केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी 'प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि' (PM-KISAN) योजना के तहत पिछले 7 वित्तीय वर्षों (2019-20 से 2025-26) में आवंटित कुल बजट में से ₹46,317 करोड़ रुपये खर्च नहीं हो पाए हैं. सूचना का अधिकार (RTI) के तहत कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय द्वारा जारी आंकड़ों से यह जानकारी सामने आई है, इस ब्योरे के अनुसार, योजना के 7 सालों में से 4 साल ऐसे रहे जब पूरा बजट इस्तेमाल नहीं हो सका, जबकि 3 सालों में तय आवंटन से ज्यादा राशि खर्च की गई.
योजना की शुरुआत में आवंटित बजट और वास्तविक खर्च के बीच बड़ा अंतर देखने को मिला. वित्तीय वर्ष 2019-20 में ₹75,000 करोड़ के भारी-भरकम बजट के मुकाबले केवल ₹48,714 करोड़ ही खर्च हो सके, जो बड़े पैमाने पर बजट के बिना इस्तेमाल रहे जाने की ओर इशारा करता है. अगले वित्तीय वर्ष 2020-21 में फंड का उपयोग बढ़कर ₹60,990 करोड़ जरूर हुआ, लेकिन फिर भी यह ₹75,000 करोड़ के तय आवंटन से काफी पीछे रह गया.
बाद के वर्षों में बढ़ा खर्च, 2024-25 में बना रिकॉर्ड
वित्तीय वर्ष 2021-22 में स्थिति बदली और ₹65,000 करोड़ के बजट आवंटन के मुकाबले ₹65,785 करोड़ का वास्तविक खर्च दर्ज किया गया, ऐसा ही रुझान 2023-24 और 2024-25 में भी दिखा, जहां ₹60,000 करोड़ के तय बजट से अधिक क्रमशः ₹61,441 करोड़ और ₹66,138.91 करोड़ खर्च हुए, वित्तीय वर्ष 2024-25 में योजना के इतिहास का सबसे अधिक खर्च दर्ज किया गया, हालांकि, वित्तीय वर्ष 2022-23 (₹58,254 करोड़) और 2025-26 (₹58,860.10 करोड़) में खर्च एक बार फिर तय आवंटन से नीचे आ गया,
किसानों के लिए क्यों अहम हैं ये आंकड़े?
PM-KISAN देश के किसानों को सीधी आय सहायता देने वाली केंद्र की सबसे प्रमुख योजनाओं में से एक है. इसकी सफलता केवल बड़े बजट आवंटन पर ही नहीं, बल्कि इस बात पर भी निर्भर करती है कि आवंटित पैसा समय पर और पूरी तरह से लाभार्थियों तक पहुंचे, शुरुआती सालों में आधार सीडिंग, ई-केवाईसी और पात्र किसानों के सत्यापन की प्रक्रिया के कारण पूरा बजट खर्च नहीं हो पाया था, लेकिन बाद के सालों में इसमें सुधार देखा गया है.
बिश्वजीत