे, जहां बैठकर चंपारण सत्याग्रह के दौरान महात्मा गांधी ने किसानों की पीड़ा सुनी थी. यह पेड़ 100 साल से भी ज्यादा पुराना है. तुषार गांधी 12 तारीख को पश्चिम चंपारण से पदयात्रा शुरू कर रविवार को तुरकौलिया थे. 

Advertisement

लेकिन रविवार को यहां तुषार गांधी के साथ स्थानीय मुखिया ने बदसलूकी की और अपमानित कर उन्हें सभा से भगा दिया. बापू के संघर्षों को याद करने के लिए शुरू की गई एक यात्रा राजनीतिक छींटाकशी का शिकार हो गई. 

रिपोर्ट के मुताबिक तुषार गांधी तुरकौलिया में नीम के पेड़ के नीचे एक संगोष्ठी में शामिल हो रहे थे. इस दौरान तुषार गांधी के साथ आए एक पदयात्री ने महागठबंधन को वोट देने की अपील करने लगे और महागठबंधन के उम्मीदवारों को जिताने की अपील करने लगे. 

ये बात कार्यक्रम के आयोजक और स्थानीय मुखिया बिनय सिंह को नागवार गुजरी और वे गांधीजी के प्रपौत्र तुषार गांधी पर बुरी तरह बरसने लगे. स्थानीय मुखिया ने कहा कि लोग सीएम नीतीश कुमार और पीएम नरेंद्र मोदी के कामों से खुश हैं. नीतीश सरकार अच्छी है, मोदी सरकार में सभी का कल्याण हुआ है.

Advertisement

स्थानीय मुखिया ने गांधी जी परपोते से कहा कि आप जाइए आपके प्रोग्राम में हम शामिल नहीं होना चाहते हैं, आप गांधी जी के नाम को ढो रहे हैं. इसमें गांधीवाद नहीं है. आप गांधी जी के वंशज नहीं हो सकते हैं. आपको शर्म आनी चाहिए. आप गांधी के वंशज हैं. 

मुखिया के ऐसे बयान पर तुषार गांधी भी भड़क गए. उन्होंने कहा कि आप शांति से बात कीजिए. आप तमीज से बात कीजिए. इसके बाद स्थानीय मुखिया और तुषार गांधी के बीच काफी गर्मागर्म बहस हुई. हालात बिगड़ते देख वहां लोगों को बीच बचाव करना पड़ा. 

तभी मुखिया बिनय सिंह ने उन्हें वहां से चले जाने को कहा और वे उग्र हो गए. इसके बाद स्थानीय लोगों और कार्यक्रम में मौजूद गांधीवादियों ने भी मुखिया का जमकर विरोध किया. माहौल तनावपूर्ण होता देख तुषार गांधी कार्यक्रम से बाहर आ गए. उसके बाद तुषार गांधी ने बाहर आकर लोगों से बात की और मुखिया पर बरसे. 

उन्होंने कहा कि वे डरने वाले नहीं है. विरोध की आवाज को दबाया नहीं जा सकता है. वे पूरे देश में ऐसा करते रहेंगे. तुषार गांधी ने मुखिया को गोडसे का वंशज करार दिया. और कहा कि यहां बुलाकर उनका अपमान किया गया है. तुषार गांधी ने कहा कि यहां केवल मेरा नहीं बल्कि गांधीवाद और लोकतंत्र का अपमान हुआ है. चंपारण की धरती पर इस तरह का व्यवहार दुखद है. यहां लोकतंत्र की हत्या हुई है.

Advertisement

बता दें कि महात्मा गांधी के परपोते तुषार गांधी ने 12 तारीख से भितिरवा आश्रम से पदयात्रा पर हैं. पदयात्रा के क्रम में तुषार गांधी तुरकौलिया पहुंचे थे जहां पर उन्होंने ऐतिहासिक नीम का पेड़ देखा. इसके बाद तुरकौलिया पूर्व के मुखिया के बुलावे पर ऐतिहासिक नीम का पेड़ देखने के लिए पहुंचे थे. जहां ये विवाद हुआ.  

---- समाप्त ----

Read more!
Advertisement

RECOMMENDED

Advertisement
Latest News in Hindi »