डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया है कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में बिछाई गई बारूदी सुरंगों को हटाने के लिए अमेरिका स्पेशल इक्विपमेंट भेज रहा है. एक फोन इंटरव्यू में उन्होंने कहा कि अमेरिकी टीम अत्याधुनिक माइन रिमूवल इक्विपमेंट के साथ मौके की ओर बढ़ रही है. ट्रंप ने बताया कि अमेरिका के पास दुनिया के सबसे बेहतरीन माइन हटाने वाले इक्विपमेंट हैं और उन्हें यह पूरी जानकारी है कि सुरंगें कहां लगाई गई हैं. उन्होंने कहा, 'हम जानते हैं कि ये कहां हैं और हम अपने इक्विपमेंट वहां पहुंचा रहे हैं.'
जब उनसे यह पूछा गया कि क्या यह खुफिया जानकारी सही है कि ईरान को खुद नहीं पता कि सुरंगें कहां बिछाई गई हैं, तो इस पर ट्रंप ने कहा, 'मुझे नहीं पता.' हालांकि उन्होंने दोहराया कि अमेरिकी एजेंसियों को सुरंगों की सटीक लोकेशन की जानकारी है और उसी आधार पर कार्रवाई की जा रही है. ट्रंप के इस बयान के बाद क्षेत्र में तनाव और बढ़ने की आशंका जताई जा रही है, क्योंकि यह मामला अंतरराष्ट्रीय समुद्री सुरक्षा से जुड़ा हुआ है.
वार्ता के बीच डोनाल्ड ट्रंप ने बयान देते हुए कहा कि बातचीत की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है. साथ ही उन्होंने अमेरिकी तेल भंडार की सराहना करते हुए संकेत दिया कि अगर स्ट्रेट ऑफ होर्मुज बंद भी हो जाता है, तब भी अमेरिका के पास ऊर्जा संसाधनों की कोई कमी नहीं होगी. इस्लामाबाद में वार्ता के बीच पाकिस्तानी अधिकारी अलग-अलग अमेरिकी और ईरानी प्रतिनिधिमंडलों से मुलाकात कर संदेशों का आदान-प्रदान कर रहे हैं. प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ की जेडी वेंस से मुलाकात भी हो चुकी है.
क्या है इरान की मांग?
ईरान की मांग है कि इजरायल लेबनान में सैन्य कार्रवाई बंद करे और वहां युद्धविराम लागू हो. साथ ही ईरान की टीम हिजबुल्लाह से भी संपर्क में है. दूसरी अहम शर्त यह है कि कतर और अन्य देशों के बैंकों में जमा ईरान की वह राशि, जिसे अमेरिका ने रोका हुआ है, उसे पहले जारी किया जाए. इसके अलावा स्ट्रेट ऑफ होर्मुज की स्थिति, युद्ध से जुड़े मुआवजे और पूरे मध्य पूर्व में सीजफायर भी ईरान की शर्तों में शामिल हैं.
अमेरिका ने क्या कहा?
दूसरी तरफ, व्हाइट हाउस ने साफ कर दिया है कि अमेरिकी रुख में कोई बदलाव नहीं होगा. अमेरिका ईरान की जमी हुई रकम को जारी करने के पक्ष में नहीं है, जो कि तेहरान की प्रमुख मांगों में से एक है. ऐसे में दोनों देशों की शर्तें एक-दूसरे के बिल्कुल विपरीत हैं. देखते हैं इस बातचीत का क्या हल निकलता है?
अमेरिकी सेना ने बताया कि बारूदी सुरंगें हटाने के काम से पहले, दो डिस्ट्रॉयर ईरान के नियंत्रण वाले स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से गुजरे. युद्ध शुरू होने के बाद ऐसा पहली बार हुआ है. हालांकि, ईरान के सरकारी मीडिया ने इससे पहले कहा था कि ईरान ने अमेरिकी सेना के एक जहाज को वापस लौटने पर मजबूर कर दिया था.