अमेरिका में बढ़ते राजनीतिक और आर्थिक तनाव के बीच एक नया ट्रेंड तेजी से उभर रहा है. अमेरिकी नागरिक अब बैकअप प्लान के तौर पर कनाडाई नागरिकता हासिल करने की कोशिश कर रहे हैं. यूएस में अस्थिर माहौल, चुनावी ध्रुवीकरण और भविष्य को लेकर अनिश्चितता ने बड़ी संख्या में लोगों को विकल्प तलाशने पर मजबूर किया है. ऐसे में पड़ोसी देश कनाडा उनके लिए सबसे आसान और सुरक्षित विकल्प बनकर उभरा है.
इस ट्रेंड को सबसे बड़ा बल कनाडा के हालिया नागरिकता कानून में बदलाव से मिला है. 2025 के अंत में लागू हुए संशोधनों (Bill C-3) ने दशकों पुराने “फर्स्ट जेनरेशन लिमिट” को खत्म कर दिया. यह वही नियम था, जो 2009 से लागू था और जिसके तहत विदेश में जन्मे कनाडाई नागरिकों के बच्चों को केवल एक पीढ़ी तक ही नागरिकता मिल सकती थी. इस प्रावधान की लंबे समय से आलोचना हो रही थी और 2023 में ओंटारियो सुपीरियर कोर्ट ऑफ जस्टिस ने इसे असंवैधानिक करार दे दिया.
इसके बाद कानून में बदलाव करते हुए नागरिकता का दायरा कई पीढ़ियों तक बढ़ा दिया गया. नए नियमों के तहत 15 दिसंबर 2025 से पहले जन्मे वे लोग, जो किसी कनाडाई नागरिक के वंशज हैं, अब स्वतः ही नागरिक माने जा सकते हैं. उन्हें लंबी इमिग्रेशन प्रक्रिया से गुजरने की जरूरत नहीं, बल्कि आवेदन और दस्तावेज़ के जरिए वे सीधे कनाडाई पासपोर्ट के पात्र बन जाते हैं.
इस बदलाव का सबसे बड़ा असर उन लोगों पर पड़ा जिन्हें “Lost Canadians” कहा जाता था यानी वे लोग जो तकनीकी नियमों की वजह से अपने ही अधिकार से वंचित रह गए थे. अब ऐसे लोग, जिनमें बड़ी संख्या अमेरिकी नागरिकों की है, अचानक नागरिकता के पात्र बन गए हैं. यही वजह है कि हाल के महीनों में अमेरिकियों के बीच कनाडाई नागरिकता लेने की होड़ देखी जा रही है.
कई अमेरिकी इसे सिर्फ बेहतर अवसर के रूप में नहीं, बल्कि एक “exit plan” यानी जरूरत पड़ने पर देश छोड़ने के सुरक्षित विकल्प के तौर पर देख रहे हैं. कुछ लोगों का मानना है कि अगर यूएस में हालात और बिगड़ते हैं, तो वे आसानी से कनाडा शिफ्ट हो सकते हैं. न्यूयॉर्क की रहने वाली एलेन रोबिलार्ड जैसे कई लोग खुलकर कह चुके हैं कि वे भविष्य की अनिश्चितताओं को देखते हुए यह विकल्प तैयार रखना चाहते हैं. वहीं कुछ लोगों ने सुरक्षा और सामाजिक माहौल को लेकर भी चिंता जताई है.
लेकिन इसी बीच इस पूरे ट्रेंड पर ब्रेक लगाने की कोशिश भी शुरू हो गई है. अमेरिका में 'Exclusive Citizenship Act' नाम से एक नया विधेयक पेश किया है, जिसे ट्रंप के समर्थक खेमे का समर्थन माना जा रहा है. इस प्रस्ताव का मकसद अमेरिकी नागरिकों के लिए दोहरी नागरिकता खत्म करना और 'एक देश-एक निष्ठा' की नीति लागू करना है.
इस प्रस्ताव के पीछे तीन बड़े तर्क दिए जा रहे हैं. पहला, राष्ट्रीय निष्ठा-समर्थकों का कहना है कि एक नागरिक को केवल अमेरिका के प्रति पूरी वफादारी रखनी चाहिए. दूसरा, राष्ट्रीय पहचान-उनका मानना है कि अमेरिकी नागरिकता सिर्फ कानूनी दर्जा नहीं, बल्कि एक विशेष प्रतिबद्धता है. और तीसरा, हितों के टकराव को रोकना-क्योंकि दोहरी नागरिकता रखने वाले लोग दो देशों के बीच फंस सकते हैं, खासकर विदेश नीति या सुरक्षा मामलों में.
अगर यह कानून संयुक्त राज्य कांग्रेस से पास हो जाता है, तो इसका सीधा असर उन अमेरिकियों पर पड़ेगा जो कनाडाई नागरिकता लेना चाहते हैं. उन्हें मजबूरन एक विकल्प चुनना होगा, या तो अमेरिकी नागरिकता और पासपोर्ट रखें, या फिर कनाडाई नागरिकता अपनाएं. दोनों एक साथ रखना संभव नहीं होगा. यहां तक कि जिन लोगों के पास पहले से दोहरी नागरिकता है, उन्हें भी तय समयसीमा के भीतर अपनी एक नागरिकता छोड़नी पड़ सकती है.
यह संभावित बदलाव इसलिए भी बड़ा है, क्योंकि अब तक अमेरिका उन देशों में रहा है जो दोहरी नागरिकता की अनुमति देते हैं. दशकों से अमेरिकी नागरिक बिना अपनी मूल नागरिकता छोड़े दूसरी नागरिकता रखते आए हैं. लेकिन अगर यह प्रस्ताव कानून बनता है, तो अमेरिका उन देशों की सूची में शामिल हो सकता है जो दोहरी नागरिकता को मान्यता नहीं देते. जैसे-भारत, चीन, जापान, सऊदी अरब और सिंगापुर.
हालांकि, वैश्विक स्तर पर भी तस्वीर पूरी तरह एक जैसी नहीं है. कई देश दोहरी नागरिकता को आधिकारिक तौर पर नहीं मानते, लेकिन व्यवहार में कुछ छूट दे देते हैं. जैसे भारत OCI(Overseas Citizen of India) के जरिए सीमित अधिकार देता है, जबकि कुछ देशों में नियमों का पालन सख्ती से नहीं किया जाता.
फिलहाल स्थिति यह है कि कनाडा के नए कानून के तहत पात्र अमेरिकी नागरिक नागरिकता और पासपोर्ट हासिल कर सकते हैं और दोहरी नागरिकता का लाभ उठा सकते हैं. लेकिन अगर अमेरिकी कानून में सख्ती आती है, तो यही लोग भविष्य में एक मुश्किल फैसले के सामने खड़े होंगे. उन्हें तय करना होगा कि वे अमेरिकी बने रहना चाहते हैं या कनाडाई.
हालांकि फिलहाल यह प्रस्ताव शुरुआती चरण में है और इसे संयुक्त राज्य कांग्रेस से मंजूरी मिलनी बाकी है. विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के कानून को पास कराना आसान नहीं होगा, क्योंकि यह व्यक्तिगत स्वतंत्रता और संवैधानिक अधिकारों से जुड़ा संवेदनशील मुद्दा है. फिर भी, इस प्रस्ताव ने एक बहस जरूर छेड़ दी है कि क्या नागरिकों को दूसरे देश की नागरिकता लेकर खुद के लिए विकल्प सुरक्षित रखने का अधिकार होना चाहिए, या इसे सीमित किया जाना चाहिए.
कुल मिलाकर, एक तरफ कनाडा नागरिकता के दरवाजे खोलकर नए अवसर दे रहा है, वहीं अमेरिका उन दरवाजों से बाहर निकलने के रास्ते को सीमित करने की तैयारी में दिख रहा है.