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अब नहीं होगी यूरिया की कमी! सरकार ने किया रिकॉर्ड 2.5 मिलियन टन का आयात

विशेषज्ञों का मानना है कि इतनी बड़ी मात्रा में एक साथ खरीद से वैश्विक आपूर्ति और भी तंग हो सकती है, जिससे आने वाले समय में कीमतों में और बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है.

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2.5 मिलियन टन यूरिया का रिकॉर्ड आयात
2.5 मिलियन टन यूरिया का रिकॉर्ड आयात

भारत ने उर्वरक सुरक्षा को मजबूत करने के लिए एक बड़ा कदम उठाते हुए एक ही टेंडर में 2.5 मिलियन मीट्रिक टन यूरिया के आयात का फैसला किया है. यह अब तक का सबसे बड़ा एकल खरीद ऑर्डर माना जा रहा है, जो पिछले कुछ महीनों की तुलना में लगभग दोगुनी कीमत पर की गई है.

सरकारी सूत्रों के अनुसार, यह रिकॉर्ड आयात भारत के सालाना यूरिया आयात का करीब एक चौथाई हिस्सा है. इस बड़े ऑर्डर का असर सीधे तौर पर अंतरराष्ट्रीय बाजार पर पड़ने की संभावना है, जहां पहले से ही कीमतें ऊंची चल रही थीं.

जानकारी के मुताबिक, इस डील के तहत Indian Potash Limited (IPL) ने 1.5 मिलियन टन यूरिया पश्चिमी तट पर डिलीवरी के लिए 935 डॉलर प्रति टन की दर से खरीदा है. वहीं 1 मिलियन टन यूरिया पूर्वी तट पर डिलीवरी के लिए 959 डॉलर प्रति टन की कीमत पर लिया गया है.

विशेषज्ञों का कहना है कि यह कीमतें लगभग दो महीने पहले की तुलना में काफी अधिक हैं, जिससे साफ संकेत मिलता है कि वैश्विक सप्लाई चेन पर दबाव बढ़ गया है. इसका मुख्य कारण मध्य पूर्व में चल रहा तनाव और ईरान से जुड़े संघर्ष बताए जा रहे हैं, जिसने उर्वरक और ऊर्जा दोनों बाजारों को प्रभावित किया है.

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यूरिया की इतनी बड़ी मात्रा में एक साथ खरीद से अंतरराष्ट्रीय बाजार में सप्लाई और भी सीमित हो सकती है, जिससे अन्य देशों में भी कीमतें बढ़ने का खतरा है. भारत जैसे बड़े कृषि देश के लिए यह खरीद रणनीतिक रूप से जरूरी मानी जा रही है, क्योंकि खरीफ और रबी फसलों के लिए उर्वरक की स्थिर आपूर्ति बनाए रखना सरकार की प्राथमिकता है.

विशेषज्ञों का यह भी कहना है कि अगर वैश्विक तनाव लंबे समय तक बना रहता है, तो उर्वरक की कीमतों में और उछाल देखने को मिल सकता है, जिसका असर किसानों और खाद्य उत्पादन लागत पर भी पड़ सकता है.

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