अगर आप एक किसान हैं और खेती-बारी का काम कर रहे हैं, लेकिन आपको बार-बार अपने खेत की जुताई कराने के लिए किसी दूसरे पर निर्भर रहना पड़ता है तो आपके लिए ये खबर खास हो सकती है, क्योंकि अब आप खुद का ट्रैक्टर और बाकी खेती वाले यंत्र खरीद सकते हैं. इसके लिए सरकार आपकी मदद करेगी.
दरअसल, सरकार किसानों को ट्रैक्टर और खेती-किसानी से जुड़ी मशीनरी खरीदने के लिए प्रोत्साहित कर रही है और चाहती है कि किसानों को महंगी मशीनरी कम दाम पर मिल सके. कम दाम पर ये मशीनरी देने के लिए सरकार की ओर से तगड़ी सब्सिडी दी जा रही है.
क्या है ये स्कीम?
सरकार की ओर से चलाई जाने वाली इस योजना का नाम Sub-Mission on Agricultural Mechanization या SMAM योजना है. इसका उद्देश्य किसानों को महंगी कृषि मशीनरी खरीदने में आर्थिक मदद देना और खेती में मशीनों का इस्तेमाल बढ़ाना है.
क्या-क्या उपकरण मिलता है?
इस स्कीम के तहत सरकार किसानों को ट्रैक्टर, पावर टिलर, रोटावेटर, सीड ड्रिल, रीपर, थ्रेशर, स्प्रेयर जैसे कृषि उपकरण खरीदने पर सब्सिडी देती है. यह योजना 2014-15 से चल रही है और अभी भी कृषि यंत्रीकरण के लिए प्रमुख सरकारी योजनाओं में है. जुलाई 2026 तक इसके तहत देशभर में व्यक्तिगत किसानों को 21.61 लाख कृषि मशीनें वितरित की जा चुकी थीं और ₹9,404.47 करोड़ की सहायता दी गई थी.
दो तरह की मिलती है सब्सिडी
कितनी मिलती है सब्सिडी?
अगर आपने कोई 6 लाख रुपये में ट्रैक्टर खरीदने के लिए चुना है तो सरकारी सब्सिडी के बाद इसकी कीमत घटकर 3 लाख रुपये हो सकती है, क्योंकि सरकार इसपर 50 फीसदी की सब्सिडी देती है.
किन मशीनों पर सब्सिडी मिल सकती है?
ट्रैक्टर, पावर टिलर, रोटावेटर, कल्टीवेटर, हैरो, सीड ड्रिल, जीरो-टिल सीड ड्रिल, मल्टी-क्रॉप प्लांटर, रीपर, रीपर-कम-बाइंडर, थ्रेशर, मल्टी-क्रॉप थ्रेशर, चाफ कटर, ब्रश कटर, पावर वीडर, स्प्रेयर, हार्वेस्टर, पोस्ट, हार्वेस्ट मशीनरी, बागवानी से जुड़ी मशीनें.
आवेदन कैसे करें?
कौन-कौन से दस्तावेज चाहिए?
आधार कार्ड, पासपोर्ट साइज फोटो, जमीन का रिकॉर्ड ऑफ राइट, बैंक पासबुक की कॉपी, एक एक्स्ट्रा आईडी प्रूफ और कॉस्ट सर्टिफिकेट आदि जैसे दस्तावेजों की आवश्यकता होती है.
आवेदन से पहले ये गलती न करें
पहले मशीन खरीद लेना और बाद में सब्सिडी के लिए आवेदन करना सही प्रक्रिया नहीं माननी चाहिए. सामान्य DBT वर्कफ्लो में पहले पोर्टल पर रजिस्ट्रेशन और मशीन के लिए आवेदन, फिर उपलब्ध डीलर का चयन और उसके बाद खरीद-बिल/मशीन का वेरिफिकेशन होता है.