बिहार के जहानाबाद जिले में जिलाधिकारी छिरिङ वाई भूटिया का स्कूल निरीक्षण का एक अलग अंदाज सोशल मीडिया पर चर्चा में है. आमतौर पर किसी स्कूल में अधिकारी निरीक्षण के लिए पहुंचते हैं तो शिक्षक और छात्र उनके स्वागत और निरीक्षण की तैयारी में जुट जाते हैं. लेकिन यहां जिलाधिकारी ने कुछ ऐसा किया, जिसकी शायद किसी ने उम्मीद नहीं की थी. जिलाधिकारी जब जिले के एक मॉडल स्कूल और कन्या मध्य विद्यालय के औचक निरीक्षण के लिए पहुंचीं, तो उन्होंने खुद को अधिकारी की भूमिका तक सीमित नहीं रखा. वह सीधे क्लास रूम में पहुंचीं और बच्चों के बीच जाकर बैठ गईं. इतना ही नहीं, उन्होंने क्लास में सबसे आखिरी बेंच चुनी और एक छात्र की तरह शिक्षक की पढ़ाई सुनने लगीं.
क्लास में बैठने से पहले जिलाधिकारी ने शिक्षक से कहा, गुरुजी आप पढ़ाइए, आज हम भी क्लास में बेंच पर बैठते हैं. इसके बाद वह सबसे पीछे वाली बेंच पर जाकर बैठ गईं. इस दौरान उन्होंने शिक्षक के पढ़ाने के तरीके को देखा और क्लास में चल रही पढ़ाई को ध्यान से सुना. जिलाधिकारी के इस अंदाज से क्लास रूम का माहौल भी अलग नजर आया. वह बच्चों के साथ बैठकर उनकी पढ़ाई को समझने की कोशिश करती दिखीं. उन्होंने छात्रों से बातचीत की और उनसे विषय से जुड़े सवाल भी पूछे. इस दौरान उनका फोकस यह जानने पर रहा कि बच्चे पढ़ाई में कितना समझ पा रहे हैं और कक्षा में किस तरह पढ़ाई हो रही है.
निरीक्षण के दौरान सिर्फ 300 छात्र मिले उपस्थित
स्कूल निरीक्षण के दौरान जिलाधिकारी को कुछ ऐसी बातें भी देखने को मिलीं, जिनसे वह नाराज हो गईं. स्कूल में कुल 1200 छात्र नामांकित हैं, लेकिन निरीक्षण के दौरान केवल करीब 300 छात्र ही उपस्थित मिले. इतनी कम उपस्थिति को देखकर जिलाधिकारी ने नाराजगी जताई. सिर्फ छात्रों की कम उपस्थिति ही नहीं, बल्कि स्कूल में शैक्षणिक स्तर भी कमजोर पाया गया. निरीक्षण के दौरान छात्रों से विषय से जुड़े सवाल किए गए और उनकी पढ़ाई को समझने की कोशिश की गई. शैक्षणिक स्तर संतोषजनक नहीं मिलने पर जिलाधिकारी ने व्यवस्था में तत्काल सुधार के निर्देश दिए.
इस पूरे निरीक्षण का एक हिस्सा सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है, जिसमें जिलाधिकारी बच्चों के बीच सबसे पीछे वाली बेंच पर बैठी नजर आ रही हैं. उनका यह अंदाज लोगों का ध्यान खींच रहा है. हालांकि, निरीक्षण के दौरान उन्होंने केवल छात्रों के बीच बैठकर पढ़ाई नहीं देखी, बल्कि छात्रों से बातचीत कर उनकी शैक्षणिक स्थिति को भी समझने की कोशिश की. जिलाधिकारी का यह तरीका इसलिए भी खास रहा क्योंकि उन्होंने क्लास रूम में बैठकर सीधे यह देखने की कोशिश की कि शिक्षक किस तरह पढ़ा रहे हैं और छात्र किस तरह उस पढ़ाई को ले रहे हैं. अधिकारी के तौर पर सामने से निरीक्षण करने के बजाय उन्होंने खुद छात्र की तरह बैठकर क्लास का अनुभव लिया.
विषय से जुड़े सवाल पूछकर परखी पढ़ाई की स्थिति
वहीं, 1200 नामांकित छात्रों में से केवल 300 छात्रों की मौजूदगी ने स्कूल की व्यवस्था पर सवाल खड़े किए. जिलाधिकारी ने इस पर गहरी नाराजगी जताई और स्कूल व्यवस्था में तत्काल सुधार के लिए कड़े निर्देश दिए. इस तरह जहानाबाद में DM का स्कूल निरीक्षण दो वजहों से चर्चा में आ गया. एक तरफ उनका छात्रों के बीच जाकर सबसे आखिरी बेंच पर बैठकर क्लास सुनना लोगों का ध्यान खींच रहा है, तो दूसरी तरफ स्कूल में छात्रों की कम उपस्थिति और कमजोर शैक्षणिक स्तर को लेकर उनकी नाराजगी भी सामने आई है.
सैयद मुशर्रफ इमाम