GOBArdhan Explained: माइलेज, इंजन और मेंटनेंस पर असर! क्या Bio-CNG के लिए कार में करना होगा बदलाव

सरकार अब CNG में भी Bio-CNG की हिस्सेदारी बढ़ाने जा रही है. GOBARdhan स्कीम के तहत 23,731 करोड़ रुपये का मोटा बजट अप्रूव किया गया है. लेकिन जिस आदमी की गाड़ी रोज CNG पर चलती है, उसके लिए असली सवाल कुछ और हैं. क्या इससे कार का माइलेज बदलेगा, इंजन पर कोई असर पड़ेगा, मेंटेनेंस बढ़ेगा या फिर गाड़ी में कोई पार्ट बदलवाना पड़ेगा? आइये जानें-

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GOBARdhan स्कीम के तहत देश भर में CBG प्रोडक्शन को बढ़ाया जाएगा. Photo: ITG GOBARdhan स्कीम के तहत देश भर में CBG प्रोडक्शन को बढ़ाया जाएगा. Photo: ITG

अश्विन सत्यदेव

  • नई दिल्ली,
  • 09 अगस्त 2026,
  • अपडेटेड 10:16 AM IST

GOBArdhan Bio-CNG Explained: पेट्रोल में इथेनॉल मिलाने को लेकर चल रही बहस के बीच अब सरकार ने CNG को लेकर भी एक बड़ा कदम उठाया है. सरकार अब रेगुलर CNG में धीरे-धीरे Bio-CNG यानी बायोगैस से तैयार गैस की ब्लेंडिंग की तैयारी कर रही है. केंद्रीय कैबिनेट ने हाल ही में 'नेशनल सर्कुलर बायो-एनर्जी स्कीम – गोवर्धन' (GOBARdhan) को मंज़ूरी दी है. इसके तहत कम्प्रेस्ड बायोगैस (CBG) को बढ़ावा देने के लिए 23,731 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है. 

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सरकार ने कहा कि GOBARdhan (गैल्वनाइजिंग ऑर्गेनिक बायो-एग्रो रिसोर्सेज धन) स्कीम आगामी 2036 तक लागू रहेगी. इस स्कीम का मकसद घरेलू कंप्रेस्ड बायोगैस के उत्पादन को लगभग दस गुना बढ़ाना है. इसके लिए अस्योर्ड ऑफ़टेक (खरीद की गारंटी), तय कीमतें, कैपिटल सब्सिडी, पाइपलाइन इंफ्रास्ट्रक्चर और आसानी से फाइनेंस मिलने जैसी सुविधाएं दी जाएंगी. 

इस प्रोग्राम में खेती से बचे अवशेष, पशुओं का गोबर, शुगर इंडस्ट्री का कचरा (जैसे प्रेस मड), नगर पालिकाओं का ऑर्गेनिक कचरा और दूसरे बायोमास का इस्तेमाल करके कम्प्रेस्ड बायोगैस (CBG) बनाई जाएगी. इस बायोगैस को गाड़ियों में इस्तेमाल होने वाली CNG और पाइप से सप्लाई होने वाली नेचुरल गैस (PNG) में मिलाया जाएगा.

सरकार का कहना है कि, इससे देश में बनने वाले फ्यूल को बढ़ावा मिलेगा और बाहर से इंपोर्ट होने वाले फ्यूल पर निर्भरता कम होगी. लेकिन सबसे बड़ा सवाल यह है कि इसका असर आम CNG कार मालिकों पर क्या पड़ेगा. क्या आपकी कार में कोई बदलाव करना होगा या माइलेज और परफॉर्मेंस पर इसका असर पड़ेगा. आइए आसान भाषा में समझते हैं.

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Bio-CNG और रेगुलर CNG कैसे हैं अलग

Bio-CNG को कंप्रेस्ड बायोगैस यानी CBG भी कहा जाता है. इसे जैविक कचरे से तैयार किया जाता है. इसमें खेतों का बचा हुआ कचरा, गोबर, चीनी मिलों से निकलने वाला प्रेसमड और नगर निगम का कचरा इस्तेमाल किया जा सकता है. इस कचरे को प्रोसेस करने के बाद ऐसी गैस तैयार होती है, जिसका स्ट्रक्चर रेगुलर CNG से काफी मिलता-जुलता है. 

यही वजह है कि Bio-CNG को मौजूदा गैस पाइपलाइन और CNG नेटवर्क के जरिए लोगों तक पहुंचाया जा सकता है. यानी आम ग्राहक के लिए CNG स्टेशन पर जाकर फ्यूल भरवाने का तरीका नहीं बदलेगा. धीरे-धीरे रेगुलर नैचुरल गैस में Bio-CNG की हिस्सेदारी बढ़ती जाएगी. जैसा कि अब तक पेट्रोल के साथ होता रहा है. जिस प्रकार पेट्रोल में इथेनॉल की ब्लेंडिंग बढ़ी है वैसे ही सीएनजी में बायोगैस की मिश्रण मिलेगा.

वहीं CNG यानी कंप्रेस्ड नेचुरल गैस की बात करें तो यह जमीन के काफी नीचे से निकाली जाने वाली प्राकृतिक गैस से तैयार होती है. इसमें मुख्य रूप से मीथेन गैस होती है. इसे गैस के कुओं से निकालने के बाद प्रोसेस कर क्लीन किया जाता है. इसके बाद गैस को बहुत ज्यादा प्रेशर में कंप्रेस करके सिलेंडर में भरा जाता है. इसी गैस को पाइपलाइन और सिलेंडर्स के जरिए गैस स्टेशनों तक पहुंचाया जाता है.

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CNG में ब्लेंडिंग को लेकर सरकार का प्लान

सरकार की GOBARdhan योजना के तहत सिटी गैस डिस्ट्रीब्यूशन यानी CGD कंपनियों के लिए Bio-CNG की एक तय मात्रा खरीदना और गैस नेटवर्क में शामिल करना जरूरी किया जा रहा है. इन कंपनियों के जरिए ही वाहनों के लिए CNG और घरों के लिए पाइप्ड नेचुरल गैस यानी PNG की सप्लाई होती है. इस योजना के तहत Bio-CNG की हिस्सेदारी धीरे-धीरे बढ़ाई जाएगी. वित्त वर्ष 2026-27 में यह लक्ष्य 3 प्रतिशत रखा गया है. इसके बाद वित्त वर्ष 2027-28 में Bio-CNG की हिस्सेदारी बढ़ाकर 4 प्रतिशत की जाएगी. वित्त वर्ष 2028-29 से यह हिस्सेदारी 5 प्रतिशत तक पहुंच जाएगी. यानी हर साल तकरीबन 1% का इजाफा किया जाएगा.

फाइनेंशियल ईयर अनिवार्य Bio-CNG ब्लेंडिंग    
FY 2026-27 3%
FY 2027-28 4%
FY 2028-29 5%

खास बात यह है कि यह टार्गेट सिर्फ वाहनों में इस्तेमाल होने वाली CNG पर लागू नहीं होगा. CGD नेटवर्क के जरिए सप्लाई होने वाली कुल गैस, जिसमें CNG और घरों में इस्तेमाल होने वाली PNG दोनों शामिल हैं, उसके हिसाब से Bio-CNG की हिस्सेदारी तय की जाएगी.

इतनी बड़ी मात्रा में Bio-CNG उपलब्ध कराने के लिए देश में बड़े पैमाने पर नए CBG प्लांट लगाने होंगे. इसके लिए सरकार कई तरह की मदद देने की योजना पर काम कर रही है. इसका एक फायदा यह होगा कि Bio-CNG बनाने वाली कंपनियों को अपना फ्यूल बेचने के लिए बाजार तलाशने की जरूरत नहीं होगी. 

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CGD कंपनियों को Bio-CNG खरीदने की व्यवस्था की जा रही है, जिससे कंपनियों को एक तय खरीदार मिल सके. इसके अलावा प्राइस को स्टेबल और अनुमान लगाने लायक रखने की व्यवस्था, नए प्लांट लगाने के लिए आर्थिक मदद, गैस पाइपलाइन से जोड़ने के लिए जरूरी इंफ्रास्ट्रक्चर और प्रोजेक्ट्स के लिए क्रेडिट गारंटी जैसी सुविधाएं भी दी जाएंगी. दरअसल, सरकार आने वाले सालों में देश में बनने वाली CBG की मात्रा को करीब 10 गुना तक बढ़ाना चाहती है. इससे एक तरफ कचरे का इस्तेमाल फ्यूल बनाने में होगा, वहीं दूसरी तरफ नेचुरल गैस पर डिपेंडेंसी कम करने में मदद मिलेगी.

CNG कार मालिकों को क्या करना होगा

अब सबसे जरूरी सवाल. अगर आपके पास CNG कार है तो क्या आपको अपनी कार में कोई बदलाव करवाना पड़ेगा. जवाब है नहीं. मौजूदा जानकारी के मुताबिक Bio-CNG का केमिकल स्ट्रक्चर रेगुलर CNG से काफी मिलता-जुलता है, इसलिए मौजूदा CNG वाहनों को इस ब्लेंडेड गैस पर चलाने के लिए इंजन, CNG टैंक या किसी अन्य हार्डवेयर में बदलाव की जरूरत नहीं होगी. यानी आपको उसी CNG स्टेशन पर जाकर गैस भरवानी होगी और कार ड्राइविंग का एक्सपीरिएंस भी पहले जैसा ही रहेगा. Bio-CNG की मात्रा बढ़ने का बदलाव मुख्य रूप से गैस सप्लाई सिस्टम में होगा, आपकी कार के लेवल पर नहीं.

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माइलेज और परफॉर्मेंस पर असर

CNG कार मालिकों के लिए यह राहत की बात है कि Bio-CNG को इस तरह तैयार किया जा रहा है कि वह मौजूदा नेचुरल गैस नेटवर्क और वाहनों के साथ इस्तेमाल किया जा सके. इंडियन ऑयल के अनुसार, CBG की कैलोरिफिक वैल्यू भी CNG जितनी (करीब 52,000 kJ/kg) होती है. इसलिए इसका इस्तेमाल ऑटोमोटिव फ्यूल की तरह आसानी से किया जा सकता है. इसलिए जहां तक सामान्य परिस्थितियों में कार की परफॉर्मेंस या ड्राइविंग एक्सपीरिएंस या माइलेज की बात है जो इसमें किसी बड़े बदलाव की उम्मीद नहीं है. 

आमतौर पर रियल वर्ल्ड माइलेज और परफॉर्मेंस कई चीजों पर निर्भर करती है, जैसे गैस की क्वॉलिटी, व्हीकल और रोड कंडिशन और ड्राइविंग स्टाइल. इसलिए केवल Bio-CNG की हिस्सेदारी बढ़ने के आधार पर माइलेज में किसी बड़े बदलाव का दावा करना सही नहीं होगा. हालांकि, अभी इसके फाइनल रिजल्ट आने के लिए गैस का बड़े स्तर पर इस्तेमाल किए जाने का इंतजार करना होगा. 

क्या कार में करना होगा बदलाव

Bio-CNG की हिस्सेदारी बढ़ने से इन कारों में किसी तरह का अलग हार्डवेयर लगाने या कार में किसी तरह के बदलाव की जरूरत नहीं होगी. आपकी कार बायो-सीएनजी पर भी ठीक वैसे ही चलेगी जैसे कि अभी आप सीएनजी पर दौड़ाते हैं. अगर सरकार की योजना के मुताबिक इसका इस्तेमाल बढ़ता है तो CNG फ्यूल का एक हिस्सा धीरे-धीरे रेनुएबल सोर्स से आने लगेगा. यानी जिस CNG से आपकी कार चल रही है, उसका एक बड़ा हिस्सा अब लोकल लेवल पर ही तैयार किया जा सकेगा. 

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E20 से अलग Bio-CNG का मामला

पेट्रोल में इथेनॉल मिलाने के बाद सबसे बड़ी चिंता पुराने वाहनों की कम्पैटिबिलिटी को लेकर सामने आई थी. CNG के मामले में स्थिति कुछ अलग है. बायो-सीनजी और नेचुलर गैस के स्ट्रक्चर में काफी समानता होने के कारण इसे मौजूदा CNG सिस्टम में शामिल करना अपेक्षाकृत आसान है. इसलिए फिलहाल CNG कार मालिकों को E20 जैसी बड़ी चिंता करने की जरूरत नहीं दिखती. आपकी कार का इंजन, टैंक और CNG किट पहले की तरह ही काम करने के लिए तैयार रहेंगे. असली बदलाव फ्यूल के सोर्स में होगा, न कि आपकी कार के हार्डवेयर में.

क्या सस्ती होगी बायो-सीएनजी

सरकार Bio-CNG यानी CBG बनाने वाली कंपनियों के लिए इसकी कीमत को लेकर एक फिक्स्ड सिस्टम तैयार करने की बात कर रही है. GOBARdhan योजना के तहत CBG की कीमत 2,110 रुपये प्रति MMBTU तय की गई है. इसका मतलब है कि CBG बनाने वाली कंपनियों को आगे कई साल तक कीमत और कमाई को लेकर ज्यादा चिंता करने की जरूरत नहीं होगी.

यह व्यवस्था कम से कम 10 साल के लिए रखी गई है, ताकि कंपनियां नए CBG प्लांट लगाने और उत्पादन बढ़ाने में आसानी से निवेश कर सकें. साथ ही सरकार का कहना है कि, कोशिश यह है कि इस कीमत का पूरा बोझ आम ग्राहकों पर न पड़े और सरकारी मदद के साथ बाजार के हिसाब से लागत का बैलेंस बनाया जा सके. आसान शब्दों में कहें तो सरकार CBG बनाने वाली कंपनियों को स्टेबल मार्केट और कमाई का भरोसा देकर इस फ्यूल का उत्पादन बढ़ाना चाहती है.

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