पाकिस्तान के राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी ने स्वीकार किया है कि अफगानिस्तान द्वारा किए गए ड्रोन हमले में पाकिस्तान को नुकसान पहुंचा है. जरदारी ने तालिबान सरकार द्वारा पाकिस्तानी नागरिक इलाकों को निशाना बनाकर किए गए ड्रोन हमलों की कड़े शब्दों में निंदा की है.
राष्ट्रपति कार्यालय द्वारा जारी बयान में स्पष्ट कहा गया है कि तालिबान ने 'रेड लाइन' क्रॉस कर दी है और पाकिस्तान अपने नागरिकों की सुरक्षा के लिए हर संभव कदम उठाएगा.
दरअसल, गुरुवार रात और शुक्रवार तड़के पाकिस्तान ने अफगानिस्तान के कई इलाकों में एयर स्ट्राइक की थी जिसमें कुछ लोगों की मौत भी हुई थी. इसके बाद अफगानिस्तान की तरफ से फिर पलटवार किया है और शुक्रवार को अफगानिस्तान द्वारा बड़े पैमाने पर ड्रोन हमले किए गए जिससे पाकिस्तान के कई इलाकों में धमाके सुनाई दिए.
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विशेष रूप से इस्लामाबाद और रावलपिंडी को जोड़ने वाले सबसे संवेदनशील इलाके 'फैजाबाद' में ड्रोन स्ट्राइक के बाद भारी अफरा-तफरी का माहौल देखा गया. अफगान रक्षा बलों ने डूरंड लाइन के पूर्वी क्षेत्र में कुनार और नंगरहार प्रांतों के पूर्वी क्षेत्र में में अभियान चलाया. अफगानिस्तान ने दावा किया है कि अभियान के दौरान एक पाकिस्तानी सैन्य चौकी पर कब्ज़ा कर लिया गया, 14 सैनिक मारे गए और 11 अन्य घायल हो गए. इसके अलावा एक बख़्तरबंद टैंक और एक अंतरराष्ट्रीय वाहन पूरी तरह नष्ट कर दिए गए.
चश्मदीदों के मुताबिक, धमाकों की गूंज दूर तक सुनी गई और सुरक्षा बलों ने पूरे इलाके की घेराबंदी कर दी गई. एक तरफ जहां पाकिस्तान इसे रिहायशी इलाकों पर हमला बता रहा है, वहीं अफगान-तालिबान ने दावा किया है कि उनका निशाना इस्लामाबाद में स्थित पाकिस्तानी सेना का बेस "हमजा" था.
तालिबान का दावा है कि उन्होंने इस सैन्य ठिकाने को पूरी तरह तबाह कर दिया है. हालांकि, राष्ट्रपति जरदारी ने इन दावों को खारिज करते हुए कहा कि अफगान जमीन का इस्तेमाल पड़ोसी देशों के खिलाफ आतंकवाद के लिए नहीं होना चाहिए.
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क्षेत्रीय युद्ध का खतरा
इस्लामाबाद जैसे सुरक्षित शहर पर तालिबान के सीधे ड्रोन हमले ने दक्षिण एशिया में युद्ध के खतरे को बढ़ा दिया है. राष्ट्रपति जरदारी ने चेतावनी दी है कि पाकिस्तान अपने लोगों के खिलाफ किसी भी हमले को बर्दाश्त नहीं करेगा और अपनी रक्षा के लिए जवाबी कार्रवाई का अधिकार सुरक्षित रखता है.