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एग्री न्यूज़

किसानों के लिए पेंशन का काम करेगी इन पेड़ों की खेती, सोने के भाव बिकती है लकड़ी

Sandalwood Farmimg (Getty Image)
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पारंपरिक फसलों के अलावा किसान कई ऐसे पेड़-पौधों की खेती कर सकते हैं, जो लंबे समय में मुनाफे का सौदा साबित होती हैं. इन्ही में शामिल है अगरवुड और चंदन  की खेती. ये दोनों ही पेड़ किसानों के लिए लंबे समय का निवेश हैं, लेकिन इनसे मिलने वाला मुनाफा आम फसलों से कई गुना ज्यादा होता है. अगरवुड और चंदन की लड़की सोने की तरह महंगी होती है.

sandalwood and agarwood farming
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चंदन–अगरवुड दोनों की किसानों के लिए पेंशन के रूप में माने जाते हैं. चंदन का पेड़ 12 से 15 साल में मैच्योर हो जाता है. जबकि अगरवुड का पेड़ 8 साल में मैच्योर हो जाता है. सरकार भी इनकी खेती को बढ़ावा दे रही है, खासकर बजट 2026 में अगरवुड और चंदन पर खास ध्यान दिया गया है.

sandalwood and agarwood farming
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अगर 14-15 साल बाद 1 एकड़ में चंदन की सारी फसल को काटते हैं तो एक पेड़ से 1 से डेढ़ लाख का फायदा हो सकता है. ऐसे में अगर किसान हर साल 40 पेड़ काटे और उनके स्थान पर नया पेड़ लगा दें तो ऐसे में हर साल बढ़िया मुनाफा कमाया जा सकता है. अभी फिलहाल जंगलों में ये पेड़ लगाए जाते हैं लेकिन अगर खेतों में भी लगाए जाएं तो किसानों की अच्छी आमदनी हो सकती है.
 

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अगरवुड की लकड़ी
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अगरवुड को दुनिया की सबसे महंगी लकड़ी में से एक माना जाता है. इसे 'ब्लैक गोल्ड' भी कहते हैं. यह पेड़ प्राकृतिक रूप से उत्तर-पूर्वी राज्यों जैसे असम, अरुणाचल प्रदेश, नगालैंड आदि में पाया जाता है. पेड़ में फंगस (कवक) लगने से लकड़ी अंदर से काली और सुगंधित हो जाती है. 

Agarwood Farming
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अगरवुड को ऊद के नाम से भी जाना जाता है. इसकी सुगंधित लकड़ी और तेल का इस्तेमाल इत्र, धूपबत्ती, दवाइयों और सौंदर्य प्रसाधनों में होता है. एक किलो अच्छी क्वालिटी की अगरवुड की लकड़ी 50 हजार से लेकर 4 लाख रुपये या उससे भी ज्यादा में बिक सकती है. वहीं, इसके एक ग्राम तेल की कीमत 10 हजार रुपये तक बताई जाती है.

Sandal and Agarwood Farming
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 चंदन (सैंडलवुड) भी अपनी खुशबू और उपयोग के लिए प्रसिद्ध है. इसका इस्तेमाल इत्र, साबुन, दवाओं और पूजा सामग्री में होता है. सफेद चंदन की खेती अब उत्तर भारत के कई इलाकों में भी हो रही है. यह पेड़ अर्ध-परजीवी होता है, यानी यह दूसरे पौधों (जैसे आम, जामुन या महोगनी) से पोषण लेता है.

Wood farming (Getty Image)
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चंदन का पेड़ 12-15 साल में तैयार हो जाता है. एक पेड़ से 2 लाख रुपये तक की कमाई हो सकती है. वहीं, एक एकड़ में 300-400 पेड़ लगाए जा सकते हैं. अच्छी देखभाल से किसान बंपर मुनाफा कमा सकते हैं. 

चंदन की खेती (Getty Image)
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चंदन (सैंडलवुड) और अगरवुड की खेती में आम फसलों की तुलना में सालाना खर्च और मेहनत कम लगती है.अगरवुड और चंदन में एक बार पेड़ लगाने के बाद 7-15 साल तक ज्यादा देखभाल की जरूरत नहीं होती. वहीं, लंबे समय में रिटर्न 20-30 गुना तक हो सकता है.

Sandalwood and Agarwood farming (Photo-ITG)
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छोटे किसान भी 10-15 पेड़ लगाकर अच्छी कमाई कर सकते हैं. अगरवुड की खेती में 5-8 साल में ही अच्छा रिजल्ट मिल सकता है. बड़े स्तर पर चंदन और अगरवुड की खेती करने वाले किसान लंबी अवधि में लाखपति नहीं, बल्कि करोड़पति बन सकते हैं.

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Chandan and Agarwood ki kheti (Getty Image)
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बता दें कि बजट 2026 में अगरवुड को उत्तर-पूर्व में और चंदन को पूरे देश में बढ़ावा देने की घोषणा हुई है. सब्सिडी, तकनीकी मदद और प्रशिक्षण मिल रहा है. कई राज्यों में विशेष योजनाएं चल रही हैं.

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