नोएडा में सालों से अपने 5% विकसित आवासीय प्लॉट का इंतजार कर रहे किसानों के लिए राहत की खबर है. नोएडा प्राधिकरण ने किसानों के लंबित मामलों को निपटाने के लिए मास्टर प्लान-2031 में अहम बदलाव किया है. इसके तहत अब गांवों की मौजूदा आबादी से सटी जमीन पर किसानों के लिए 5% आबादी प्लॉट प्लान किए जा सकेंगे.
इस फैसले से करीब 13 हजार किसानों को फायदा मिलने की उम्मीद है, जिनकी जमीन विकास परियोजनाओं के लिए अधिग्रहित की गई थी, लेकिन उन्हें अब तक प्लॉट नहीं मिल पाए हैं. नोएडा प्राधिकरण ने मास्टर प्लान-2031 के जोनिंग रेगुलेशन के क्लॉज 7.3.1 में संशोधन किया है. हालांकि, यह प्रस्ताव अभी अंतिम मंजूरी के चरण में नहीं पहुंचा है. इस पर आम लोगों से आपत्तियां और सुझाव मांगे जाएंगे. इसके बाद प्रस्ताव उत्तर प्रदेश सरकार को मंजूरी के लिए भेजा जाएगा.
क्या है पूरा मामला और क्यों किया गया बदलाव?
नोएडा प्राधिकरण की नीति के तहत जिन किसानों की जमीन अधिग्रहित की जाती है, उन्हें मुआवजे के अलावा विकसित आवासीय प्लॉट देने का भी प्रावधान है. नोएडा में यह हिस्सा अधिग्रहित की गई जमीन का 5% है. वहीं, ग्रेटर नोएडा में 6% और यमुना एक्सप्रेसवे प्राधिकरण क्षेत्र में 7% विकसित प्लॉट देने की नीति है.
नोएडा में बड़ी संख्या में किसानों को उनके हिस्से के प्लॉट आवंटित किए जा चुके हैं, लेकिन कुछ मामले लंबे समय से लंबित हैं. परेशानी यह है कि मास्टर प्लान-2031 के तहत शहर का ज्यादातर विकास हो चुका है. ऐसे में बचे हुए किसानों के लिए उपयुक्त जमीन तलाशना और प्लॉट नियोजित करना प्राधिकरण के सामने चुनौती बन गया था. इसी समस्या को दूर करने के लिए अब गांवों की मौजूदा आबादी से लगी जमीन पर भी 5% विकसित आवासीय प्लॉट प्लान करने का रास्ता खोला गया है.
मास्टर प्लान में क्या बदला गया?
नोएडा प्राधिकरण ने मास्टर प्लान-2031 के जोनिंग रेगुलेशन के क्लॉज 7.3.1 में संशोधन किया है. इसके तहत फ्लोटिंग यूज श्रेणी में नई पंक्ति 10.7 और नई शर्त संख्या-8 जोड़ी गई है. इस बदलाव के जरिए गांवों की मौजूदा आबादी से सटी जमीन पर किसानों के लिए 5 फीसदी आबादी प्लॉट नियोजित करने का विकल्प मिलेगा. प्राधिकरण का कहना है कि इससे लंबित मामलों के निस्तारण में मदद मिल सकती है. हालांकि, संशोधन को लागू करने से पहले तय प्रक्रिया पूरी करनी होगी. इसके लिए आम लोगों से आपत्तियां और सुझाव मांगे जाएंगे. इन पर विचार करने के बाद प्रस्ताव अंतिम मंजूरी के लिए उत्तर प्रदेश सरकार को भेजा जाएगा.
करीब 13 हजार किसानों के प्लॉट का मामला लंबित
नोएडा के गठन के बाद से वर्ष 2020 तक 69 गांवों में करीब 12,375 हेक्टेयर जमीन का अधिग्रहण किया गया था. इसके बदले किसानों को विकसित आवासीय प्लॉट देने का प्रावधान किया गया. हालांकि, किसान संगठनों और उपलब्ध रिपोर्टों में करीब 12,800 से 13,000 किसानों के प्लॉट आवंटन के मामले लंबित बताए गए हैं. हाल के वर्षों में किसानों ने इस मुद्दे पर कई बार प्रदर्शन भी किया है. भारतीय किसान यूनियन (मंच) के बैनर तले किसानों ने सेक्टर-96 स्थित नोएडा प्राधिकरण कार्यालय पर प्रदर्शन कर 10 फीसदी आवासीय प्लॉट और अतिरिक्त मुआवजे की मांग उठाई थी. अब मास्टर प्लान में किए गए बदलाव से कम से कम 5 फीसदी प्लॉट के लंबित मामलों को आगे बढ़ाने का रास्ता खुल सकता है.
हाजीपुर, सलारपुर, भंगेल, सोरखा जैसे गांवों को फायदा
इस बदलाव का असर नोएडा के उन गांवों में देखने को मिल सकता है, जहां किसानों के आबादी प्लॉट के मामले लंबित हैं. हाजीपुर, सलारपुर, भंगेल और सोरखा जैसे गांवों में आबादी से सटी जमीन पर प्लॉट नियोजित करने का विकल्प मिलने से किसानों को राहत मिलने की उम्मीद है. इसके अलावा, इन इलाकों में आवासीय निर्माण और बुनियादी सुविधाओं के विकास को भी गति मिल सकती है. हालांकि, जमीन की कीमतों में बढ़ोतरी या रियल एस्टेट गतिविधियों में तेजी का असर इस बात पर निर्भर करेगा कि प्लॉट कहां और कितनी संख्या में नियोजित होते हैं.
2024 में बनी थी उच्चस्तरीय समिति
किसानों के लंबित प्लॉट और मुआवजे से जुड़े मामलों के समाधान के लिए उत्तर प्रदेश सरकार ने फरवरी 2024 में राजस्व परिषद के तत्कालीन अध्यक्ष रजनीश दुबे की अध्यक्षता में तीन सदस्यीय उच्चस्तरीय समिति बनाई थी. समिति ने अगस्त 2024 में अपनी रिपोर्ट सौंपी थी. अब नोएडा प्राधिकरण ने मास्टर प्लान-2031 में संशोधन कर लंबित 5 फीसदी आबादी प्लॉट के मामलों को सुलझाने की दिशा में कदम उठाया है. फिलहाल किसानों को इस प्रस्ताव पर आपत्तियां और सुझाव लेने की प्रक्रिया पूरी होने और शासन की मंजूरी का इंतजार करना होगा. इसके बाद ही प्लॉट नियोजन और आवंटन की आगे की प्रक्रिया साफ हो सकेगी.
आजतक एग्रीकल्चर डेस्क