सेहत को लेकर बढ़ती जागरूकता के बीच लोग खाने-पीने की चीजों में चीनी का इस्तेमाल कम करने लगे हैं. ऐसे में चीनी के विकल्प के तौर पर इस्तेमाल होने वाले नेचुरल स्वीटनर्स की मांग भी बढ़ रही है. स्टीविया (Stevia) भी इसी तरह का एक नेचुरल स्वीटनर है, जिसकी खेती किसानों के लिए कमाई का एक बेहतर विकल्प हो सकती है. स्टीविया को मीठी तुलसी भी कहा जाता है. इसकी पत्तियों से प्राकृतिक मिठास देने वाला पदार्थ तैयार किया जाता है, जिसका इस्तेमाल खाद्य पदार्थों और कुछ अन्य उत्पादों में होता है.
स्टीविया की पत्तियां चीनी से कई गुना मीठी
स्टीविया की पत्तियों में ऐसे प्राकृतिक यौगिक पाए जाते हैं, जो इन्हें सामान्य चीनी के मुकाबले बहुत ज्यादा मीठा बनाते हैं. इनसे तैयार किए जाने वाले कुछ मिठास देने वाले पदार्थ चीनी से करीब 200 से 300 गुना तक मीठे हो सकते हैं. स्टीविया की पत्तियों में कैलोरी बहुत कम होती है, जबकि शुद्ध स्टीविया अर्क में 0 कैलोरी हो सकती है. इसी वजह से इसका इस्तेमाल चीनी के विकल्प के रूप में किया जाता है.
एक बार पौधे लगाएं, कई साल तक उपज
स्टीविया एक बहुवर्षीय पौधा है. अनुकूल मौसम और सही देखभाल मिलने पर इसे एक बार लगाने के बाद कई साल तक उगाया जा सकता है. आम तौर पर इसके खेत से करीब 3 से 5 साल तक उत्पादन लेने की संभावना बताई जाती है. हालांकि, पौधों की उम्र और उपज मिट्टी, मौसम, सिंचाई, पौधों की किस्म और देखभाल पर निर्भर करती है. इसलिए खेती शुरू करने से पहले स्थानीय कृषि विशेषज्ञ से जानकारी लेना जरूरी है.
कितनी लागत में शुरू हो सकती है खेती?
स्टीविया की खेती शुरू करने के लिए सबसे पहले खेत की तैयारी, पौधों की खरीद और रोपाई पर खर्च करना पड़ता है. इसके बाद खाद, सिंचाई, निराई-गुड़ाई, कटाई और पत्तियों को सुखाने की लागत आती है. शुरुआती खर्च इस बात पर भी निर्भर करता है कि किसान कितने क्षेत्र में खेती कर रहा है और पौधे कहां से खरीद रहा है. इसलिए एक एकड़ की लागत तय करने से पहले स्थानीय पौधों की कीमत और खेती से जुड़ी दूसरी लागतों का हिसाब जरूर लगा लें.
स्टीविया की पत्तियां कमाई का मुख्य जरिया
स्टीविया की खेती में किसानों की कमाई का मुख्य आधार इसकी पत्तियां होती हैं. सही समय पर पौधों की कटाई करने के बाद पत्तियों को सुखाया जाता है. इसके बाद उन्हें गुणवत्ता और नमी के मानकों के मुताबिक तैयार करके खरीदारों तक पहुंचाया जाता है. पत्तियों की गुणवत्ता, उनमें मौजूद मिठास देने वाले तत्वों की मात्रा और सुखाने के तरीके का बाजार भाव पर असर पड़ सकता है.
साल में कई बार काटी जा सकती हैं पत्तियां
अनुकूल परिस्थितियों में स्टीविया की पत्तियों की साल में कई बार कटाई की जा सकती है. स्टीविया की खेती करने वाले कुछ किसानों के मुताबिक एक फसल लगाने के बाद इसकी 3 से 4 बार कटाई की जा सकती है. मौसम, पौधों की बढ़त और खेती के तरीके पर भी यह निर्भर करता है कि एक बार स्टीविया की खेती के बाद आप कितनी बार उससे फसल प्राप्त कर सकते हैं. कटाई के बाद पत्तियों को अच्छी तरह सुखाना जरूरी है, ताकि उनकी गुणवत्ता बनी रहे और उन्हें बाजार में बेचने के लिए तैयार किया जा सके.
किस काम में आती हैं स्टीविया की पत्तियां?
स्टीविया से मिलने वाले प्राकृतिक मिठास देने वाले तत्वों का इस्तेमाल खाद्य और पेय पदार्थों में किया जाता है. चीनी के विकल्प बनाने वाली कंपनियां, खाद्य उत्पाद निर्माता और कुछ हर्बल उत्पादों से जुड़ी इकाइयां इस क्षेत्र के संभावित खरीदार हो सकते हैं. हालांकि, किसानों को खेती शुरू करने से पहले यह पता करना चाहिए कि उनके इलाके में स्टीविया की पत्तियों के खरीदार कौन हैं, वे किस गुणवत्ता का माल लेते हैं और खरीद की शर्तें क्या हैं.
एक एकड़ से कितनी कमाई हो सकती है?
कुछ खेती संबंधी दावों में एक एकड़ से सालाना 1 लाख से 1.25 लाख रुपये तक की शुद्ध कमाई का अनुमान बताया जाता है. लेकिन इसे हर किसान के लिए तय मुनाफा नहीं माना जा सकता. असल कमाई पत्तियों की उपज, बाजार भाव, मजदूरी, सिंचाई, खाद, कटाई और सुखाने के खर्च पर निर्भर करेगी. किसान को संभावित आमदनी का हिसाब लगाने से पहले खरीदारों से कीमत और खरीद की शर्तों की पुष्टि करनी चाहिए.
खेती से पहले आसपास इसकी मांग जांच लें
अगर फसल अच्छी होती है और पत्तियों के लिए नियमित खरीदार मिल जाते हैं, तो स्टीविया किसानों को कई साल तक आमदनी का विकल्प दे सकती है. हालांकि, बड़े स्तर पर निवेश करने से पहले इसकी स्थानीय उपयुक्तता, वास्तविक लागत और बाजार में खरीद की उपलब्धता की जांच करना सबसे जरूरी है. स्टीविया की खेती शुरू करने से पहले छोटे क्षेत्र में प्रयोग करना, कृषि विशेषज्ञ से सलाह लेना और खरीददारों से संपर्क करना जोखिम कम करने में मदद कर सकता है.