वेनेजुएला में अमेरिकी सैन्य कार्रवाई के ठीक एक दिन बाद राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पश्चिमी गोलार्ध में स्थित देशों को लेकर और ज्यादा आक्रामक रुख दिखाया है. ट्रंप के ताजा बयानों से साफ संकेत मिल रहा है कि निकोलस मादुरो को हटाने के बाद अमेरिका इस पूरे इलाके में अपनी ताकत और प्रभाव बढ़ाने के मूड में है.
ट्रंप ने एक बार फिर डेनमार्क के अधीन ग्रीनलैंड पर अमेरिकी नियंत्रण की मांग दोहराई. उन्होंने कहा कि ग्रीनलैंड इस समय अमेरिका की राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए बेहद अहम है, क्योंकि वहां रूसी और चीनी जहाजों की गतिविधि बढ़ रही है. ट्रंप का दावा है कि डेनमार्क ग्रीनलैंड की सुरक्षा ठीक से नहीं कर पा रहा है. फ्लोरिडा से वॉशिंगटन लौटते समय ट्रंप ने कहा कि ग्रीनलैंड रणनीतिक रूप से इतना जरूरी है कि अमेरिका इसे नजरअंदाज नहीं कर सकता.
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इतना ही नहीं, ट्रंप ने कोलंबिया को लेकर भी सख्त चेतावनी दी. उन्होंने आरोप लगाया कि कोलंबिया वैश्विक कोकीन कारोबार में बड़ी भूमिका निभा रहा है और अगर हालात नहीं बदले, तो अमेरिका सैन्य कार्रवाई पर भी विचार कर सकता है. वहीं, अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने कहा कि क्यूबा की कम्युनिस्ट सरकार इस समय "गंभीर मुश्किलों" में है, जिससे यह संकेत मिलता है कि अमेरिका वहां भी दबाव बढ़ा सकता है.
वेनेजुएला के बाद अब अगला निशाना कौन?
इन बयानों से दोस्त और विरोधी, दोनों ही देशों में बेचैनी बढ़ गई है. अंतरराष्ट्रीय स्तर पर यह सवाल उठने लगा है कि वेनेजुएला के बाद अब अमेरिका का अगला निशाना कौन सा देश होगा. ट्रंप ने एक इंटरव्यू में साफ कहा कि वेनेजुएला में की गई कार्रवाई से ग्रीनलैंड को खुद समझ जाना चाहिए कि अमेरिका क्या संदेश देना चाहता है.
ट्रंप की यह सोच उनकी हालिया नेशनल सिक्योरिटी स्ट्रैटेजी में भी दिखती है. इसमें उन्होंने पश्चिमी गोलार्ध में "अमेरिकी वर्चस्व की बहाली" को अहम लक्ष्य बताया है. ट्रंप ने 19वीं सदी की मुनरो डॉक्ट्रिन और रूजवेल्ट कोरोलरी का भी जिक्र किया, जिनके जरिए अमेरिका पहले भी इस क्षेत्र में अपना प्रभाव बढ़ाता रहा है.
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ग्रीनलैंड बिक्री के लिए नहीं- प्रधानमंत्री मेटे फ्रेडरिक्सन
ग्रीनलैंड को लेकर ट्रंप के बयानों से डेनमार्क में खास चिंता है. डेनमार्क की प्रधानमंत्री मेटे फ्रेडरिक्सन ने साफ कहा कि ग्रीनलैंड बिक्री के लिए नहीं है और अमेरिका को उस पर कब्जा करने का कोई अधिकार नहीं है. उन्होंने यह भी याद दिलाया कि डेनमार्क पहले से ही नाटो सहयोगी के तौर पर अमेरिका को ग्रीनलैंड में सुरक्षा से जुड़ी सुविधाएं देता रहा है.
इस बीच डेनमार्क ने यूरोपीय संघ के उस बयान का समर्थन किया है, जिसमें कहा गया है कि वेनेजुएला के भविष्य का फैसला वहां की जनता को ही करना चाहिए. यह बयान ऐसे समय आया है जब ट्रंप खुले तौर पर कह रहे हैं कि अमेरिका कुछ समय तक वेनेजुएला को चलाने में भूमिका निभाएगा. इसी वजह से ट्रंप की नीति पर अब अंतरराष्ट्रीय कानून और वैश्विक संतुलन को लेकर गंभीर सवाल उठने लगे हैं.