
ईरान इस समय गहरे आर्थिक संकट और राजनीतिक उथल-पुथल से गुजर रहा है. इस बीच यूरोप में ईरान की करेंसी रियाल की कीमत शून्य हो चुकी है. इससे यूरोपीय देशों में ईरानी रियाल एक्सचेंज नहीं किया जा सकेगा. देश के भीतर हालात इतने खराब हो गए हैं कि स्थानीय लोग अपनी बुनियादी जरूरतों का सामान तक नहीं खरीद पा रहे हैं. इसी आर्थिक गिरावट के खिलाफ ईरान में बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं, जहां अब शासन में बदलाव की मांग उठ रही है.
इन प्रदर्शनों की शुरुआत 28 दिसंबर को हुई थी. सबसे पहले कारोबारियों ने गिरती अर्थव्यवस्था, तेजी से बढ़ती महंगाई और रियाल की गिरती कीमत के खिलाफ प्रदर्शन किया. रियाल की हालत यह है कि भारतीय मुद्रा के मुकाबले इसकी कीमत 0.000091 पैसे रह गई है. वहीं अमेरिकी डॉलर के मुकाबले ईरानी रियाल 0.0000010 सेंट पर आ गया है. हालांकि, इसकी कीमत यूरो के मुकाबले शून्य हो गई है. इसका मतलब है कि अब यूरोप के 27 देशों में ईरानी रियाल नहीं चलेगा.

ईरान की करेंसी रियाल की कीमत शून्य हुई
कुछ ही दिनों में यह विरोध प्रदर्शन आर्थिक मुद्दों से आगे बढ़कर राजनीतिक आंदोलन में बदल गया. प्रदर्शनकारियों ने 1979 की इस्लामिक क्रांति के बाद से देश पर शासन कर रही धार्मिक व्यवस्था को खुली चुनौती दी. शनिवार देर रात तेहरान में भारी सुरक्षा व्यवस्था और इंटरनेट बंदी के बावजूद हजारों लोग सड़कों पर उतरे और सरकार विरोधी नारे लगाए.

कार्यकर्ताओं का दावा है कि यह पिछले तीन वर्षों में ईरान का सबसे बड़ा जन आंदोलन है. ईरान के बाहर भी इसका असर देखा जा रहा है. 11 जनवरी 2026 को अमेरिका के लॉस एंजेलिस में फ्री ईरान रैली आयोजित की गई, जिसमें बड़ी संख्या में लोगों ने हिस्सा लिया. इन प्रदर्शनों की तस्वीरें अंतरराष्ट्रीय मीडिया में सामने आई हैं.

स्थानीय लोग जरूरत का सामान तक नहीं खरीद पा रहे हैं
प्रदर्शन अब दूसरे हफ्ते में प्रवेश कर चुके हैं. इस दौरान सुरक्षा बलों की सख्ती भी बढ़ी है. मानवाधिकार संगठनों का कहना है कि अब तक कम से कम 544 लोगों की मौत हो चुकी है, जिनमें ज्यादातर प्रदर्शनकारी हैं. हालांकि देश से बाहर आ रही जानकारी पर कड़े प्रतिबंधों के कारण इन आंकड़ों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है. इन घटनाओं के बाद अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तीखी प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं और तेहरान और वॉशिंगटन के बीच तनाव और बढ़ गया है.