विदर्भ के अमरावती जिले के मेलघाट क्षेत्र में बेमौसम बारिश ने किसानों की मेहनत पर पानी फेर दिया है. दोपहर के समय तेज आंधी और बारिश के साथ कई इलाकों में ओलावृष्टि भी हुई. जिससे चूर्णी, काटकुंभ समेत कई गांवों में फसलों को भारी नुकसान पहुंचा है. बता दें कि इन दिनों क्षेत्र में गेहूं और मक्का की फसल कटाई के बाद मंडियों में बिक्री के लिए लाई जा रही है. कई किसानों ने अपनी उपज मंडी परिसर में रखी थी, जो अचानक हुई तेज बारिश से भीगकर बर्बाद हो गई है.
हालांकि, किसानों ने समय रहते तिरपाल डालकर फसल को बचाने की कोशिश की, लेकिन तेज बारिश की वजह से सब पानी में भीग गई और बह गई. वहीं, जिन किसानों की गेहूं की फसल अभी खेतों में ही तैयार है, या कटी पड़ी है, उन्हें भी नुकसान हुआ है.
मंडी प्रशासन पर किसानों के गंभीर आरोप
किसानों ने मंडी प्रशासन पर लापरवाही का आरोप लगाया है. उनका कहना है कि मक्का की खरीदी में अधिकारी टालमटोल और देरी कर रहे हैं. अगर समय पर खरीदी शुरू हो जाती, तो फसल मंडी में इतने दिन नहीं पड़ी रहती और बारिश से बच जाती.
एक किसान गणेश राठौड़ ने बताया कि वह पिछले दो दिन से मंडी में मक्का बेचने आ रहे हैं लेकि अधिकारी कोई न कोई बहाना बनाकर खरीदी टाल देते हैं. उन्होंने बताया कि आज जब अचानक तेज बारिश होने लगी तो उन्होंने तिरपाल डालकर फसल को बचाने की पूरी कोशिश की, लेकिन बारिश इतनी तेज थी कि बोरियों के आसपास पानी भर गया और मक्का भीग गया.
वहीं, कई अन्य किसानों ने भी यही शिकायत की कि मंडी में खरीदी की प्रक्रिया बहुत धीमी चल रही है. इससे किसानों को दोहरा नुकसान हो रहा है. एक तो फसल खराब हो रही है, दूसरे बिक्री नहीं हो पा रही है.
किसानों पर बढ़ा आर्थिक संकट
इस बेमौसम बारिश से किसानों के सामने आर्थिक संकट खड़ा हो गया है. एक तो फसल तैयार होने के बाद भी अच्छा दाम नहीं मिल रहा था और अब बेमौसम बारिश ने स्थिति खराब कर दी है. गीली फसल का दाम घट जाएगा या उसे बेचना भी मुश्किल हो जाएगा.
किसानों की मांग
प्रभावित किसानों ने जिला प्रशासन और मंडी अधिकारियों से तत्काल कार्रवाई की मांग की है. उनकी मुख्य मांग है कि जल्द से जल्द खेतों और मंडी में फसलों को हुए नुकसान का सर्वे किया जाए और उचित मुआवजा दिया जाए. वहीं, मक्का और गेहूं की खरीदी तुरंत तेज की जाए ताकि बची हुई फसल नुकसान से बच सके.