E20 Petrol पर सख्त हुई सरकार! गाड़ियों के पार्ट्स फेल होने की शिकायत के बाद नियम बदलने की तैयारी

E20 Petrol Row: हाल ही में कई वाहन कंपनियों ने E20 पेट्रोल की क्वॉलिटी को लेकर चिंता जताई थी. ऑटो कंपनियों ने कुछ जगहों पर सप्लाई किए जा रहे E20 पेट्रोल में क्लोराइड की मात्रा ज्यादा होने और नमी मिलने के मामले सामने रखे थे. इन शिकायतों के बाद अब सरकार इथेनॉल ब्लेंडेड फ्यूल को लेकर सख्ती बढ़ाने की तैयारी में है.

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E20 पेट्रोल की क्वॉलिटी को बेहतर करने के लिए सरकार नियमों में बदलाव करने जा रही है. Photo: ITG E20 पेट्रोल की क्वॉलिटी को बेहतर करने के लिए सरकार नियमों में बदलाव करने जा रही है. Photo: ITG

आजतक ऑटोमोबाइल डेस्क

  • नई दिल्ली,
  • 26 अगस्त 2026,
  • अपडेटेड 9:33 AM IST

देश में इथेनॉल ब्लेंडेड E20 पेट्रोल को लेकर बहस जारी है. लोगों की शिकायत है कि, इस फ्यूल के इस्तेमाल के बाद उनके गाड़ियों का माइलेज कम हुआ है और इंजन कंपोनेंट में खराबी आई है. इन शिकायतों को ध्यान में रखते हुए सरकार बड़ी तैयारी में जुट गई है. सरकार अब केवल पेट्रोल में इथेनॉल की मात्रा नहीं, बल्कि उसकी क्वॉलिटी पर भी सख्ती करने जा रही है. 

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दरअसल, हाल ही में पेट्रोल में 3 PPM से ज्यादा क्लोराइड और ज्यादा नमी मिलने की शिकायतों के बाद वाहन कंपनियों ने गाड़ियों के कुछ पार्ट्स में खराबी की चिंता जताई थी. अब सरकार E20 पेट्रोल में क्लोराइड समेत दूसरे कॉन्टैमिनेटेड एलिमेंट के लिए जो तय सीमा है उसके लिए नए नियम बनाने पर विचार कर रही है. यानी पेट्रोल में अब 3 PPM से ज्यादा क्लोराइड और नमी नहीं हो सकती है.  

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अनिवार्य हो सकता है ये नियम

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, सरकार अब ऑयल मार्केटिंग कंपनियों यानी OMCs समेत ऑटोमोटिव फ्यूल सप्लाई सिस्टम से जुड़े अन्य सभी एजेंसियों के लिए E20 पेट्रोल में क्लोराइड की मात्रा तय सीमा के भीतर रखना अनिवार्य कर सकती है. मौजूदा नियम के तहत E20 पेट्रोल में क्लोराइड कंटैमिनेशन 3 पार्ट्स प्रति मिलियन यानी 3 PPM से कम होना चाहिए. अभी यह तय लिमिट वॉलेंटियर क्वॉलिटी स्टैंडर्ड का हिस्सा है, लेकिन अब इसे अनिवार्य बनाने की तैयारी चल रही है. जिसके बाद यह कम्पलसरी होगा.

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ख़बर है कि, फ्यूल की क्वॉलिटी के लिए स्टैंडर्ड तय करने वाला ब्यूरो ऑफ इंडियन स्टैंडर्ड्स यानी BIS भी इस मुद्दे पर काम कर रहा है. ईटी की एक रिपोर्ट में सरकारी अधिकारी के हवाले से कहा गया है कि, "सरकार फ्यूल में मौजूद अलग-अलग कॉन्टैमिनेटेड एलिमेंट की तय सीमा को अनिवार्य करना चाहती है. इससे E20 पेट्रोल की क्वॉलिटी को बेहतर तरीके से कंट्रोल करने में मदद मिलेगी और पेट्रोल पंपों तक क्लीन फ्यूल पहुंचाने में मदद मिलेगी."

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गाड़ियों के पार्ट्स में खराबी की शिकायत

यह कदम ऐसे समय उठाया जा रहा है जब वाहन कंपनियों ने E20 पेट्रोल की क्वॉलिटी को लेकर चिंता जताई थी. ऑटो कंपनियों ने कुछ जगहों पर सप्लाई किए जा रहे E20 पेट्रोल में क्लोराइड की मात्रा ज्यादा होने और नमी मिलने के मामले सामने रखे थे. कंपनियों का कहना है कि इस तरह के कॉन्टैमिनेटेड (दूषित) फ्यूल का असर गाड़ियों के कुछ कंपोनेंट्स पर पड़ सकता है और इससे उनके फेल होने के मामले बढ़ सकते हैं.

कुछ मामलों में वाहनों के फ्यूल टैंक से लिए गए पेट्रोल के सैंपल में क्लोराइड की मात्रा तय सीमा से काफी ज्यादा पाई गई है. इससे E20 पेट्रोल की क्वालिटी को लेकर चिंता और बढ़ गई है. यही वजह है कि अब सरकार सिर्फ पेट्रोल के ब्लेंडिंग प्रतिशत पर ही नहीं, बल्कि उसकी क्वॉलिटी और उसमें मौजूद दूषित तत्वों पर भी ज्यादा ध्यान दे रही है.

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