बॉलीवुड में अपनी एक्टिंग और कड़क आवाज की दम पर अलग पहचान बनाने वाले दिग्गज अभिनेता नाना पाटेकर का गुरुवार को निधन (Nana Patekar Dies) हो गया. 1 जनवरी 1951 को मुंबई में जन्मे नाना पाटेकर ने 75 साल की उम्र में अंतिम सांस ली. वे सिर्फ एक बड़े एक्टर ही नहीं थे, बल्कि किसान भी थे और किसानों की मदद के लिए हमेशा आगे रहते थे.
पुणे के पास एक गांव में स्थित फार्म हाउस पर वे अपना ज्यादातर समय बिताते थे और यहां पर खेती भी करते थे. खास बात ये है कि वे उपजाई हुई फसलों को बेचने के बाद इस कमाई को किसानों में ही बांट भी देते थे. इसके अलावा नाम फाउंडेशन के जरिए भी वे किसानों को आर्थिक मदद पहुंचाते थे.
27 एकड़ का फर्महाउस, जहां करते थे खेती
Nana Patekar को किसानों से बेहद लगाव था. बचपन में आर्थिक तंगी झेलने वाले बॉलीवुड अभिनेता का सादा जीवन और सरल स्वाभाव हमेशा चर्चा में रहता था. नाना पाटेकर के पास मुंबई के बाहरी इलाके में पुणे के पास स्थित खड़कवासला गांव में एक फार्म हाउस था, जहां वे अपना ज्यादातर समय बिताते थे. Nana Patekar Farm House 27 एकड़ का है और इसमें सात कमरे हैं.
फार्म हाउस की ज्यादातर जमीन का इस्तेमाल नाना पाटेकर खेती के लिए करते थे. रिपोर्ट्स की मानें, तो इस फार्महाउस में वे गेहूं, चना और धान जैसी फसलों की खेती करते थे. अपनी फसल को वे महाराष्ट्र में बेचते थे और इससे होने वाली कमाई अपने पास रखने के बजाय किसानों को ही बांट देते थी. खबरों की मानें, तो खेती की कमाई दान करने की शुरुआत वे अपने फार्महाउस में काम करने वालों से करते थे.
हमेशा उठाई किसानों की आवाज
आजतक के सहयोगी प्लेटफॉर्म दि लल्लनटॉप को दिए एक पुराने इंटरव्यू पर नजर डालें, तो साफ पता चलता है कि कैसे दिवंगत एक्टर नाना पाटेकर हमेशा ही किसानों की आवाज को उठाते रहे. नाना पाटेकर किसानों की दयनीय स्थिति, फसलों के नुकसान और किसानों की सुसाइड के मामलों और उनकी मांगों पर बात करते हुए अक्सर बेहद भावुक दिखाई देते थे.
अपने इस इंटरव्यू में नाना पाटेकर ने एक किस्सा बताया था कि वे एक नई कार खरीदना चाहते थे और इसके लिए 1.5 करोड़ रुपये इकट्ठा भी कर लिए थे, लेकिन उसी दिन टीवी पर किसान आत्महत्या की खबरों को देख उन्होंने अपना प्लान बदल दिया और किसानों की मदद करने जा पहुंचे.
'NAAM' के जरिए किसानों की मदद
न सिर्फ खेती की कमाई को दान करके दिवंगत नाना पाटेकर किसानों की मदद करते थे. उन्होंने किसानों की सहायता के लिए साल 2015 में 'नाम फाउंडेशन' (NAAM Foundation) की शुरुआत की थी. यह एक रजिस्टर्ड गैर-लाभकारी संगठन (NGO) है, जिसका मुख्यालय पुणे में है. इसके जरिए वे महाराष्ट्र में गंभीर सूखे, पानी की कमी और कर्ज या तंगी के कारण आत्महत्या करने वाले किसानों के परिवारों और जरूरतमंद ग्रामीणों की मदद करते थे. गरीब किसानों की बेटियों की शादी में भी वे आर्थिक योगदान देते थे.
गोवा के अस्पताल में ली अंतिम सांस
Nana Patekar Death की बात करें, तो उन्हें छाती में दर्द होने की शिकायत के बाद डॉक्टरों ने गोवा स्थित उनके फ्लैट पर ही तत्काल कार्डियक मसाज (CPR) दी थी, लेकिन हालत बिगड़ने पर उन्हें स्थानीय मणिपाल अस्पताल ले जाया गया. डॉक्टरों ने तमाम कोशिशें की, लेकिन उन्हें बचाया नहीं जा सका और 75 वर्षीय दिग्गज एक्टर ने सुबह 5.20 बजे दुनिया को अलविदा कह दिया.
आजतक एग्रीकल्चर डेस्क