सीड्स बिल 2025 भारत में कृषि बीजों की क्वालिटी, उत्पादन और बिक्री को नियंत्रित करने के लिए लाया गया नया कानून है, जो कि पुराने सीड्स बिल 1966 की जगह लेगा. सुप्रीम कोर्ट की हाई-पावर्ड कमेटी ऑन एग्रीकल्चर के सदस्य और एग्री-इकोनॉमी एक्सपर्ट रंजीत सिंह घुमन ने सीड बिल को लेकर कई जरूरी बातें बताईं हैं.
रंजीत सिंह बताते हैं कि एग्रीकल्चर प्रोसेस की शुरुआत हमेशा बीज से होती है और यही सबसे जरूरी होता है. अगर बीज अच्छी क्वालिटी का हो, तो उत्पादन बेहतर होता है और किसानों को इसका सीधा फायदा मिलता है. लेकिन किसान और सरकार के बीच विश्वास की कमी है और सरकार को इसे ठीक करने की जरूरत है.
अगर सीड बिल 1966 में बदलाव जरूरी हैं तो किसानों को इस प्रक्रिया में साथ लिया जाना चाहिए. उनकी चिंताओं को ध्यानपूर्वक सुनकर उनका समाधान किया जाना चाहिए.
अगर किसानों की बात नहीं सुनी गई तो यह मामला आंदोलन का रूप ले सकता है. इस बिल की सार्वजनिक रूप से आलोचना हो रही है. एक्सपर्ट्स भी डाउट्स उठा रहे हैं. इसलिए सभी पक्षों की बात सुनी जानी चाहिए. सबसे जरूरी किसान हैं. पहले उनकी समस्याओं और चिंताओं का समाधान किया जाना चाहिए.
भारत की 46 प्रतिशत कार्यशक्ति एग्रीकल्चर से जुड़ी हुई है, यह फूड सिक्योरिटी के लिए काफी अहम है. रंजीत सिंह घुमन बताते हैं इस सीड बिल में सरकार को देश के 86 प्रतिशत छोटे किसानों पर विशेष रूप से ध्यान देना चाहिए, और यह समझना चाहिए कि इसका उन पर क्या प्रभाव पड़ेगा. सरकार को इसमें जल्दबाजी नहीं करनी चाहिए क्योंकि कोई इमरजेंसी नहीं है.
किसान नहीं कर रहे विरोध
हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सैनी ने कहा किसान सीड बिल का विरोध नहीं कर रहे हैं. इसे हम हरियाणा विधानसभा में भी लेकर आए थे और इसका मुख्य उद्देश्य यह है कि किसानों को शुद्ध बीज और कीटनाशक मिलें, क्योंकि अगर किसानों को नकली या घटिया बीज और कीटनाशक मिलते हैं, तो उन्हें फसल के साथ-साथ आर्थिक नुकसान भी उठाना पड़ता है. हरियाणा के किसी भी किसान या किसी केंद्रीय किसान संगठन ने इसकी आलोचना नहीं की है. इसलिए किसान इस बिल का विरोध नहीं कर रहे हैं.