भारतीय सेना ने जवानों को बेहतर गुणवत्ता वाला चावल उपलब्ध कराने के लिए सोमवार को 'भारत राइस' लॉन्च किया. इस पहल का उद्देश्य सेना को मिलने वाले राशन की गुणवत्ता में सुधार करना और दुर्गम इलाकों में तैनात जवानों तक खाद्य सामग्री की आपूर्ति आसान बनाना है. रक्षा मंत्रालय के मुताबिक, इस पहल के तहत वित्त वर्ष 2026-27 में नेफेड (NAFED) के माध्यम से सेना को चावल की आपूर्ति की जाएगी.
इस पहल की जिम्मेदारी सेना के आपूर्ति और परिवहन महानिदेशालय ने संभाली है. जवानों से मिले सुझावों और उनकी जरूरतों को ध्यान में रखते हुए यह कदम उठाया गया है. चावल को सेना के तय मानकों के मुताबिक तैयार किया जाएगा. इसकी अच्छी तरह जांच होगी, ताकि उसमें कोई गंदगी या दूसरी मिलावट न हो. साथ ही, चावल में टूटे, खराब और रंग बदले हुए दाने भी बहुत कम होंगे.
FCI के साथ समझौता, मुश्किल इलाकों में सीधे पहुंचेगा राशन
इस मौके पर भारतीय सेना और भारतीय खाद्य निगम (FCI) के बीच एक समझौता (MoU) पर हस्ताक्षर किए गए. इसका उद्देश्य आपातकालीन और सैन्य अभियानों के दौरान सेना को एफसीआई के गोदामों, भंडारण सुविधाओं, श्रमिकों और सामान संभालने वाले उपकरणों का इस्तेमाल करने की व्यवस्था उपलब्ध कराना है.
रक्षा मंत्रालय के अनुसार, अब बेहतर गुणवत्ता वाला चावल सेना के आपूर्ति डिपो तक सीधे पहुंचाया जाएगा. इसमें लद्दाख और पूर्वोत्तर जैसे दूरदराज के इलाके भी शामिल हैं. इससे सेना के डिपो को स्थानीय एफसीआई केंद्रों से खुद चावल लाने की जरूरत कम होगी और परिवहन की प्रक्रिया अधिक सुविधाजनक बनेगी.
चावल की खरीद 10 और 30 किलोग्राम के बोरों में की जाएगी. इससे खासतौर पर अग्रिम चौकियों तक राशन पहुंचाने और उसे संभालने में आसानी होगी.
'भारत राइस' किसान और जवान के बीच विश्वास का प्रतीक
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने 'भारत राइस' को किसान के खेत से जवान की थाली तक पहुंचने वाले विश्वास का प्रतीक बताया. उन्होंने कहा कि यह पहल 'जय जवान, जय किसान' की भावना को साकार करती है. किसान की मेहनत से पैदा होने वाला अनाज जब जवान की ताकत बनता है, तो यह देश की सामूहिक प्रतिबद्धता को दर्शाता है.
रक्षा मंत्री ने कहा कि जवानों को तय मानकों के अनुसार बेहतर गुणवत्ता वाला चावल दिया जाएगा. साथ ही, इसकी पैकेजिंग को भी सुविधाजनक बनाया जा रहा है. उन्होंने कहा कि यह पहल देखने में छोटी लग सकती है, लेकिन दुर्गम और कठिन इलाकों में राशन पहुंचाने वाले सैनिकों को इससे बड़ी राहत मिलेगी.
उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि सैनिकों की अभियान संबंधी तैयारी केवल हथियारों पर निर्भर नहीं करती. उनका शारीरिक स्वास्थ्य, मानसिक संतुलन, मनोबल और सहनशक्ति भी उतने ही महत्वपूर्ण हैं, खासकर तब, जब वे बेहद कठिन परिस्थितियों में देश की रक्षा कर रहे होते हैं.
राजनाथ सिंह ने कहा कि सैनिकों का कल्याण राष्ट्रीय सुरक्षा का अभिन्न हिस्सा है. पौष्टिक भोजन, बेहतर उपकरण और पूरा प्रशिक्षण जवानों का मनोबल बढ़ाते हैं और उन्हें हर चुनौती का सामना करने के लिए तैयार रखते हैं.
आधुनिक युद्ध में रसद व्यवस्था भी ताकत
रक्षा मंत्री ने कहा कि आज के युद्ध में केवल हथियार, सैन्य प्लेटफॉर्म और तकनीक ही निर्णायक नहीं हैं, बल्कि रसद व्यवस्था भी सैन्य ताकत का महत्वपूर्ण हिस्सा है. आपूर्ति श्रृंखला, भंडारण क्षमता, परिवहन नेटवर्क, गोदामों की सुविधाएं और जरूरत के समय सामान की उपलब्धता युद्ध के परिणामों को प्रभावित कर सकती हैं.
उन्होंने ऑपरेशन सिंदूर से मिले सबक का जिक्र करते हुए कहा कि भविष्य के संघर्षों में चेतावनी मिलने का समय बेहद कम हो सकता है. ऐसी स्थिति में सेना को बिना पूर्व चेतावनी के पैदा होने वाली परिस्थितियों के लिए भी तैयार रहना होगा. तकनीक के बढ़ते इस्तेमाल के साथ-साथ लंबे समय तक आपूर्ति व्यवस्था बनाए रखना भी एक बड़ी चुनौती हो सकती है.
राजनाथ सिंह के मुताबिक, इन परिस्थितियों में रसद व्यवस्था को मजबूत और लचीला बनाना जरूरी है. एफसीआई के साथ हुआ समझौता इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है.
एफसीआई के गोदाम अब सेना की आपूर्ति व्यवस्था से जुड़ेंगे
रक्षा मंत्री ने बताया कि एफसीआई के पास देशभर में गोदाम, भंडारण केंद्र, आधुनिक साइलो, सामान संभालने वाले उपकरण और प्रशिक्षित कर्मचारी उपलब्ध हैं. इन सुविधाओं का इस्तेमाल जरूरत पड़ने पर सेना की आपूर्ति व्यवस्था को मजबूत करने के लिए किया जा सकेगा.
उन्होंने कहा कि यह पहल देश में पहले से मौजूद संसाधनों को राष्ट्रीय सुरक्षा की जरूरतों के अनुरूप इस्तेमाल करने का उदाहरण है. इसके तहत नागरिक और सैन्य जरूरतों के लिए एक ही बुनियादी ढांचे का उपयोग किया जा सकेगा.
रक्षा मंत्री ने उदाहरण देते हुए कहा कि अब लड़ाकू विमान एक्सप्रेसवे पर भी उतर रहे हैं और सीमा सड़क संगठन की ओर से बनाए गए सड़क और पुल स्थानीय लोगों के भी काम आते हैं. इसी तरह, एफसीआई के गोदाम केवल खाद्यान्न भंडारण तक सीमित नहीं रहेंगे, बल्कि भारतीय सेना की आपूर्ति श्रृंखला का अहम हिस्सा बनेंगे. उन्होंने कहा कि इस व्यवस्था से संसाधनों का बेहतर इस्तेमाल होगा, समय की बचत होगी और देश की आपात परिस्थितियों से निपटने की क्षमता मजबूत होगी. यह समझौता केवल प्रशासनिक व्यवस्था नहीं है, बल्कि सेना की अभियान संबंधी तैयारियों को मजबूत करने वाला कदम है. यह सरकार और पूरे देश के साझा प्रयासों की भावना को भी दर्शाता है.
18 महीने की तैयारी के बाद शुरू हुई पहल
रक्षा मंत्रालय के मुताबिक, 'भारत राइस' योजना को शुरू करने के लिए भारतीय सेना, एफसीआई, नेफेड और खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण विभाग ने करीब 18 महीने तक मिलकर काम किया. एफसीआई के साथ यह समझौता ऑपरेशन सिंदूर समेत दूसरे सैन्य अभियानों से मिले अनुभवों को ध्यान में रखकर किया गया है. इसका मकसद अचानक पैदा होने वाली आपात स्थितियों में भी सेना तक राशन पहुंचाने की व्यवस्था बनाए रखना है.
क्या है इस चावल की खूबियां?
'भारत राइस' को सेना के तय मानकों के अनुसार तैयार किया जाएगा. इसकी गुणवत्ता की जांच की जाएगी, ताकि चावल साफ-सुथरा हो और उसमें कोई बाहरी चीज या मिलावट न हो. इसमें टूटे, खराब और रंग बदले हुए दानों की मात्रा भी कम रखी जाएगी. चावल 10 और 30 किलो के थैलों में मिलेगा, जिससे खासकर दूरदराज की सैन्य चौकियों तक इसे पहुंचाना और संभालना आसान होगा.
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