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सीजफायर के बीच महायुद्ध की आहट: ट्रंप की ईरान को खुली चेतावनी- डील करो, वरना तबाही तय

शायद ही कोई दिन ऐसा गुजरता हो जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ईरान को लेकर सख्त बयान ना देते हों, लेकिन अब उनके सुर ज्यादा तीखे हो गए हैं. इशारों में नहीं, बल्कि सीधे शब्दों में ट्रंप ने संकेत दे दिए हैं कि यदि डील नहीं हुई तो ईरान पर दोबारा हमले शुरू हो सकते हैं.

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युद्धविराम के बाद कूटनीति तेज, ईरान का नया फॉर्मूला, US ने उठाए सवाल. (File Photo: ITG)
युद्धविराम के बाद कूटनीति तेज, ईरान का नया फॉर्मूला, US ने उठाए सवाल. (File Photo: ITG)

अमेरिका और ईरान के बीच सीजफायर के बावजूद तनाव कम नहीं हो रहा है. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने साफ कहा है कि यदि डील नहीं हुई तो ईरान पर फिर हमले हो सकते हैं. परमाणु कार्यक्रम, होर्मुज नाकाबंदी और सुरक्षा गारंटी जैसे मुद्दों पर गतिरोध कायम है, जिससे महायुद्ध की आशंका फिर बढ़ गई है.

इसी बीच ईरान के विदेश मंत्री अराघची ने अपने ओमानी समकक्ष अलबुसैदी के साथ फोन पर बातचीत की है. इस दौरान उन्होंने ताजा घटनाक्रमों पर चर्चा की है. अराघची ने उन्हें ईरान के उन कूटनीतिक प्रयासों के बारे में भी जानकारी दी, जिनका उद्देश्य अमेरिका-इजरायल युद्ध समाप्त करके क्षेत्रीय शांति बहाल करना है.

वैसे कहने को दोनों देशों के बीच सीजफायर है, लेकिन जमीनी हकीकत ये है कि अमेरिका और ईरान के बीच समझौते पर अब तक कोई सहमति नहीं बन सकी है. हालात ऐसे हैं कि हर बातचीत तीन बड़े मुद्दों पर आकर अटक जाती है और यही गतिरोध महायुद्ध की आशंकाओं को फिर से हवा दे रहा है.

ईरान और अमेरिका के बीच डील की राह में सबसे बड़ी बाधा तीन अहम मुद्दे हैं. पहला ईरान का परमाणु कार्यक्रम, दूसरा होर्मुज स्ट्रेट में नाकाबंदी और तीसरा भविष्य में हमले ना करने की गारंटी. अमेरिका इन तीनों पर अपनी शर्तों से पीछे हटने को तैयार नहीं है, वहीं ईरान भी परमाणु मिशन को छोड़ नहीं रहा है. 

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ट्रंप का दावा- ईरान कमजोर, डील के लिए मजबूर

यही वजह है कि हर हफ्ते नए संशोधनों के साथ प्रस्ताव आते हैं, लेकिन किसी पर मुहर नहीं लग पा रही. ट्रंप का कहना है कि ईरान अब पहले जैसा मजबूत नहीं रहा. उनके मुताबिक, वे डील करना चाहते हैं. वे पूरी तरह कमजोर हो चुके हैं. उन्हें यह भी समझ नहीं आ रहा कि उनका नेता कौन है. वो मजबूर है.

राष्ट्रपति ट्रंप ने यह भी कहा कि उन्हें डील का कॉन्सेप्ट बताया गया है और जल्द ही पूरा मसौदा उनके सामने रखा जाएगा. उन्हें भरोसा है कि देर-सवेर ईरान को झुकना पड़ेगा. सबसे बड़ा सवाल यही है कि यदि डील नहीं हुई तो क्या होगा. इस पर ट्रंप ने साफ कहा कि सैन्य कार्रवाई एक विकल्प है.

उन्होंने कहा, ''मैं अभी यह नहीं कह सकता, लेकिन यदि वे गलत कदम उठाते हैं तो यह संभव है.'' यानी साफ है कि अमेरिका ने हमले का विकल्प खुला रखा है. इस बीच होर्मुज को लेकर तनाव लगातार बढ़ता जा रहा है. अमेरिकी नाकाबंदी के चलते ईरान की आर्थिक हालत पर असर पड़ा है. 

भारी मात्रा में तेल उत्पादन के बावजूद वह उसे बेच नहीं पा रहा, जिससे उसकी आय पर दबाव बढ़ रहा है. इसका असर चीन जैसे देशों पर भी पड़ रहा है, जो ईरान से बड़े पैमाने पर तेल खरीदते रहे हैं. इसके बावजूद अमेरिका नाकाबंदी हटाने को तैयार नहीं है. ट्रंप ने इसे फ्रेंडली ब्लॉकेड बताया है. 

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ईरान का नया प्रस्ताव, फिर भी नहीं बनी बात

ईरानी मीडिया के मुताबिक, ट्रंप के 9 शर्तों वाले प्लान के जवाब में ईरान ने 14 शर्तों वाला प्रस्ताव पाकिस्तान के जरिए भेजा है. इस प्रस्ताव में तनाव कम करने के लिए चरणबद्ध योजना, होर्मुज में राहत और परमाणु मुद्दे पर लचीलापन शामिल है. ईरान ने प्रतिबंधों में ढील और सुरक्षा गारंटी की भी मांग की है.

ईरान का कहना है कि वह शांति के लिए तैयार है, लेकिन अपनी शर्तों के साथ. उप विदेश मंत्री काजेम गरीबाबादी ने कहा कि अब फैसला अमेरिका को करना है कि वह कूटनीति का रास्ता चुनता है या टकराव का. 28 फरवरी को शुरू हुआ यह संघर्ष भले 8 अप्रैल से रुका हुआ है, लेकिन हालात अब भी बेहद नाजुक हैं. 

होर्मुज में तनाव, तेल आपूर्ति पर असर और वैश्विक बाजारों में अनिश्चितता ने पूरी दुनिया की चिंता बढ़ा दी है. फिलहाल, दोनों देशों के बीच बातचीत जारी है, लेकिन भरोसे की कमी और सख्त शर्तों के चलते डील की राह मुश्किल बनी हुई है. अब नजर इस बात पर है कि नया प्रस्ताव शांति लाता है या फिर युद्ध तय है.

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