इजरायल सेना की ओर से "जानबूझकर और टारगेट करके" किए गए हमले में 20 हजार से ज्यादा फिलिस्तीनी बच्चे मारे गए हैं. UN जांच आयोग की एक रिपोर्ट में ये खुलासा हुआ है. श्रीनिवासन मुरलीधर की अध्यक्षता वाले UN जांच आयोग ने कहा है कि अक्तूबर 2023 से अब तक इजरायली सेना के "जानबूझकर और टारगेट करके" किए गए हमलों में 20,000 से ज़्यादा फ़िलिस्तीनी बच्चे मारे गए हैं.
ओडिशा हाई कोर्ट के पूर्व चीफ़ जस्टिस मुरलीधर ने मंगलवार को जिनेवा में एक प्रेस कॉन्फ़्रेंस में कहा कि उन्हें "फ़िलिस्तीनी बच्चों की जानबूझकर और टारगेट करके की गई हत्याओं" के बारे में "ठोस सबूत" मिले हैं.
इंडिपेंडेंट इंटरनेशनल कमीशन ऑफ़ इंक्वायरी ने अपनी 100 पन्नों की रिपोर्ट में कहा कि 7 अक्टूबर 2023 और 7 अक्टूबर 2025 के बीच, गाज़ा में हुई हिंसा के कारण कम से कम 20,179 बच्चे मारे गए और 44,143 बच्चे घायल हुए. इस दौरान मारे गए लोगों में 30 प्रतिशत और घायल हुए लोगों में 26 प्रतिशत बच्चे थे.
इजरायल ने इस रिपोर्ट को खारिज कर दिया और इसे "झूठा और मनगढ़ंत" बताया है. उसने कहा, "जांच आयोग मूल रूप से एक दोषपूर्ण व्यवस्था है, जिसका मकसद सच का पता लगाने के बजाय इज़रायल को निशाना बनाना और उसे बदनाम करना है."
आयोग ने 7 अक्टूबर 2023 को हमास द्वारा इजरायल पर हमले के बाद से फिलिस्तीनी बच्चों के खिलाफ हुए उल्लंघनों और अपराधों की जांच की, इस जांच में इजरायली सुरक्षा बलों द्वारा उन्हें पहुंचाया गया गंभीर शारीरिक और मानसिक नुकसान भी शामिल है.
दक्षिणी इजरायल पर हमास के हमले में लगभग 1200 लोग मारे गए और 251 लोगों को बंधक बना लिया गया.
मुरलीधर ने कहा, "आयोग को फिलिस्तीनी बच्चों की जान-बूझकर और टारगेट करके की गई हत्याओं के पक्के सबूत मिले हैं. इनमें अक्टूबर 2025 में हुए सीजफायर के बाद की घटनाएं भी शामिल हैं. साथ ही बच्चों को टॉर्चर करने, उनके साथ अमानवीय और अपमानजनक व्यवहार करने और बच्चों के लिए जरूरी अहम सुविधाओं जैसे अनाथालय, हेल्थकेयर और शिक्षा केंद्रों को टारगेट करने के सबूत भी मिले हैं."
उन्होंने आगे कहा कि 7 अक्टूबर 2023 और अक्टूबर 2025 के बीच बच्चों की हत्या और उन्हें नुकसान पहुंचाने की घटनाएं "बड़े पैमाने पर और सुनियोजित तरीके से" हुईं.
रिपोर्ट में कहा गया है कि अक्टूबर 2025 तक गाज़ा में मारे गए बच्चे वहां की 12 लाख बच्चों की आबादी का लगभग दो प्रतिशत हैं. इस दौरान पांच साल से कम उम्र के कम से कम 5,031 बच्चे मारे गए, जिनमें से 1,029 बच्चे एक साल से कम उम्र के थे और लगभग 420 नवजात शिशु थे.
इजरायल की प्रतिक्रिया
इस रिपोर्ट पर प्रतिक्रिया देते हुए इजरायली विदेश मंत्रालय ने कहा कि यह "यह रिपोर्ट हमास द्वारा बेरहमी से मारे गए, अगवा किए गए और निशाना बनाए गए इज़रायली बच्चों को पूरी तरह से नज़रअंदाज़ करती है, साथ ही हमास द्वारा फ़िलिस्तीनी बच्चों को इंसानी ढाल और युद्ध के मोहरे के तौर पर इस्तेमाल करने की चालाक हरकत को भी अनदेखा करती है."
मंत्रालय ने आगे कहा, "COI के दावों की पुष्टि करने के लिए कोई भरोसेमंद तरीका भी नहीं है."
आयोग का कहना है कि गाज़ा में लड़ाई के कारण मारे गए और घायल हुए बच्चों की संख्या बताई गई संख्या से "निश्चित रूप से ज़्यादा" है. 'सेव द चिल्ड्रन' का अनुमान है कि लगभग 5,160 बच्चे मलबे के नीचे दबे हो सकते हैं.
मुरलीधर ने कहा कि आयोग के निष्कर्षों के अनुसार, "इजरायल आबादी की जीवन-शक्ति को कमज़ोर करने और फ़िलिस्तीनी लोगों के आत्म-निर्णय के अधिकार को नकारने के लिए बच्चों को निशाना बनाता है."
जानबूझकर फ़िलिस्तीनी बच्चों को निशाना बनाया
उन्होंने कहा कि इकट्ठा किए गए सभी सबूतों के आधार पर रिपोर्ट इस नतीजे पर पहुंचती है कि इजरायली अधिकारियों और इजरायली सुरक्षा बलों ने "जानबूझकर फ़िलिस्तीनी बच्चों को निशाना बनाया और मारा है, और उनके बचपन को बर्बाद किया है."
यूएन की इस रिपोर्ट में कहा गया है कि इजरायली अधिकारी और सुरक्षा बल गाजा पट्टी में उत्पीडन और युद्ध अपराधों और वेस्ट बैंक में युद्ध अपराधों समेत मानवता के खिलाफ अपराधों के लिए ज़िम्मेदार हैं."
मुरलीधर ने कहा कि फिलिस्तीनी बच्चों और गर्भवती महिलाओं की सुरक्षा, देखभाल और जीवन रक्षा, फ़िलिस्तीनी लोगों के आत्म-निर्णय के मौलिक अधिकार से "अटूट रूप से जुड़ी" है.
मुरलीधर ने कहा, "बच्चों को निशाना बनाकर, इज़रायल फ़िलिस्तीनी समाज के बुनियादी ढांचे को कमजोर कर रहा है और फिलिस्तीनी लोगों की उस जनसांख्यिकीय जीवंतता और समग्र क्षमता को घटा रहा है, जिसके जरिए वे एक समुदाय के तौर पर अपना भविष्य तय करने के अधिकार को बनाए रख सकते हैं और उसका इस्तेमाल कर सकते हैं."
इस रिपोर्ट में हमास की कारगुजारियों पर भी प्रकाश डाला है. मुरलीधर ने कहा है कि हमास ने गाजा में फ़िलिस्तीनियों के ख़िलाफ़ बार-बार गंभीर अत्याचार किए हैं. हमास ने इजरायली सैन्य हमलों और कानून-व्यवस्था के पूरी तरह चरमरा जाने का फायदा उठाकर फिलिस्तीनियों के दमन, उन्हें प्रताड़ित करने और उनकी गैर-कानूनी हत्याओं के अभियान चलाए हैं.