बिहार के भोजपुर में बाढ़ की मार झेल रहे लोगों के बीच भोजपुरी सिनेमा की चर्चित अभिनेत्री और गायिका अक्षरा सिंह मदद का हाथ लेकर पहुंचीं. शाहपुर प्रखंड के दामोदरपुर बांध पर बाढ़ से घिरे सैकड़ों पीड़ित परिवारों के बीच पहुंचकर उन्होंने राहत सामग्री का वितरण किया. इस दौरान अक्षरा सिंह ने लोगों से मुलाकात की और उनकी परेशानियों और जरूरतों के बारे में भी जानकारी ली. बाढ़ पीड़ित परिवार इस समय घर-बार और रोजमर्रा की जरूरतों के लिए जूझ रहे हैं. ऐसे मुश्किल वक्त में अक्षरा सिंह उनके बीच पहुंचीं और अपनी तरफ से मदद की कोशिश की. उन्होंने लोगों के बीच सूखा राशन, साड़ी, कपड़े और महिलाओं के लिए खास तौर पर सैनिटरी पैड समेत कई जरूरी सामान बांटे.
राहत सामग्री मिलने के दौरान बाढ़ पीड़ितों के चेहरों पर कुछ राहत दिखाई दी. अक्षरा सिंह ने लोगों के बीच रहकर उनकी बातें सुनीं और उनकी परेशानियों को समझने की कोशिश की. अक्षरा सिंह ने कहा कि वह बिहार की बेटी हैं और इसी नाते अपने लोगों के बीच पहुंची हैं. उन्होंने कहा कि उन्होंने इसी धरती और इसी मिट्टी से बनकर आज अपनी पहचान बनाई है. अक्षरा ने कहा कि उन्होंने काम किया, नाम कमाया और पैसे भी कमाए, लेकिन यह सब इसी धरती और यहां के लोगों की वजह से संभव हुआ. इसलिए उन्हें लगता है कि आपदा के इस समय में लोगों के साथ रहना जरूरी है. उन्होंने बताया कि वह बॉम्बे से यहां आई हैं, ताकि अपनी तरफ से जितनी भी छोटी या बड़ी कोशिश संभव हो, वह कर सकें. उन्होंने कहा कि वह अपनी क्षमता के मुताबिक लोगों की मदद करना चाहती हैं.
अक्षरा सिंह ने कहा कि बिहार के लोगों की वजह से आज वह दो रोटी खा पा रही हैं. उन्होंने कहा कि यह बिहार का ही योगदान है. इसलिए उन्हें लगता है कि अब उनकी जिम्मेदारी बनती है कि उन्होंने जो कुछ अर्जित किया है, उसमें से लोगों के लिए भी कुछ करें. उन्होंने कहा कि बिहार के लोगों का दुख बांटना चाहिए और मुश्किल वक्त में उनके साथ खड़ा रहना चाहिए. अक्षरा ने कहा कि पवन सिंह के घर में पवन सिंह नहीं आए हैं, लेकिन वह किसी और की जिम्मेदारी नहीं उठा रही हैं. उन्होंने कहा कि यह उनकी अपनी जिम्मेदारी है, क्योंकि वह इसी मिट्टी से हैं और इन्हीं लोगों की वजह से आज इस मुकाम पर हैं.
गंगा में घर विलीन होने की बात भी उठी
बातचीत के दौरान अक्षरा सिंह ने जनिया इलाके में करीब 200 घरों के गंगा में विलीन होने की बात भी कही. उन्होंने कहा कि प्रशासन की ओर से आधा-अधूरा आवास दिया गया है और कुछ लोग अभी भी बांध पर रहने के लिए मजबूर हैं. हालांकि, जब उनसे इस पूरे मामले में राजनीतिक सवाल किया गया तो उन्होंने साफ कहा कि वह उस मुद्दे पर बात नहीं करना चाहतीं. उन्होंने कहा कि वह मामले की पूरी जानकारी नहीं जानती हैं और जब तक किसी बात की तह तक नहीं पहुंचेंगी, तब तक उस पर कुछ नहीं बोलेंगी. अक्षरा ने कहा कि उनका ज्यादा फोकस इस बात पर रहेगा कि वह अपनी तरफ से इस समय क्या कर सकती हैं.
जब उनसे पूछा गया कि क्या वह मुख्यमंत्री या बड़े नेताओं से मिलकर जनिया और पीपर इलाके में गंगा में घरों के विलीन होने की समस्या के स्थायी समाधान की बात करेंगी, तो अक्षरा ने कहा कि वह जरूर बात करेंगी. उन्होंने कहा कि बिहार से बने हर व्यक्ति की जिम्मेदारी है कि वह अपने बिहार के बारे में सोचे. उनके मुताबिक वह भी इस मुद्दे को सामने रखने की कोशिश करेंगी. बातचीत के दौरान उनसे उन विस्थापित लोगों के बारे में भी सवाल किया गया, जिनके घर गंगा में विलीन हो गए हैं और जिनकी समस्याओं को लेकर आवाज उठाए जाने की बात कही गई. उनसे पूछा गया कि क्या वह उन लोगों के बीच भी जाएंगी.
इस पर अक्षरा सिंह ने कहा कि फिलहाल जो समस्या उनके सामने है, वह बहुत कष्टदायक है. उन्होंने कहा कि यहां लोग जिंदगी और मौत से लड़ रहे हैं. ऐसे में अभी उनका ध्यान यहीं रहेगा. उन्होंने कहा कि पहले वह यहां के लोगों के लिए अपनी तरफ से जो कर सकती हैं, वह करेंगी. इसके बाद एक-एक करके जहां तक उनसे संभव होगा, वहां खड़े होने की कोशिश करेंगी. अक्षरा सिंह ने कहा कि वह बिहार के साथ खड़ी हैं. उन्होंने कहा कि उन्हें लगता है कि बिहार के सभी लोगों को एक-दूसरे का साथ देना चाहिए.
स्थायी समाधान के लिए बात करने की बात
उनके मुताबिक अगर सभी लोग एक साथ खड़े होकर एक-दूसरे की मदद करेंगे, तभी बिहार आगे बढ़ेगा. बाढ़ प्रभावित इलाकों में पहुंचकर अक्षरा सिंह ने लोगों के बीच राहत सामग्री बांटी और उनकी परेशानियां सुनीं. इस दौरान उनका जोर किसी राजनीतिक मुद्दे पर टिप्पणी करने के बजाय अपनी तरफ से लोगों की मदद करने पर रहा. उन्होंने कहा कि वह जितना कर सकती हैं, उतना करने के लिए खड़ी हैं और आगे भी बिहार के लिए अपनी जिम्मेदारी निभाने की कोशिश करेंगी.
सोनू कुमार सिंह