वेनेजुएला में अमेरिका की हालिया सैन्य कार्रवाई के बाद दुनिया भर में तनाव बढ़ गया है. इस कदम को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तीखी प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं और माना जा रहा है कि वैश्विक संघर्ष का दायरा अब लैटिन अमेरिका तक फैल गया है. अमेरिका का कहना है कि यह कदम नार्को-आतंकवाद के खिलाफ उठाया गया है, लेकिन राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने वेनेजुएला पर अमेरिकी तेल हितों को चुराने का आरोप लगाया है उन्होंने यह भी कहा है कि अमेरिका कुछ समय के लिए देश को अपने नियंत्रण में लेकर उसके तेल संसाधनों का इस्तेमाल करेगा.
दुनिया में बढ़े युद्ध, बढ़ती मौतें
इस कार्रवाई को लेकर दुनिया भर के देशों की राय बंटी हुई है, जो साफ तौर पर दर्शाता है कि वैश्विक राजनीति पहले से ही गहरे मतभेदों और तनावों से जूझ रही है. ACLED के अनुसार, 2025 में यूरोप, मध्य पूर्व और एशिया में संघर्षों की संख्या बढ़ी है. कई देशों ने अपने पड़ोसी देशों और डोमेस्टिक आर्म्ड ग्रुप्स के खिलाफ हवाई हमले और ड्रोन हमलों का सहारा लिया.वहीं, अफ्रीका और लैटिन अमेरिका में सशस्त्र समूह लगातार सरकारों को चुनौती देते रहे.
क्या कहते हैं अध्ययन
ACLED (Armed Conflict Location and Event Data) के अनुसार, वैश्विक स्तर पर सबसे ज्यादा संघर्ष यूरोप, मिडिल ईस्ट और एशिया में हुए हैं. इन संघर्षों में देशों ने अपने पड़ोसी देश को नुकसान पहुंचाया और उनपर ड्रोन आदि हथियारों से हमले किए. इस बीच कई देशों ने अपने डिफेंस बजट को भी बढ़ाया. इसके अलावा अफ्रीका और लेटिन अमेरिका में राज्य स्तर पर भी कई युद्ध हुए.
ग्लोबल चेंज का डेटा बताता है कि संघर्षों में होने वाली मौतों की संख्या इस बात पर ज़्यादा निर्भर नहीं करती कि कितने युद्ध चल रहे हैं, बल्कि इस पर निर्भर करती है कि वे युद्ध कितने ज़्यादा हिंसक और घातक हो गए. हालांकि 2000 के दशक के ज़्यादातर समय में युद्धों में होने वाली मौतों की संख्या तेज़ी से कम हो रही थी, लेकिन 2010 के दशक के बीच में हालात बदल हुए नजर आए.
डेटा से पता चलता है कि 2014 में युद्धों की वजह से मरने वालों की संख्या 1 लाख के पार थी. 2022 में यह आंकड़ा करीब 2.77 लाख के उच्च स्तर पर पहुंच गया, जिसका मुख्य कारण रूस-यूक्रेन युद्ध रहा. हालांकि 2023 और 2024 में मौतों की संख्या में कमी आई, लेकिन दुनिया भर में सक्रिय संघर्षों की संख्या बढ़कर 61 हो गई. यह दिखाता है कि वैश्विक स्तर पर टकराव अब ज्यादा बंटा हुआ और लंबे समय तक चलने वाला बनता जा रहा है.
कोई कर रहा समर्थन तो कोई विरोध में
इस माहौल में वेनेजुएला को लेकर अमेरिका की कार्रवाई ने देशों के बीच मतभेद और बढ़ा दिए हैं. अर्जेंटीना और चिली जैसे कुछ देशों ने अमेरिका का समर्थन किया है. उनका कहना है कि यह कदम अपराधी गिरोहों को खत्म करने और लोकतंत्र को मजबूत करने के लिए जरूरी है. इजरायल और कनाडा ने भी अमेरिका के फैसले का साथ दिया है.
दूसरी तरफ चीन और रूस ने इस कार्रवाई का कड़ा विरोध किया है. इन देशों का कहना है कि इससे वेनेजुएला की संप्रभुता का उल्लंघन हुआ है और अंतरराष्ट्रीय कानून टूटता है. ईरान, क्यूबा, ब्राजील और कोलंबिया ने भी चिंता जताते हुए कहा है कि ऐसे कदम दुनिया में अस्थिरता को और बढ़ा सकते हैं. लैटिन अमेरिका और अफ्रीका के कई देशों का मानना है कि किसी एक देश की तरफ से की गई कार्रवाई खतरनाक होती है और बातचीत ही इस समस्या का सही रास्ता है. इस मामले पर संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की आपात बैठक होने की संभावना है.