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जिस होर्मुज के लिए लड़ रही दुनिया, कौन थे वहां के मूल निवासी? क्यों छोड़कर चले गए इलाका

पश्चिम एशिया में होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर ईरान और अमेरिका-इजरायल के बीच तनाव बढ़ गया है. ईरान ने इस महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग को बंद कर दिया है, जिससे वैश्विक व्यापार प्रभावित हो सकता है.

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स्ट्रेट ऑफ होर्मुज नाम इसी नाम एक द्वीपीय शहर से आया है, जहां 17वीं सदी तक पुर्तगाली भी रहे हैं.
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज नाम इसी नाम एक द्वीपीय शहर से आया है, जहां 17वीं सदी तक पुर्तगाली भी रहे हैं.

पश्चिम एशिया में तनाव जारी है. ईरान के साथ अमेरिका-इजरायल की जंग अब नए मोर्चे पर आ गई है. पहले ये जंग परमाणु के लिए थी और अब जंग का नया धुरा बन गया है स्ट्रेट ऑफ होर्मुज यानी होर्मुज जलडमरूमध्य. 

ईरान के पास से गुजरने वाले संकरे समुद्री रास्ते में जिस भौगोलिक संरचना की नेचुरल बनावट है, वह है जलडमरूमध्य जिसका नाम होर्मुज है. आज दुनिया भर के लिए मार्केट के लिए होर्मुज इसलिए अहम है, क्योंकि ये बड़े-बड़े मालवाहक जहाजों का रास्ता है. 

ईरान ने जंग के बीच रणनीति के तहत होर्मुज का रास्ता बंद कर दिया है. यहां टोल लगाने की बात कर रहा है. यहीं से जंग की दिशा बदल गई. अमेरिका ने धमकी दी है कि ईरान ने 48 घंटे में अगर होर्मुज का रास्ता नहीं खोला तो अंजाम बुरा होगा. 

होर्मुज में कौन रहता था?
सवाल उठता है कि जो होर्मुज आज लड़ाई का मुद्दा बना हुआ है, वहां के रहवासी कौन हैं. असली मूलनिवासी जो होर्मुज के ही रहे हैं और वो कहां हैं. आज के दौर में होर्मुज समुद्री रास्ता है, लेकिन असल में ये नाम इतिहास में गुम हो चुके एक द्वीपीय शहर से मिला है.  हॉर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) के आसपास के क्षेत्र के मूल निवासी को खोजें तो वे इतिहास में मिश्रित स्वरूप के मिलते हैं. 

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खास तौर पर 10वीं से 17वीं सदी के बीच यहां का प्रमुख राजनीतिक केंद्र 'हॉर्मुज का राज्य' था, जहां स्थानीय फ़ारसी (ईरानी) आबादी, अरब समुदाय और हिंद महासागर के समुद्री व्यापारियों का गहरा प्रभाव देखने को मिलता है.

कभी एक समृद्ध राज्य था होर्मुज
होर्मुज राज्य 10वीं से 17वीं सदी तक था. यह क्षेत्र होर्मुज के राज्य के अधीन था, जो समुद्री व्यापार का एक महत्वपूर्ण केंद्र (ट्रेड एम्पोरियम) बन गया था. इस राज्य का नियंत्रण फारस की खाड़ी के दोनों किनारों ईरान (फ़ारस) और अरब क्षेत्रों पर था. यहां के शासकों ने भारत, फ़ारस और अरब दुनिया के व्यापारियों के साथ ट्रेड नेटवर्क विकसित किया, जिससे यह क्षेत्र सांस्कृतिक रूप से काफी विविधता वाला बन गया था.

होर्मुज नाम की उत्पत्ति मिडिल फारसी (जोरास्ट्रियन) या स्थानीय फारसी शब्दों से मानी जाती है, जैसे 'हुर-मोग' (खजूरों की जगह). इससे इस क्षेत्र में फारसी प्रभाव का स्पष्ट संकेत मिलता है. साथ ही, समुद्री तटीय क्षेत्र होने के कारण यहां अरब से सांस्कृतिक और वंश परंपरा के संबंध भी मजबूत रहे.

फिर ट्रांसफर होने लगी आबादी
आगे चलकर मुख्य भूमि (जैसे कलहात और दक्षिणी फारस) पर हमलों और अस्थिरता के कारण आबादी धीरे-धीरे द्वीपों की ओर ट्रांसफर हुई. खासकर ये होर्मुज द्वीप की ओर बढ़े और उससे पहले केश्म और किश जैसे द्वीप भी शहरी केंद्र बनें. 

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ईरान के होर्मोजगान प्रांत का हिस्सा
लगभग 1515 से 1622 तक पुर्तगालियों ने होर्मुज द्वीप पर कब्जा किया. इस दौरान उन्होंने 'कार्टाज' नामक समुद्री कर (टोल) प्रणाली लागू की, जिससे क्षेत्रीय व्यापार पर उनका नियंत्रण स्थापित हुआ. आगे 1622 में फारस के शासक शाह अब्बास प्रथम ने पुर्तगालियों को होर्मुज से बाहर कर दिया. इसके बाद यह क्षेत्र पूरी तरह फारसी नियंत्रण में आ गया और धीरे-धीरे यहां की जनसंख्या मुख्यतः ईरानी (फारसी) हो गई. आज यह इलाका ईरान के होर्मोजगान प्रांत का हिस्सा है.

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