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क्रिटिकल मिनरल्स पर किसी एक देश का दबदबा नहीं चाहता US, भारत के साथ ट्रेड डील पर अमेरिकी प्रवक्ता का बयान

अमेरिकी विदेश मंत्रालय की हिंदी प्रवक्ता मार्ग्रेट मैक्लॉड ने भारत-अमेरिका के बीच हुए ट्रेड डील और क्रिटिकल मिनरल्स से जुड़ी चीजों पर आजतक के साथ बातचीत की है. उन्होंने कहा कि रेयर अर्थ मिनरल्स का नियंत्रण कई देशों के हाथों में सेंट्रलाइज्ड है, जिससे अमेरिका सप्लाई चेन को विविध और मजबूत बनाने का प्रयास कर रहा है.

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अमेरिकी प्रवक्ता बोलीं क्रिटिकल मिनरल्स पर एकाधिकार नहीं चाहता अमेरिका (Photo: ITG/ @Pranay Upadhyay)
अमेरिकी प्रवक्ता बोलीं क्रिटिकल मिनरल्स पर एकाधिकार नहीं चाहता अमेरिका (Photo: ITG/ @Pranay Upadhyay)

अमेरिकी विदेश मंत्रालय की हिंदी भाषी प्रवक्ता मार्गरेट मैक्लॉड ने भारत-अमेरिका ट्रेड डील और क्रिटिकल मिनरल्स से जुड़ी महत्वपूर्ण बातें शेयर की हैं. उन्होंने कहा कि आज दुनिया में दुर्लभ खनिजों पर एक देश का व्यापक नियंत्रण देखा गया है, जो मोबाइल फोन, आधुनिक हथियारों और उच्च तकनीक के उत्पादन के लिए बहुत जरूरी है.

मैक्लॉड के अनुसार, अमेरिका ऐसी स्थिति नहीं चाहता जहां क्रिटिकल मिनरल्स की सप्लाई किसी एक देश के हाथ में सिमट जाए. इसलिए अमेरिका अपने सहयोगी देशों के साथ मिलकर सप्लाई चेन को विविध और मजबूत बनाने की दिशा में काम कर रहा है. उनका कहना है कि सभी देशों की क्षमताओं का समन्वय कर एक भरोसेमंद और स्थिर सप्लाई चेन बनाए जाने की आवश्यकता है.

उन्होंने बताया कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के निर्देश पर अमेरिका एक खास कोष बनाने की योजना बना रहा है. इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि क्रिटिकल मिनरल्स की सप्लाई किसी एक देश पर निर्भर न हो और वैश्विक स्तर पर संतुलन बना रहे.

यह भी पढ़ें: क्या भारत रूस से तेल खरीदना बंद कर देगा? डोनाल्ड ट्रंप के दावे पर आया MEA का जवाब

पाकिस्तान से जुड़े सवाल पर मैक्लॉड ने कहा कि उन्हें किस स्तर पर प्रतिनिधित्व देना है, यह निर्णय वहां की सरकार का है. उन्होंने साफ किया कि अमेरिका घरेलू उत्पादन बढ़ाने के साथ-साथ वैश्विक साझेदारों के साथ सहयोग को भी समान महत्व देता है.

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भारत-अमेरिका व्यापार समझौते पर बात करते हुए उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति ट्रंप और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सीधी बातचीत के बाद यह महत्वपूर्ण निर्णय लिया गया है. मैक्लॉड ने उम्मीद जताई कि जल्द ही इस समझौते की औपचारिक प्रक्रिया पूरी कर इसे लागू कर दिया जाएगा, जो दोनों देशों के रिश्तों को नई मजबूती और रणनीतिक सहयोग के नए रास्ते खोलेगा.

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