अगर आपके पास बहुत बड़ी पूंजी नहीं है और पोल्ट्री फार्मिंग से जुड़ा छोटा कारोबार शुरू करने की सोच रहे हैं, तो बटेर पालन (Quail Farming) एक अच्छा विकल्प हो सकता है. इसके लिए बहुत ज्यादा पूंजी और जगह की भी जरूरत नहीं पड़ती. बटेर को कम जगह में पाला जा सकता है और ये दूसरे कई पक्षियों की तुलना में कम समय में बिक्री के लिए तैयार हो जाते हैं. करीब 25 से 30 हजार रुपये के शुरुआती निवेश से क्वेल फार्मिंग शुरू की जा सकती है.
हालांकि, सिर्फ कम निवेश देखकर कारोबार शुरू करना सही नहीं होगा. बटेर पालन में चूजे, पिंजरे, फीड, तापमान, साफ-सफाई और सबसे जरूरी स्थानीय बाजार की मांग का ध्यान रखना पड़ता है. आइए समझते हैं कि छोटी इकाई शुरू करने के लिए क्या-क्या चाहिए और इसमें किन बातों का ध्यान रखना जरूरी है...
बटेर पालन के लिए कितनी जगह चाहिए?
बटेर पालन की खासियत कम जगह में ज्यादा पक्षियों को पालना है. बिहार पशुपालन विभाग के मुताबिक, करीब 10×10 फीट के कमरे में लगभग 500 बटेर पाले जा सकते हैं. इस वजह से जिन लोगों के पास खेती या पशुपालन के लिए बड़ी जमीन नहीं है, वे भी छोटी इकाई से शुरुआत कर सकते हैं. लेकिन जगह का इस्तेमाल करते समय केवल पक्षियों की संख्या देखना पर्याप्त नहीं है. कमरे में अच्छा वेंटिलेशन, साफ-सफाई और टेम्परेचर बनाए रखने की व्यवस्था भी जरूरी है.
कितने की लागत से शुरुआत कर सकते हैं
बटेर पालन की छोटी यूनिट शुरू करने में शुरुआती खर्च करीब ₹25,000 से ₹30,000 तक आ सकता है. वास्तविक खर्च पक्षियों की संख्या, पिंजरे की कीमत, चूजों की कीमत और आपके इलाके में फीड के दाम के हिसाब से कम या ज्यादा हो सकता है.
इसमें मुख्य रूप से ये चीजें शामिल होंगी...
कितने दिन में बटेर बिक्री के लिए तैयार?
बटेर पालन में एक बड़ी बात यह है कि पक्षी अपेक्षाकृत कम समय में बिक्री के लिए तैयार हो जाते हैं. बिहार पशुपालन विभाग के मुताबिक, बटेर करीब 30 दिनों में बिक्री योग्य हो सकते हैं. शुरुआती 15 दिनों में प्री-स्टार्टर फीड और इसके बाद अगले 15 दिनों तक स्टार्टर फीड देने की जानकारी दी गई है. एक बटेर पर करीब 350 से 400 ग्राम दाने की खपत आती है. हालांकि नस्ल, मौसम, दाने की गुणवत्ता और पालन व्यवस्था के आधार पर खपत अलग-अलग हो सकती है.
1000 बटेर के लिए कितना दाना लगेगा?
बटेर पालन में नियमित खर्च का सबसे बड़ा हिस्सा फीड का हो सकता है. विभाग के मुताबिक, सामान्य फीड देने पर 1000 बटेर के लिए एक महीने में करीब 7 बैग दाने की जरूरत पड़ सकती है. यह मात्रा एक अनुमान है. वास्तविक जरूरत पक्षियों की उम्र, फीड की गुणवत्ता और मौसम पर निर्भर करेगी. इसलिए कारोबार शुरू करने से पहले अपने इलाके में फीड की कीमत जरूर पता कर लें. फीड महंगा होने पर कुल लागत भी उसी हिसाब से बढ़ सकती है.
बटेरो पालन के लिए कैसी जगह जरूरी?
बटेर पालन में केवल जगह होना पर्याप्त नहीं है. जगह साफ-सुथरी और हवादार होनी चाहिए. गंदगी या खराब मैनेजमेंट से पक्षियों के स्वास्थ्य पर असर पड़ सकता है. खासकर शुरुआती दिनों में चूजों के लिए उचित तापमान बनाए रखना जरूरी है. इसके लिए बल्ब या टेम्परेचर मेंटेन करने की दूसरी व्यवस्था की जरूरत पड़ सकती है.
25-30 हजार रुपये में तुरंत मुनाफा शुरू?
यह समझना जरूरी है कि ₹25-30 हजार क्वेल फार्मिंग शुरू करने का अनुमानित खर्च है, गारंटीड मुनाफे की रकम नहीं. बटेर करीब 30 दिन में बिक्री योग्य हो सकते हैं, लेकिन इससे यह तय नहीं होता कि हर फार्मिंग यूनिट से 30 दिन में निश्चित मुनाफा होगा. बिक्री कीमत, मृत्यु दर, फीड की लागत, चूजों की कीमत, बिजली, दवा-देखभाल पर होने वाले खर्च और स्थानीय बाजार की मांग का सीधा असर कारोबार के नतीजे पर पड़ेगा. यानी बटेर पालन में कम समय में उत्पादन संभव है, लेकिन कमाई बाजार और लागत पर निर्भर करेगी.
बटेर का चूजा 14-15 रुपए में मिलता है. अगर आप हजार बटेर पालें तो करीब 14 से 15 हजार रुपए लगेंगे. इसका दाने का खर्च भी करीब 14 से 15 हजार लगता है. बाजार में एक जीवित बटेर 60 से 80 रुपये प्रति पीस बिकता है और इसका मीट 300 से 400 रुपये प्रति किलो के हिसाब से मिलता है. स्वस्थ्य बटेर का चूजा 30 से 35 दिन में 150 से 180 ग्राम का हो जाता है.
यानी डेढ़ महीने में आप 25 से 30 हजार लगाकर, 75 रुपये प्रति बटेर के हिसाब से 75 हजार रुपए या 400 रुपये प्रति किलो के हिसाब से 180 किलो बेटर मांस बेचकर 72000 रुपये बनाएंगे. यदि इसमें से 30 हजार के हिसाब से लागत निकाल दें तो आप हर महीने 40 से 45 हजार रुपये की कमाई करेंगे. बटेर अंडे भी देती हैं. मार्केट में इनकी डिमांड इतनी ज्यादा नहीं होती. आप इन अंडो से चूजे निकलने का इंतजार कर सकते हैं. अगली बार आपको चूजों की लागत पर खर्च कम करना पड़ेगा.
सबसे पहले बाजार की जानकारी जुटाएं
बटेर पालन शुरू करने से पहले सबसे जरूरी काम बाजार की जांच करना है. अपने इलाके में पता करें कि बटेर या उसके मीट की मांग कितनी है. कौन खरीदेगा, कितनी मात्रा में खरीदेगा और किस कीमत पर खरीदेगा—इन सवालों के जवाब पहले जुटाएं. इसके अलावा ये भी पता करें...
छोटी इकाई से शुरुआत करना क्यों बेहतर?
अगर पहली बार बटेर पालन शुरू कर रहे हैं तो छोटी इकाई से शुरुआत करना बेहतर रखेगा. क्योंकि इसमें नुकसान का जोखिम कम रहता है. साथ ही आपको बटेर पालन का तरीका, चूजों को कैसी फीड देनी है, कितने टेम्परेचर पर रखना है और बाजार की मांग क्या है, ये भी समझने का मौका मिलता है. बाजार की समझ और क्वेल फार्मिंग का अनुभव होने के बाद बिजनेस को बड़े स्तर पर ले जाना आपके लिए आसान होगा.
आजतक एग्रीकल्चर डेस्क