उत्तर प्रदेश सरकार ने आलू उत्पादक किसानों की मदद के लिए 2026-27 के लिए 3 नई योजनाएं शुरू की हैं. उद्यान मंत्री दिनेश प्रताप सिंह ने लखनऊ में इन योजनाओं का लाभ देने के लिए एक ऑनलाइन पोर्टल (potato.uphorticulture.in) लॉन्च किया है.
आलू के बंपर उत्पादन के समय बाजार में कीमतें गिरने से होने वाले नुकसान से किसानों को राहत देने के लिए 1,000 करोड़ रुपये का 'भामाशाह भाव स्थिरता कोष' गठित किया गया है, जिसके लिए शुरुआती तौर पर 100 करोड़ रुपये की टोकन राशि तय की गई है.
कृषि उत्पादन आयुक्त की अध्यक्षता वाली समिति द्वारा आलू की उत्पादन लागत निर्धारित की जाएगी. इसके बाद किसानों को तय उत्पादन लागत का 25 प्रतिशत या फिर लागत और बिक्री मूल्य के अंतर में से जो भी राशि कम होगी, वह सब्सिडी के रूप में दी जाएगी. यह अनुदान प्रति किसान अधिकतम 2 हेक्टेयर जमीन और प्रति हेक्टेयर 240 क्विंटल आलू की उपज पर ही मिलेगा, जिससे प्रदेश के लगभग 12 से 14 लाख आलू उत्पादक किसानों को सीधा लाभ पहुंचेगा.
किसानों के ऑनलाइन अप्लाई करना होगा
दिनेश प्रताप सिंह ने बताया कि योजना का फायदा पाने के लिए किसानों को केवल ऑनलाइन अप्लाई करना होगा, ऑफलाइन आवेदन नहीं लिए जाएंगे. योजना के तहत पात्र किसानों को सब्सिडी का पैसा सीधे उनके बैंक खाते में डीबीटी (DBT) के जरिए ट्रांसफर की जाएगी. यह व्यवस्था दो चरणों में लागू रहेगी. पहला चरण 1 जनवरी से 15 अप्रैल और दूसरा चरण 1 जुलाई से 31 अक्टूबर तक चलेगा.
उत्तर प्रदेश सरकार ने निजी कोल्ड स्टोरेज में अपनी फसल का भंडारण करने वाले किसानों को आर्थिक सहायता देने के उद्देश्य से 1,000 करोड़ रुपये की योजना लागू की है, जिसमें शुरुआती तौर पर 100 करोड़ रुपये की टोकन धनराशि का प्रावधान किया गया है. इसके तहत किसानों को 100 रुपये प्रति क्विंटल की दर से भंडारण प्रभार में छूट दी जाएगी, जिसकी अधिकतम सीमा प्रति किसान 20,000 रुपये तक तय की गई है. प्रदेश के 2,363 निजी शीतगृहों में भंडारित 173.03 लाख मीट्रिक टन आलू के आधार पर इस कल्याणकारी कदम से 15 लाख से अधिक किसानों को सीधा लाभ पहुंचेगा.
उच्च गुणवत्ता वाले आलू बीज की खरीदारी पर 5 करोड़ रुपये की छूट योजना
इसके साथ ही प्रदेश के किसानों को आलू की नई और उच्च गुणवत्ता वाली प्रजातियों के बीज आसानी से उपलब्ध कराने के लिए 5 करोड़ रुपये की 'बीज विक्रय दर छूट योजना' शुरू की गई है. इसके अंतर्गत विभागीय आधारीय आलू बीज की खरीद पर किसानों को अधिकतम 1,000 रुपये प्रति क्विंटल की सीधी छूट मिलेगी, जिससे प्रति हेक्टेयर उत्पादन लागत में प्रभावी कमी आएगी और राज्य के 15 हजार से अधिक आलू उत्पादक किसानों को प्रत्यक्ष रूप से फायदा होगा.
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