इस वक्त पूरी दुनिया की नजर ईरान पर टिकी हुई है. अमेरिका और ईरान युद्ध के मुहाने पर खड़े हैं. सिर्फ एक चिंगारी और एक ऐसा युद्ध शुरू हो सकता है, जिसका असर निश्चित रूप से पूरी दुनिया पर पड़ेगा. अभी तक ईरान में सरकार विरोधी प्रदर्शनों को महंगाई के खिलाफ लोगों के गुस्से के तौर पर देखा जा रहा था. लेकिन अमेरिका की एंट्री ने इस प्रदर्शन को ईरान वर्सेज अमेरिका बना दिया है.
हालात ये हैं कि किसी भी वक्त अमेरिका, ईरान पर बमबारी शुरू कर सकता है ऐसे में ईरान के लिए हर रात भारी पड़ रही है. अमेरिका का ये रुख, प्रदर्शनकारियों के खिलाफ ईरान सरकार की सख्ती को लेकर है. इतिहास गवाह है कि जब भी ईरान की इस्लामिक व्यवस्था या उससे जुड़े कट्टरपंथी नियमों के खिलाफ आवाज़ें उठी हैं, तो इन आवाज़ों को ईरान ने बंदूकों के दम पर दबाया है.
साल 2022 में जब हिजाब के मामले में महसा अमीनी की मौत ने लोगों का गुस्सा भड़काया था, तब के प्रदर्शनों में करीब 500 लोग मारे गए थे. और अबकी बार महंगाई और बेरोज़गारी जैसे मुद्दों पर हो रहे Gen-Z आंदोलन में अभी तक 544 लोग मारे जा चुके हैं. Human Rights Activists News Agency का दावा है कि इस आंदोलन में अब तक 496 प्रदर्शनकारी और 48 सुरक्षाकर्मी मारे गए हैं. यही नहीं, 10 हजार से ज्यादा प्रदर्शनकारियों को ईरान ने हिरासत में रखा है. ईरान ने अपने यहां होने वाले विरोध प्रदर्शनों को अमेरिका और इज़रायल की साज़िश बताया है. और अब तो वह अपने ही देश के प्रदर्शनकारी नागरिकों को आतंकवादी कहने लगा है.
प्रदर्शनकारियों को कहा- आतंकी
ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने विरोध प्रदर्शन करने वालों को आतंकवादी माना है. उनका कहना है कि प्रदर्शन कर रहे आतंकी सरकारी और प्राइवेट संपत्ति को नुकसान पहुंचा रहे हैं और ये लोग ईरान के सुरक्षाबलों और आम लोगों को भी टारगेट कर रहे हैं. उनका दावा है कि ईरान सरकार के पास ऐसे कई वीडियो हैं, जिनमें दिख रहा है कि प्रदर्शनकारियों को हथियार बांटे गए और हथियारों के जरिए ईरान को गृहयुद्ध में झोंकने की साज़िश की गई. उन्होंने सोशल मीडिया पर इससे जुड़े वीडियो भी शेयर किए हैं, जिनमें प्रदर्शनकारियों और सुरक्षाकर्मियों के बीच झड़प हो रही है.
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ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान भी कह रहे हैं कि ईरान में दंगे भड़काने के पीछे अमेरिका और इज़रायल का हाथ है. उनका आरोप है कि अमेरिका और इज़रायल ईरान में अराजकता फैला रहे हैं. उन्होंने प्रदर्शन करने वाले ईरानी नागरिकों को चेतावनी दी है कि वे बातचीत की टेबल पर आएं, क्योंकि ईरान सरकार दंगाइयों को बर्दाश्त नहीं करेगी. इन बयानबाज़ियों के बीच ईरान की संसद का एक वीडियो वायरल है, जिसमें सदन के अंदर ईरान के नेता अमेरिका के विरोध में नारे लगा रहे हैं. यह प्रतिक्रिया अमेरिका के उस रुख पर आई, जिसमें कहा जा रहा था कि अमेरिका कभी भी ईरान पर बमबारी कर सकता है. ईरान की संसद में “Death To America” के नारे लगाए गए.
ईरान में हो रहे प्रदर्शन अमेरिका के लिए एक सुनहरा मौका हैं. वह Gen-Z आंदोलन के बहाने ईरान की मौजूदा राजनीतिक सत्ता को पलटने की कोशिश में लगा हुआ है. 28 दिसंबर से चल रहे इस आंदोलन को अमेरिकी राष्ट्रपति का समर्थन मिला है. वे प्रदर्शनकारियों को पूरी मदद का भरोसा दे रहे हैं.
मौके की तलाश में अमेरिका
ऐसा माना जा रहा है कि अमेरिका अब एक मौके की तलाश में है. वह ईरान पर हमला करने की रणनीति तैयार कर चुका है. ये खबरें एक खास मीटिंग के बाद सामने आई हैं, जिसमें ट्रंप को ईरान पर हमले के तरीकों से जुड़ी ब्रीफिंग दी गई थी. न्यूयॉर्क टाइम्स की एक रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिकी अधिकारियों ने राष्ट्रपति ट्रंप को ईरान पर संभावित हमलों से जुड़े रणनीतिक विकल्प बताए हैं. ऐसा माना जा रहा है कि अब डोनाल्ड ट्रंप को फैसला करना है कि ईरान पर हमला कब और किस तरह से किया जाए. यानी अमेरिकी सेना तैयार है और बटन डोनाल्ड ट्रंप के हाथों में है.
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अभी दो दिन पहले डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के Gen-Z आंदोलन को लेकर Truth Social पर युद्ध से जुड़ा एक बड़ा संकेत दिया था. उन्होंने लिखा था कि ईरान आज़ादी की ओर देख रहा है और अमेरिका उसकी मदद करने के लिए तैयार है. ट्रंप के इसी ट्वीट ने ईरान को भड़का दिया और अब दोनों देश खुलकर एक-दूसरे पर हमले की चेतावनियां दे रहे हैं. एक प्रेस ब्रीफिंग में डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि ईरान ने अपनी सारी हदें पार कर दी हैं. प्रदर्शनकारियों के मारे जाने के मुद्दे पर उन्होंने कहा कि जिन लोगों को नहीं मारा जाना चाहिए था, वे मारे गए हैं. ट्रंप ने ईरान को साफ शब्दों में धमकी दी कि ईरान के नेता हिंसा के दम पर शासन चला रहे हैं और अमेरिकी सेना हालात पर बहुत गंभीरता से नजर रखे हुए है.
ईरान पर अमेरिका के हमले की योजना को लेकर ट्रंप के करीबी और यूएस सीनेटर लिंडसे ग्राहम ने भी बड़ा संकेत दिया है. उन्होंने कहा कि डोनाल्ड ट्रंप बराक ओबामा नहीं हैं और ईरान के लोगों को जल्दी ही आज़ादी मिलने वाली है.