शादी के 2 महीने बाद ही गंगा में समा गया घर, बची सिर्फ साइकिल और गाय, पंचायत भवन में गुजर रही जिंदगी

भागलपुर के सबौर की इंग्लिश बस्ती में गंगा की बाढ़ ने नवविवाहित प्रियम कुमार का घर उजाड़ दिया. रात करीब 2 बजे पक्का मकान अचानक नदी में समा गया. घर का कोई सामान नहीं बचा, सिर्फ एक साइकिल और गाय सुरक्षित रह गई. अब परिवार पंचायत भवन में रह रहा है और गाय का दूध बेचकर गुजारा कर रहा है.

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अब गाय के दूध से चल रहा गुजारा.(Photo: Rajiv Siddharth/ITG) अब गाय के दूध से चल रहा गुजारा.(Photo: Rajiv Siddharth/ITG)

राजीव सिद्धार्थ

  • भागलपुर,
  • 03 सितंबर 2026,
  • अपडेटेड 11:49 PM IST

बिहार के भागलपुर में गंगा की प्रलयंकारी बाढ़ ने एक नवविवाहित युवक का घर बसने से पहले ही उजाड़ दिया. सबौर प्रखंड की इंग्लिश बस्ती में रहने वाले प्रियम कुमार की शादी को अभी महज दो महीने हुए थे. परिवार नई जिंदगी की शुरुआत कर रहा था, लेकिन गंगा की तेज धारा ने रातोंरात उनका पक्का मकान और घर का पूरा सामान अपने आगोश में ले लिया.

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घटना रात करीब 2 से 2:30 बजे के बीच की है. प्रियम और उनके परिवार के सदस्य घर में सो रहे थे. इसी दौरान उनकी मां सांझी देवी की नींद खुली तो घर में घरघराहट जैसी आवाज सुनाई दी. उन्हें लगा कि शायद कोई चोर घर में घुस आया है. लेकिन जब दरवाजा खोलकर बाहर देखा तो मंजर देखकर उनके होश उड़ गए. घर का एक हिस्सा गंगा में जा चुका था और पानी लगातार कटाव कर रहा था.

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परिवार ने किसी तरह मवेशियों को बाहर निकाला. इसके बाद घर के भीतर रखा सामान निकालने का मौका तक नहीं मिला. देखते ही देखते पूरा आशियाना नदी की धारा में समा गया. प्रियम बताते हैं कि घर में फ्रिज, गोदरेज, वाशिंग मशीन, साइकिल, दूध बेचने के काम आने वाली बाइक, कपड़े और घर-गृहस्थी का तमाम सामान था, लेकिन कुछ भी नहीं बच सका.

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नई दुल्हन के साथ घर बसाने का सपना टूटा

प्रियम की शादी करीब दो महीने पहले हुई थी. उनकी पत्नी रक्षाबंधन के मौके पर 28 अगस्त को मायके चली गई थीं, इसलिए हादसे के वक्त वह घर पर मौजूद नहीं थीं. प्रियम के मुताबिक, अगर पत्नी उस समय साथ होतीं तो हालात और भी मुश्किल हो सकते थे. अब वह अपनी नई नवेली पत्नी के साथ दोबारा जिंदगी शुरू करने की उम्मीद लगाए बैठे हैं.

घर उजड़ने के बाद परिवार के पास पहनने तक के पर्याप्त कपड़े नहीं हैं. प्रियम ने बताया कि उनके शरीर पर जो कपड़े और गमछा है, वह भी किसी दूसरे व्यक्ति ने दिया है. रात में गमछा पकड़कर सोने की नौबत आ गई है. घर का लगभग पूरा सामान नदी में बह गया, जबकि बाहर खड़ी होने की वजह से एक साइकिल बच गई.

परिवार में करीब 6 से 8 लोग हैं. फिलहाल मुखिया की ओर से उन्हें पंचायत भवन में रहने की जगह दी गई है. तत्काल कोई बड़ी सुविधा उपलब्ध नहीं है. प्रियम बताते हैं कि मदद के नाम पर कभी एक किलो चूड़ा या खाने का पैकेट मिल जाता है और लोग आश्वासन देकर चले जाते हैं. उनके सामने सबसे बड़ी चुनौती अब रहने और रोजमर्रा की जिंदगी चलाने की है.

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गाय बनी परिवार के गुजारे का सहारा

इस तबाही में परिवार के पास सिर्फ एक गाय बची है. इसी गाय के दूध को बेचकर किसी तरह खाने-पीने का इंतजाम किया जा रहा है. प्रियम का कहना है कि घर में अब कुछ भी नहीं बचा है. एक साइकिल और गाय ही उनके पास मौजूद हैं. साइकिल भी घर के बाहर खड़ी थी, इसलिए बच गई, वरना शायद वह भी नदी की धारा में चली जाती.

प्रियम की मां सांझी देवी ने बताया कि घटना रात करीब 2 बजे हुई. घर में सभी लोग सो रहे थे. अचानक आवाज सुनकर उन्हें पहले लगा कि कोई चोर है. लेकिन जब बाहर देखा तो पानी के तेज बहाव में घर का हिस्सा जा चुका था. उन्होंने कहा कि नई बहू के आने के बाद घर में रखा सामान भी नहीं बच सका. महिलाओं के कपड़े और बच्चों के कपड़े तक पानी में चले गए.

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सांझी देवी के मुताबिक, उनका पक्का मकान काफी समय पहले बना था. घर में करीब 4 से 5लाख रुपये तक का सामान और गृहस्थी का सामान मौजूद था, लेकिन कुछ भी निकालने का मौका नहीं मिला. उन्होंने बताया कि आसपास भी कई घर बाढ़ और कटाव की चपेट में आए हैं. गांव में कम से कम 10 से 12 घर गिरने की बात कही जा रही है.

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PM आवास योजना से घर मिलने की आस

गंगा का बहाव अब कुछ कम हुआ है, लेकिन इलाके में पानी और कटाव का खतरा पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है. बाढ़ ने प्रभावित परिवारों को खुले आसमान के नीचे या अस्थायी ठिकानों में रहने को मजबूर कर दिया है. इंग्लिश बस्ती में लोगों के सामने मकान, भोजन, कपड़े और जरूरी सामान की कमी जैसी कई मुश्किलें खड़ी हैं.

प्रियम और उनकी मां सरकार से मदद की गुहार लगा रहे हैं. परिवार की सबसे बड़ी मांग प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत पक्का घर दिलाने की है. प्रियम कहते हैं कि अगर उन्हें एक घर मिल जाए तो वह अपनी नई नवेली पत्नी के साथ फिर से जिंदगी का सफर शुरू कर सकेंगे. उनका कहना है कि अब उनके पास मांग-चांगकर या गाय का दूध बेचकर जीवन चलाने के अलावा कोई दूसरा रास्ता नहीं है.

भागलपुर की इस बाढ़ ने सिर्फ एक मकान नहीं छीना, बल्कि एक नवविवाहित परिवार की नई शुरुआत भी रोक दी है. जिस घर में कुछ दिन पहले शादी के बाद खुशियां थीं, वहां अब कुछ नहीं बचा. परिवार को उम्मीद है कि प्रशासन और सरकार उनकी स्थिति को देखते हुए जल्द मदद पहुंचाएगी, ताकि नदी में खोया आशियाना फिर से बनाया जा सके.

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