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मूंगफली की खेती कैसे होती है, बुवाई का सही समय क्या है? बीज से लेकर फसल की कटाई तक... जानें सबकुछ

Peanut Farming: मूंगफली की बुवाई खरीफ, रबी और जायद मौसम में की जाती है. जिसमें खरीफ फसल सबसे ज्यादा उत्पादन देती है. मूंगफली के लिए भुरभुरी बलुई दोमट मिट्टी उपयुक्त मानी जाती है. आइए जानते हैं मूंगफली की बुवाई से लेकर सिंचाई, निराई-गुड़ाई और फसल की कटाई से जुड़ी खास बातें.

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मूंगफली की बुवाई के लिए भुरभुरी बलुई दोमट अच्छी होती है (फाइल फोटो- ITG)
मूंगफली की बुवाई के लिए भुरभुरी बलुई दोमट अच्छी होती है (फाइल फोटो- ITG)

मूंगफली भारत की एक प्रमुख तिलहनी फसल है. इसे ग्राउंडनट या पीनट के नाम से भी जाना जाता है. यह तेल, चटनी, नमकीन, मक्खन और पशु चारे के लिए इस्तेमाल होती है. मूंगफली की खेती से किसानों को अच्छा मुनाफा मिलता है, क्योंकि इसकी मांग साल भर रहती है. मूंगफली की फसल कम पानी और कम देखभाल में भी अच्छी पैदावार दे सकती है. आइए जानते हैं मूंगफली की बुवाई का सही समय क्या है और इसकी खेती से जुड़ी खास बातें.

मूंगफली की बुवाई का सही समय
भारत में मूंगफली की खेती मुख्य रूप से तीन मौसमों में होती है, लेकिन सबसे ज्यादा उत्पादन खरीफ सीजन (बरसात वाली) में मिलता है.

खरीफ (बरसात वाली) फसल: सबसे लोकप्रिय और ज्यादा उत्पादन वाली होती है. इसकी बुवाई का सही समय 15 जून से 15 जुलाई के बीच माना जाता है. जब मॉनसून शुरू हो जाता है. उत्तर भारत में जून के मध्य से जुलाई के पहले हफ्ते तक मूंगफली की बुवाई करें. देर से बुवाई करने पर पैदावार कम हो सकती है.

रबी (सर्दी वाली) फसल: सिंचाई वाली जगहों पर अक्टूबर-नवंबर या दिसंबर-जनवरी में बुवाई की जाती है. इसकी फसल की कटाई मार्च-अप्रैल में होती है.

जायद (गर्मी वाली) फसल: सिंचाई उपलब्ध हो तो मार्च-अप्रैल में मूंगफली की बुवाई की जा सकती है. कुछ जगहों पर मई के अंत में प्री-मॉनसून बुवाई भी की जाती है. मॉनसून की शुरुआत के साथ इसकी बुवाई के लिए सबसे अच्छा समय माना जाता है. 

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मूंगफली के लिए उपयुक्त मिट्टी कौन सी है?
मिट्टी: मूंगफली की बुवाई के लिए भुरभुरी बलुई दोमट या दोमट मिट्टी सबसे अच्छी होती है. पीएच मान 6 से 7.5 के बीच होना चाहिए. भारी काली मिट्टी या ज्यादा चिकनी मिट्टी में मूंगफली की खेती न करें, क्योंकि पानी रुकने से फली सड़ जाती है.

खेत तैयार करना 
मूंगफली की बुवाई के लिए खेत में 3-4 बार अच्छी जुताई करें. पहले मिट्टी पलटने वाले हल से गहरी जुताई करें.फिर कल्टीवेटर से 2 बार जुताई करके खेत समतल करें. दीमक से बचाव के लिए अंतिम जुताई में क्विनलफॉस (1.5%) 25 किलो प्रति हेक्टेयर मिलाएं. गोबर की खाद 5-10 टन प्रति हेक्टेयर डालें.

बीज और बुवाई का तरीका

  • बीज की मात्रा: फैलने वाली किस्मों के लिए 60-80 किलो प्रति हेक्टेयर, गुच्छे वाली (कम फैलने वाली) के लिए 75-100 किलो प्रति हेक्टेयर.
  • बीज का उपचार: बोने से 10-15 दिन पहले फलियों से दाने अलग करें. बोने से पहले थाइरम (3 ग्राम/किलो) या मेंकोजेब/कार्बेंडाजिम (2 ग्राम/किलो) से उपचारित करें. दीमक से बचाव के लिए क्लोरोपाइरिफॉस का उपचार करें.

मूंगफली की बुवाई कैसे करें?
कतार में बोने के लिए कतार से कतार की दूरी गुच्छे वाली किस्मों में 30 सेमी और फैलने वाली किस्मों में 45 सेमी की दूरी होनी चाहिए. जबकि पौधे से पौधे की दूरी 10-15 सेमी और गहराई 5-6 सेमी (मिट्टी की नमी के अनुसार) होनी चाहिए.

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मूंगफली की प्रमुख उन्नत किस्में कौन सी हैं?

  • खरीफ के लिए: TG-37A, GG-20, JL-24 (फूले प्रगति), TMV-7, ICGS-44, TAG-24
  • जायद/गर्मी के लिए:  GG-20, TG-37A, TPG-41, DH-86
  • अन्य अच्छी किस्में:  AK-12-24, RG-425, Kadiri-6, Devi. ये रोग प्रतिरोधी और ज्यादा पैदावार वाली किस्में हैं.

खाद और उर्वरक
मूंगफली दलहन है, इसलिए नाइट्रोजन कम लगती है. मूंगफली की बुवाई के समय सुपर फॉस्फेट और यूरिया मिलाकर डालें. डीएपी से बचें, क्योंकि गलन रोग लग सकता है. नीम की खल का इस्तेमाल अच्छा रहता है.

सिंचाई, निराई-गुड़ाई और देखभाल
बुवाई के बाद पहली सिंचाई 20-25 दिन बाद करनी चाहिए. फूल आने (40-45 दिन), खूंटी बनने (55-70 दिन) और फली भरने के समय जरूरी सिंचाई करें. ज्यादा पानी न दें. वहीं, पहली निराई-गुड़ाई 20-25 दिन बाद, दूसरी 40-45 दिन बाद करें. खरपतवार नियंत्रण के लिए पेंडीमेथालिन जैसे हर्बिसाइड इस्तेमाल करें.

कब करें मूंगफली की फसल की कटाई?
पत्तियां पीली पड़ने और फलियां सख्त होने पर कटाई (90-150 दिन में, किस्म के अनुसार) की जा सकती है.

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