25 लाख दर्शक, 35 देशों में मंचन... 69 साल से जीवंत है श्रीराम भारतीय कला केंद्र के 'श्री राम' नृत्य नाटक का मंचन

दिल्ली में दशकों से चली आ रही रामायण के नृत्य नाटक की परंपरा एक बार फिर लौट रही है. श्रीराम भारतीय कला केंद्र 11 अक्टूबर से 1 नवंबर 2026 तक मंडी हाउस के ओपन एयर थिएटर में 'श्री राम' नृत्य नाटक का मंचन करेगा.

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श्रीराम भारतीय कला केंद्र में रामकथा का मंचन जारी है श्रीराम भारतीय कला केंद्र में रामकथा का मंचन जारी है

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 11 अक्टूबर 2026,
  • अपडेटेड 2:34 PM IST

दिल्ली में दशकों से चली आ रही रामायण के मंचन की परंपरा एक बार फिर लौट रही है. श्रीराम भारतीय कला केंद्र (SBKK) अपने प्रसिद्ध नृत्य नाटक 'श्री राम' का मंचन 11 अक्टूबर से 1 नवंबर 2026 तक करेगा. यह आयोजन दिल्ली के मंडी हाउस स्थित कला केंद्र के ओपन एयर थिएटर में रोजाना शाम 6:30 बजे से होगा. इस साल आयोजन का 69वां वर्ष है. खास बात यह है कि करीब 25 साल बाद इस नृत्य नाटक को उसके पारंपरिक स्वरूप में प्रस्तुत किया जा रहा है.

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करीब 2 घंटे 15 मिनट की इस प्रस्तुति में भगवान राम के जन्म से लेकर वनवास, लंका विजय और राज्याभिषेक तक की कथा दिखाई जाएगी. तुलसीदास रचित रामचरितमानस पर आधारित यह नृत्य नाटक भारतीय शास्त्रीय और लोकनृत्य परंपराओं का अनूठा संगम है. इस साल 1 नवंबर को रामराज्य की स्थापना के साथ इसका समापन होगा.

1957 में हुई थी शुरुआत
'श्री राम' नृत्य नाटक की परिकल्पना श्रीराम भारतीय कला केंद्र की संस्थापक सुमित्रा चरत राम ने 1957 में की थी. इसके निर्माण में रामधारी सिंह दिनकर, गुरु गोपीनाथ, नरेंद्र शर्मा, डागर बंधु, राही मासूम रजा और तापस सेन जैसी हस्तियों का योगदान रहा.
1970 के दशक से पद्मश्री शोभा दीपक सिंह ने इस प्रस्तुति को नए रूप में विकसित किया. इसमें आधुनिक मंच तकनीक, एलईडी विजुअल्स और हिंदी-अंग्रेजी अनुवाद की व्यवस्था शामिल की गई.

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इस बार नाटक में आधुनिक तकनीक के बजाय पारंपरिक मंच सज्जा को प्राथमिकता दी गई है. हाथ से तैयार सेट, नई वेशभूषा और पारंपरिक प्रकाश व्यवस्था के साथ रामचरितमानस की मूल चौपाइयों को फिर से शामिल किया गया है.

केंद्र की उपाध्यक्ष गौरी कीलिंग, निदेशक जयंत कस्तुआर और कार्यकारी ट्रस्टी मीनाक्षी एस. दास के मार्गदर्शन में प्रस्तुति तैयार हुई है. मुख्य कोरियोग्राफर शशिधरन नायर और सहयोगी कोरियोग्राफर राजकुमार शर्मा इसके मंचन का नेतृत्व कर रहे हैं.
शोभा दीपक सिंह के मुताबिक, 'श्री राम' कई पीढ़ियों से चली आ रही परंपरा है. इस बार पुराने स्वरूप में लौटने का उद्देश्य उसकी मूल आत्मा, संगीत और सांस्कृतिक पहचान को सुरक्षित रखना है.

35 देशों तक पहुंच चुकी है रामकथा
आयोजकों के मुताबिक, अब तक भारत और विदेशों में 25 लाख से अधिक दर्शक यह नृत्य नाटक देख चुके हैं. इसका मंचन दुनिया के 35 देशों में हो चुका है. अयोध्या में राम मंदिर के उद्घाटन अवसर पर भी इस प्रस्तुति को आमंत्रित किया गया था. नाटक का मंचन 11 अक्टूबर से 1 नवंबर तक रोजाना शाम 6:30 बजे, श्रीराम भारतीय कला केंद्र, 1 कॉपरनिकस मार्ग, मंडी हाउस, नई दिल्ली में होगा.

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