पशुपालन और डेयरी से जुड़े किसानों की आमदनी बढ़ाने के लिए सरकार सहकारिता और आधुनिक तकनीक पर जोर दे रही है. इसी सिलसिले में केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने मंगलवार को भोपाल के दशहरा मैदान में गोपालक सम्मेलन को संबोधित किया. इस कार्यक्रम में मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव, राज्य सरकार के मंत्री, सांसद-विधायक और बड़ी संख्या में पशुपालक व दुग्ध उत्पादक मौजूद रहे.
कोऑपरेटिव सेक्टर की बात करते हुए केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने कहा कि अलग सहकारिता मंत्रालय बनने से किसान, पशुपालक और ग्रामीण अर्थव्यवस्था से जुड़े लोगों को फायदा हो रहा है. उन्होंने कहा कि खुले बाजार में दूध बेचने वाले पशुपालकों को कई बार बिचौलियों की वजह से उचित कीमत नहीं मिलती. सहकारी व्यवस्था उन्हें बेहतर दाम के साथ दूध से बने उत्पादों की कमाई से भी जोड़ सकती है.
उन्होंने कहा कि दूध से आइसक्रीम, मक्खन, घी, चीज और मावा जैसे उत्पाद बनाने के लिए प्रोसेसिंग इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करना जरूरी है. सरकार इस दिशा में काम कर रही है.
नस्ल सुधार के लिए 50 एकड़ जमीन
डेयरी उत्पादन बढ़ाने के लिए नस्ल सुधार को अहम बताते हुए शाह ने कहा कि मध्य प्रदेश में गाय और भैंस की नस्ल सुधार से जुड़े कार्यक्रमों के लिए 50 एकड़ जमीन देने का आग्रह किया गया था, जिसे राज्य सरकार ने सैद्धांतिक मंजूरी दी है. उन्होंने आधुनिक नस्ल सुधार तकनीकों और सेक्स सॉर्टेड सीमेन के इस्तेमाल पर भी जोर दिया. उनका कहना था कि इससे बेहतर नस्ल, पशुओं की सेहत और दूध उत्पादन बढ़ाने में मदद मिल सकती है.
देश का दूध उत्पादन 24.80 करोड़ टन
अमित शाह ने बताया कि 2014-15 में देश में करीब 14.60 करोड़ टन दूध का उत्पादन होता था, जो अब बढ़कर करीब 24.80 करोड़ टन हो गया है. इसी अवधि में प्रति व्यक्ति दूध उपलब्धता करीब 307 ग्राम से बढ़कर 485 ग्राम प्रतिदिन हो गई है. उन्होंने कहा कि भारत दुनिया का सबसे बड़ा दूध उत्पादक देश है. भारतीय डेयरी उत्पादों का निर्यात भी बढ़कर करीब 4,666 करोड़ रुपये हो गया है और इन्हें कई देशों में भेजा जा रहा है.
देश में खुलेंगी 75000 सहकारी डेयरियां
अमित शाह ने 'श्वेत क्रांति 2.0' का जिक्र करते हुए कहा कि देशभर में 75,000 नई सहकारी डेयरियां स्थापित करने और 46,000 मौजूदा डेयरियों को मजबूत करने का लक्ष्य रखा गया है. इसका फायदा मध्य प्रदेश के पशुपालकों को भी मिलने की उम्मीद है.
उन्होंने गोबर से अतिरिक्त कमाई की संभावनाओं पर भी जोर दिया. वैज्ञानिक तरीके से गोबर के इस्तेमाल से स्वच्छ ऊर्जा, पोषक तत्वों की रिसाइक्लिंग और ग्रामीण रोजगार को बढ़ावा देने की बात कही गई.
अमित शाह ने कहा कि सहकारी डेयरी महिलाओं की आर्थिक स्थिति मजबूत करने का बड़ा माध्यम बन सकती है. डेयरी से होने वाली आमदनी सीधे महिलाओं के हाथ में पहुंचने से परिवार की आर्थिक स्थिति के साथ महिला सशक्तिकरण भी मजबूत होता है. उन्होंने कहा कि कुपोषण के खिलाफ लड़ाई में भी डेयरी क्षेत्र की महत्वपूर्ण भूमिका है.
भोपाल-उज्जैन में डेयरी प्रोजेक्ट की शुरुआत
केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने कार्यक्रम के दौरान उज्जैन में 255 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाले रोजाना 3 लाख लीटर क्षमता के मिल्क प्रोसेसिंग प्लांट का डिजिटल शिलान्यास किया गया. भोपाल में करीब 16.5 करोड़ रुपये की लागत से बने 40 हजार लीटर प्रतिदिन क्षमता वाले प्रोडक्ट डेयरी प्लांट और 12.42 करोड़ रुपये की अत्याधुनिक राज्य स्तरीय सेंट्रल लेबोरेटरी का उद्घाटन भी उन्होंने किया. उन्होंने शिवपुरी के मिनी डेयरी प्लांट के 6.5 करोड़ रुपये की लागत से हुए सुदृढ़ीकरण कार्य का भी डिजिटल उद्घाटन किया.
कार्यक्रम में पशुपालकों को बोनस, गौशालाओं को वित्तीय सहायता और डेयरी सहकारी समितियों के सदस्यों को लाभांश दिया गया. महिला पशुपालकों को 'गोपालक दीदी' के रूप में सम्मानित किया गया और डॉ. भीमराव आंबेडकर कामधेनु योजना के तहत स्वीकृति पत्र भी बांटे गए. अमित शाह ने कहा कि केंद्र और राज्य सरकार का लक्ष्य सहकारिता और डेयरी क्षेत्र को मजबूत करके मध्य प्रदेश के पशुपालकों, किसानों और महिलाओं की आमदनी बढ़ाना है.
आजतक एग्रीकल्चर डेस्क